ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।इसका आप पर क्या असर पड़ेगा — अगर घर का कोई सदस्य खाड़ी में है, तो यह ख़बर सीधे आपके लिए है। खाड़ी के छह देशों के साथ भारत का व्यापार पिछले पूरे आंकड़े में 178.56 अरब डॉलर था, यानी भारत के कुल विदेश व्यापार का 15.42 प्रतिशत। और इन देशों में करीब 1.8 करोड़ भारतीय काम करते हैं — दुनिया का सबसे बड़ा एक-तरफ़ा पैसा भेजने वाला रास्ता यहीं से बनता है।
अब वह बदलाव जो कम लोगों ने देखा। भारत आने वाले कुल विदेशी पैसे में संयुक्त अरब अमीरात का हिस्सा 2016–17 में 26.9 प्रतिशत था, जो 2023–24 में घटकर 19.2 प्रतिशत रह गया। सऊदी अरब का हिस्सा इसी दौरान 11.6 प्रतिशत से घटकर 6.7 प्रतिशत रह गया। यह इसलिए नहीं हुआ कि खाड़ी से पैसा आना बंद हो गया। यह इसलिए हुआ कि भारतीयों का पलायन अब ज़्यादा कमाई वाले देशों की तरफ़ भी बढ़ा है, तो कुल रकम में खाड़ी का अनुपात घट गया। सीधी बात यह है कि खाड़ी अब भी सबसे बड़ी है, पर अकेली नहीं रही।
यूपी, बिहार, केरल और राजस्थान: खाड़ी जाने वाले कामगारों का बड़ा हिस्सा इन्हीं राज्यों से है, और वहां से आया पैसा गांव के बाज़ार को चलाता है।
खाड़ी से आया पैसा किसी आंकड़े में दर्ज होने से पहले घर की छत, बेटी की पढ़ाई और खेत की मरम्मत में लग चुका होता है।
एक नज़र में
• भारत-खाड़ी व्यापार: 178.56 अरब डॉलर — भारत के कुल विदेश व्यापार का 15.42%
• भारत का निर्यात: 56.87 अरब डॉलर · आयात: 121.68 अरब डॉलर
• कितने भारतीय: खाड़ी देशों में करीब 1.8 करोड़
• यूएई का हिस्सा: भारत आने वाले पैसे में 2016–17 के 26.9% से घटकर 2023–24 में 19.2%
• सऊदी अरब: 11.6% से घटकर 6.7%
• ओमान समझौता: 1 जून 2026 से लागू — ओमान की 98.08% वस्तुओं पर ड्यूटी ख़त्म
• जीसीसी समझौता: पूरे खाड़ी समूह के साथ बातचीत फरवरी 2026 में शुरू
अब वह हिस्सा जो नौकरी से जुड़ा है। भारत का ओमान के साथ व्यापार समझौता 1 जून 2026 से लागू हो चुका है — इसमें ओमान ने अपनी 98.08 प्रतिशत वस्तुओं पर ड्यूटी हटा दी है, जो भारत के निर्यात के 99.38 प्रतिशत हिस्से को कवर करता है। यूएई के साथ ऐसा समझौता 2022 से चल रहा है। और फरवरी 2026 में पूरे खाड़ी समूह यानी जीसीसी के साथ एक बड़ा समझौता करने की बातचीत शुरू हो चुकी है। इन समझौतों का सीधा असर कामगार पर नहीं दिखता, पर रास्ता यह है: जब भारतीय कंपनियों का सामान वहां सस्ता पहुंचता है, तो वहां भारतीय कंपनियों के दफ़्तर और ठेके बढ़ते हैं, और उन ठेकों पर काम करने वाले लोग ज़्यादातर भारत से ही जाते हैं।
घर बैठे परिवार के लिए काम की बात यह है। पैसा भेजने का सबसे सस्ता तरीक़ा बैंक का औपचारिक रास्ता है, हवाला नहीं — और अब यूपीआई कई खाड़ी देशों में स्वीकार होने लगा है, जिससे लागत और घटती है। दूसरा, विदेश जाने से पहले ई-माइग्रेट पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और मान्यता प्राप्त भर्ती एजेंट की जांच वह दो क़दम हैं जो बाद की नब्बे प्रतिशत परेशानी बचाते हैं। तीसरा, जिन राज्यों से सबसे ज़्यादा लोग खाड़ी जाते हैं — उत्तर प्रदेश, बिहार, केरल, राजस्थान — वहां प्रवासी सहायता केंद्र काम कर रहे हैं, और वेतन न मिलने या पासपोर्ट रखे जाने जैसे मामलों में भारतीय दूतावास सीधे दख़ल देता है। खाड़ी अब भी सबसे बड़ा रास्ता है। उसे सुरक्षित बनाने का काम काग़ज़ों से शुरू होता है, टिकट से नहीं।














