ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।आज सोना 1.4 फ़ीसदी चढ़कर 1,52,803 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया और चांदी 1.7 फ़ीसदी बढ़कर 2,35,352 रुपये प्रति किलो। उधर कच्चा तेल 90 डॉलर के क़रीब पहुँच गया। इसका आप पर क्या असर पड़ेगा — यह समझने के लिए तीनों को एक साथ देखना पड़ेगा।
सिलसिला यहाँ से शुरू होता है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अटक गई, जिसके बाद ब्रेंट कच्चा तेल 2.44 फ़ीसदी चढ़कर 89.86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया — 31 जुलाई के बाद का सबसे ऊँचा स्तर। भारत अपनी ज़रूरत का ज़्यादातर तेल बाहर से ख़रीदता है, इसलिए हर बार जब तेल चढ़ता है तो तीन चीज़ें एक साथ हिलती हैं: आयात का बिल, रुपया और महंगाई का अंदेशा। आज रुपया 15 पैसे कमज़ोर होकर 95.44 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, और शेयर बाज़ार में सेंसेक्स 388 अंक गिरा। जब रुपया कमज़ोर होता है और दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, तो पैसा सोने की तरफ़ भागता है — और सोना चढ़ जाता है।
एक ही वजह, तीन दाम: तेल, रुपया और सोना अलग-अलग बाज़ार हैं — पर आज तीनों को हिलाने वाली ख़बर एक ही थी।
सीधी बात यह है — तेल का दाम विदेश में तय होता है, पर उसका असर आपकी रसोई और आपकी शादी की ख़रीदारी, दोनों तक आता है।
एक नज़र में
• 24 कैरेट सोना: ₹1,52,803 प्रति 10 ग्राम, 1.4 फ़ीसदी ऊपर
• चांदी: ₹2,35,352 प्रति किलो, 1.7 फ़ीसदी ऊपर
• एमसीएक्स सोना (अक्टूबर वायदा): ₹1,53,869, 0.50 फ़ीसदी ऊपर
• ब्रेंट कच्चा तेल: $89.86 प्रति बैरल, 2.44 फ़ीसदी ऊपर
• रुपया: 15 पैसे कमज़ोर होकर 95.44 प्रति डॉलर
• सेंसेक्स: 78,154 — 388 अंक नीचे
• वजह: अमेरिका-ईरान बातचीत में गतिरोध
• फिच का अनुमान: आरबीआई ब्याज दर 25 आधार अंक बढ़ा सकता है
अब सबसे काम की बात — इसका सीधा असर आप पर कहाँ पड़ेगा। पहला, अगर घर में शादी है या सोना ख़रीदने की सोच रहे हैं, तो याद रखिए कि यह भाव पिछले कुछ महीनों की ऊँचाई पर है और इसका बड़ा हिस्सा दुनिया की अनिश्चितता से बना है, भारत की माँग से नहीं। दूसरा, चांदी सोने से ज़्यादा चढ़ी है, और यह अक्सर तब होता है जब उद्योग की माँग भी साथ में बढ़े — चांदी सिर्फ़ गहना नहीं, सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स का कच्चा माल भी है। तीसरा, अगर आपने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड ले रखा है, तो आज आरबीआई ने 2019-20 सीरीज़ IX और 2020-21 सीरीज़ V की समय-पूर्व निकासी क़ीमत 14,957 रुपये प्रति यूनिट तय की है।
और तेल? यहाँ राहत की एक बड़ी बात है जो शोर में दब जाती है। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक़ अब भारत का करीब 70 फ़ीसदी कच्चा तेल होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बाहर से आता है, और भारत क़रीब 40 देशों से तेल ख़रीदता है। यानी तेल आने में रुकावट का ख़तरा काफ़ी घट चुका है। जो नहीं घटा वह है दाम, क्योंकि बैरल का भाव दुनिया तय करती है, चाहे वह कहीं से भी चले। घर के स्तर पर इसका जवाब भी वही पुराना और भरोसेमंद है — जितना ईंधन बचेगा, उतना बिल घटेगा। बाक़ी सब बाज़ार के हाथ में है।













