ब्लिट्ज ब्यूरो
तिरुवनंतपुरम। केरल के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर सी.पी. जॉन ने राज्य सरकार की महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजना पर टिप्पणी करके एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। केरल बस ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के राज्य सम्मेलन में मंत्री ने कहा कि केरल के लोगों का व्यवहार और उनके व्यवहार-विज्ञान को समझना और उस पर अमल करना कोई आसान काम नहीं है। कोई अमीर आदमी गरीब या बेसहारा होने का नाटक कर रहा है, नाटक करना कोई मामूली बात नहीं है लेकिन एक बात जो मेरी समझ में नहीं आती, वह यह है, एक महिला जिसके पास बस का किराया देने के लिए पैसे नहीं हैं, वह फिर भी अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में भेजती हैैं। अगर बिना फीस वाले सरकारी स्कूलों में सीटें उपलब्ध हों, तब भी वह अपने बच्चों को ऐसे प्राइवेट स्कूल में भेजती है जहां फीस लगती है।
सरकारी अस्पताल में इलाज को लेकर भी तंज
मंत्री ने आगे कहा कि हालांकि, जब बात हेल्थकेयर की आती है, तो वही महिला अपने पिता या पति के साथ सरकारी अस्पताल आती है और इलाज के लिए जमीन पर भी लेट जाती है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट, शिक्षा और हेल्थकेयर के क्षेत्रों में केरल के लोगों का व्यवहार मुझे सचमुच हैरान करता है। वे खचाखच भरी पब्लिक ट्रांसपोर्ट बसों में सफर करते हैं, अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में भेजते हैं, लेकिन जब उन्हें इलाज की जरूरत होती है, तो वे प्राइवेट अस्पतालों में नहीं जाते, क्योंकि उन्हें अस्पताल के बिलों से डर लगता है।
मंत्री बोले- अपनी बात पर कायम
मंत्री की इन टिप्पणियों की आम जनता और राजनीतिक हलकों में काफी आलोचना हो रही है। विवाद बढ़ा लेकिन मंत्री ने फिर दोहराया कि वह अपनी बात पर कायम हैं। जॉन ने कहा कि कुछ महिलाएं ऐसी हैं, जिनके पास घूमने-फिरने के लिए भी पैसे नहीं हैं। दुख की बात यह है कि राजनीतिक नेतृत्व, जिसमें मैं भी शामिल हूं, उनकी गरीबी को समझने में नाकाम रहा। मैं यही बात कह रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बातों का गलत मतलब न निकाला जाए।














