ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। भारत में हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं और इसके लिए नीट की तैयारी करते हैं। हालांकि, देश में सीमित एमबीबीएस सीटों और कड़े मुकाबले के कारण बड़ी संख्या में छात्र विदेश जाकर एमबीबीएस करने का रास्ता चुनते हैं। रूस, चीन, यूक्रेन जैसे देशों से पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों के लिए सबसे बड़ी चुनौती भारत लौटने पर फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) को पास करना होता है।
नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) द्वारा आयोजित एफएमजीई परीक्षा का पास प्रतिशत अक्सर बहुत कम रहता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में 5 ऐसे देश भी हैं जहां से यदि आप एमबीबीएस मेडिकल की डिग्री प्राप्त करते हैं, तो आपको भारत में प्रैक्टिस करने के लिए एफएमजीई परीक्षा देने की जरूरत नहीं होती?
ये हैं वे 5 देश
अमेरिका : अमेरिका में छात्रों को एमबीबीएस की जगह एमडी की डिग्री दी जाती है। वहां डॉक्टर बनने के लिए पहले चार साल का ग्रेजुएशन और फिर चार साल का एमडी कोर्स करना होता है, जिसमें कुल आठ साल का समय लगता है। इसी दौरान छात्रों को उच्च स्तरीय प्रैक्टिकल और क्लिनिकल ट्रेनिंग दी जाती है। यही कारण भारत में अमेरिका से पढ़े डॉक्टरों को बिना एफएमजीई परीक्षा के सीधे प्रैक्टिस की इजाजत मिलती है।
यूनाइटेड किंगडम : ब्रिटेन (यूके) में एमबीबीएस की पढ़ाई 5 से 6 साल की होती है। यहां पढ़ाई की शुरुआत से ही छात्रों को नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) के अस्पतालों में क्लिनिकल ट्रेनिंग दी जाती है। यूके की विश्वस्तरीय शिक्षा गुणवत्ता के कारण भारत में उनकी डिग्री को सीधे स्वीकार किया जाता है।
कनाडा : कनाडा भी अमेरिका की तरह 8 साल का मेडिकल एजुकेशन पैटर्न अपनाता है, जिसमें 4 साल की ग्रेजुएशन डिग्री के बाद एमसीएटी परीक्षा पास कर 4 साल का एमडी प्रोग्राम पूरा करना होता है। यहां का मजबूत क्लिनिकल एक्सपोजर भारतीय छात्रों को भारत में बिना एफएमजीई दिए प्रैक्टिस का अवसर देता है।
ऑस्ट्रेलिया: ऑस्ट्रेलिया में 5 से 6 साल का मेडिकल प्रोग्राम होता है। यहां छात्रों को बेहतरीन मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक क्लिनिकल ट्रेनिंग मिलती है। इस कारण ऑस्ट्रेलिया से प्राप्त मेडिकल डिग्री को एनएमसी द्वारा सीधे मान्यता प्रदान की जाती है।
न्यूजीलैंड : न्यूजीलैंड में लगभग 6 साल की पढ़ाई के दौरान छात्रों को अस्पतालों में प्रैक्टिकल क्लिनिकल ट्रेनिंग दी जाती है। यहां की एमबीसीएचबी डिग्री को भारत में बिना किसी प्रवेश या लाइसेंसिंग परीक्षा के सीधे प्रैक्टिस के लिए मान्य माना जाता है।
छात्रों के लिए महत्वपूर्ण सलाह
छात्रों को इन पांच देशों में दाखिला लेने से पहले पढ़ाई की लागत, कोर्स की अवधि और एनएमसी के सभी नए दिशा-निर्देशों की पूरी जानकारी जुटा लेनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की कानूनी या शैक्षणिक अड़चन का सामना न करना पड़े।














