• Latest
  • Trending
सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट में चार जज और बढ़ेंगे: आज पास हुए बिल का सीधा मतलब क्या है

August 3, 2026
नारियल उद्योग

नारियल का छिलका, सात लाख लोगों की रोजी

October 14, 2026
कृषि भवन, नई दिल्ली में पराली प्रबंधन की समीक्षा बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव। फोटो : पीआईबी

हरियाणा में पराली की आग 53% घटी

October 14, 2026
प्रधानमंत्री मोदी

भारत की विकास गाथा: स्टार्टअप, व्यापार, डेटा और खादी

October 13, 2026
प्याज

प्याज महंगा, सेना को 27 पदक और नई रक्षा पहल

October 13, 2026
dal

दाल का आयात बिल 14,634 करोड़ रुपये घटा

October 12, 2026
daily-news

सप्ताह की समीक्षा: रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी, GST नियमों में राहत और रिकॉर्ड रक्षा निर्यात

October 11, 2026
daily-news

14416 पर चार साल में 47.75 लाख कॉल

October 10, 2026
medicine

दवा, कोयला, खादी और व्यापार पर सरकार के नए कदम

October 9, 2026
अर्थव्यवस्था

जीएसटी सुधार, नाविकों की संख्या और भारतनेट का विस्तार

October 9, 2026
यशोभूमि, नई दिल्ली में 10वें इंडिया मोबाइल कांग्रेस के उद्घाटन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, 8 अक्टूबर 2026। श्रेय : पीएमओ (pmindia.gov.in)

किसान के फोन पर किस्त, हर जिले में 5जी

October 8, 2026
यूपीआई और डीपीआई ने बदली भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था

कर्ज महंगा, पर अर्थव्यवस्था 7.1% की रफ्तार पर

October 7, 2026
भारत विकास: वीजा, रक्षा, खेल और ऊर्जा की बड़ी खबरें

भारत विकास: वीजा, रक्षा, खेल और ऊर्जा की बड़ी खबरें

October 6, 2026
Wednesday, October 14, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

सुप्रीम कोर्ट में चार जज और बढ़ेंगे: आज पास हुए बिल का सीधा मतलब क्या है

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 3, 2026
in the blitz
0
सुप्रीम कोर्ट

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।लोकसभा ने आज ध्वनिमत से सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पास कर दिया। इससे सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़कर 37 हो जाएगी — यह गिनती मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर है। मुख्य न्यायाधीश को जोड़ दें तो अदालत की पूरी संख्या 34 से 38 हो जाएगी।

अब समझिए कि इसका असर कैसे पड़ता है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का हिसाब आम अदालत जैसा नहीं है। यहाँ सारे जज एक साथ नहीं बैठते। मुक़दमे बेंच में सुने जाते हैं — आम तौर पर दो जजों की, कभी तीन या उससे ज़्यादा की। इसलिए जजों की संख्या यह तय नहीं करती कि आपका मुक़दमा कितने जज सुनेंगे; वह यह तय करती है कि एक दिन में कितनी बेंच एक साथ बैठ सकती हैं। चार जज बढ़ने का मतलब है क़रीब दो बेंच और — यानी अदालत की रोज़ाना सुनवाई की क्षमता में क़रीब बारह प्रतिशत की बढ़ोतरी। यह विधेयक 1956 के सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम में संशोधन करता है, और इसी साल मई में जारी अध्यादेश की जगह लेगा।

YOU MAY ALSO LIKE

नारियल का छिलका, सात लाख लोगों की रोजी

हरियाणा में पराली की आग 53% घटी

जज नहीं, बेंच गिनिए: दो-दो जजों की बेंच बैठती है, इसलिए चार जज बढ़ने का मतलब है हर दिन क़रीब दो कमरे और, जिनमें एक साथ सुनवाई हो सके।

जजों की संख्या यह तय नहीं करती कि आपको कौन सुनेगा। वह यह तय करती है कि हफ़्ते में कितनी सुबहें ऐसी होंगी जब कोई सुन सके।

एक नज़र में

• विधेयक: सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026
• कब पास: लोकसभा में 3 अगस्त 2026 को, ध्वनिमत से
• बदलाव: स्वीकृत संख्या 33 से 37 (मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर)
• कुल: मुख्य न्यायाधीश सहित 34 से 38
• किसमें संशोधन: सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956
• पेश किया: केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री ने
• इससे पहले: मई 2026 में राष्ट्रपति द्वारा जारी अध्यादेश

आम मुक़दमेबाज़ के लिए इसका मतलब उतना बड़ा नहीं है जितना सुर्ख़ी से लगता है, और यही ईमानदार बात है। भारत की अदालतों का ढाँचा पिरामिड जैसा है और लंबित मुक़दमों का बड़ा हिस्सा नीचे, ज़िला अदालतों में है। ऊपर की क्षमता बढ़ाने से वे मामले तेज़ी से निपटेंगे जो सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचते हैं — अपील, संवैधानिक सवाल, तबादले की अर्ज़ियाँ — और सुनवाई की तारीख़ जल्दी मिलेगी, जो ज़मानत, ज़मीन-जायदाद और कारोबारी विवादों में सीधे फ़र्क़ डालती है। लेकिन ज़िला अदालत की क़तार इससे अपने आप छोटी नहीं होगी।

इसलिए इस बिल को अकेले उपाय की तरह नहीं, एक कड़ी की तरह देखना चाहिए। ऊपर की क्षमता तभी पूरा असर दिखाती है जब नीचे तीन काम साथ चलें — हाईकोर्ट में खाली पड़े पदों पर नियुक्तियाँ, मुक़दमों के काग़ज़ों का डिजिटलीकरण ताकि नई बेंच फ़ाइल के एक रजिस्ट्री से दूसरी तक पहुँचने का इंतज़ार न करे, और एक जैसे मामलों के लिए विशेष बेंच ताकि नज़ीर जल्दी तय हो। ये तीनों काम पहले से चल रहे हैं। चार जज बढ़ना अपने आप में अच्छी बात है — और अगर इनके नीचे की नियुक्तियाँ भी उतनी ही तेज़ी से हों, तो कहीं बेहतर।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation