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यूपी में आज से दिव्यांगों के लिए रोज़गार अभियान: हर सरकारी आईटीआई में कैंप, 10 अगस्त तक मौक़ा

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 3, 2026
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दिव्यांग रोजगार अभियान

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।अगर आपके घर या मोहल्ले में कोई दिव्यांग युवा नौकरी या अपना काम शुरू करने की कोशिश कर रहा है, तो अगले आठ दिन उसके लिए अहम हैं। उत्तर प्रदेश में आज, 3 अगस्त से 10 अगस्त तक ‘दिव्यांगजन रोज़गार अभियान 3.0’ चलेगा।

अभियान की सबसे काम की बात इसकी जगह है। कैंप प्रदेश के हर सरकारी आईटीआई में लगेंगे — यानी हर ज़िले में कम से कम एक जगह, और वह जगह पहले से जानी-पहचानी है। तीन तरह की मदद एक ही छत के नीचे रखी गई है: कंपनियों में नौकरी के लिए सीधी भर्ती, अपना काम शुरू करने के लिए स्वरोज़गार योजनाओं में आवेदन, और उसके लिए बैंक क़र्ज़ की प्रक्रिया। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने इसे इस तरह बनाया है कि जिन युवाओं ने पहले से कोई हुनर सीखा है और जिन्होंने नहीं भी सीखा, दोनों को उनकी योग्यता के हिसाब से काम से जोड़ा जा सके।

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एक ही छत के नीचे तीन काम: भर्ती, स्वरोज़गार योजना का आवेदन और बैंक क़र्ज़ की प्रक्रिया — इसी वजह से ऐसे कैंप अलग-अलग दफ़्तरों के चक्कर से ज़्यादा कारगर होते हैं।

दिक़्क़त हुनर की नहीं होती। दिक़्क़त यह होती है कि नौकरी देने वाला और नौकरी ढूँढ़ने वाला एक ही कमरे में कभी नहीं पहुँचते।

एक नज़र में

• कब: 3 अगस्त से 10 अगस्त 2026
• कहाँ: उत्तर प्रदेश के सभी सरकारी आईटीआई
• क्या मिलेगा: कंपनियों में भर्ती · स्वरोज़गार योजनाओं में आवेदन · बैंक क़र्ज़ की मदद
• किसने बनाया: उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन
• निगरानी: ज़िला स्तर पर मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति
• प्रोत्साहन: सबसे बेहतर काम करने वाले पाँच ज़िलों को सम्मान
• साथ ले जाएँ: दिव्यांगता प्रमाण-पत्र, आधार, शैक्षिक और हुनर के प्रमाण-पत्र, बैंक पासबुक

निगरानी का ढाँचा भी ध्यान देने लायक़ है, क्योंकि ऐसे अभियानों की असली परीक्षा यही होती है। हर ज़िले में मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में समिति काम देखेगी, और सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले पाँच ज़िलों को सम्मान मिलेगा। यह छोटी बात लगती है, पर व्यवहार में यही तय करता है कि कैंप में कुर्सियाँ भरती हैं या नहीं — जब ज़िले का प्रदर्शन गिना जाता है, तो कंपनियों को बुलाने और युवाओं तक ख़बर पहुँचाने का काम भी होता है।

जाने से पहले काग़ज़ तैयार रखिए — दिव्यांगता प्रमाण-पत्र, आधार, पढ़ाई और हुनर के प्रमाण-पत्र, और बैंक पासबुक। ज़्यादातर मामलों में आवेदन उसी दिन पूरा हो जाता है, और अधूरे काग़ज़ ही सबसे बड़ी रुकावट बनते हैं। आगे की राह इतनी सी है कि यह अभियान आठ दिन का न रहकर साल भर की व्यवस्था बन जाए: हर आईटीआई में एक स्थायी रोज़गार डेस्क, कंपनियों की एक सूची जो दिव्यांग कर्मचारियों को नियमित रखती हैं, और तीन महीने बाद यह देखना कि जिन्हें नौकरी मिली वे टिके या नहीं। भर्ती का दिन शुरुआत है — टिकाऊ काम असली नतीजा है।

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