• Latest
  • Trending
renewable-energy-1.webp

दिन की धूप का हल भारत ने निकाल लिया। असली समस्या अब शाम सात बजे की है।

August 2, 2026
Sarbananda Sonowal

तीन साल में आधी सिफ़ारिश पर हुआ अमल

August 27, 2026
दिल्ली लक्ष्मी योजना: 4,000 महिलाओं को स्वीकृति पत्र, 1 सितंबर से मिलेंगे ₹2,500

लक्ष्मी योजना: पैसा 1 सितंबर से, पर 2.61 लाख फॉर्म अधूरे

August 26, 2026
UPI

यूपीआई के दस साल: अब औसत भुगतान सिर्फ़ ₹1,300 का

August 26, 2026
भारत उच्च शिक्षा

एच-1बी पर एक लाख डॉलर की नई फ़ीस का प्रस्ताव

August 26, 2026
hospital

मौसमी बुखार सामान्य है, पर इन चार को इंतज़ार नहीं करना

August 26, 2026
ई-श्रम पोर्टल के 5 साल: 31.89 करोड़ श्रमिक जुड़े, जानें रजिस्ट्रेशन और योजनाओं का लाभ

ई-श्रम के पाँच साल: 31.89 करोड़ नाम, और आपका हक़

August 26, 2026
daily-news

26 अगस्त की बड़ी खबरें: पंजाब में चीनी स्टॉक, शिमला भूकंप, खेलो इंडिया, बाजार और इसरो लॉन्च

August 26, 2026
दिल्ली लक्ष्मी योजना 2026

दिल्ली लक्ष्मी योजना: पहले 4,000 पत्र आज

August 26, 2026
सुप्रीम कोर्ट

क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट में विशेष पीठ

August 26, 2026
Amit Sah

तीन नए कानून, और एक साल की समयसीमा

August 26, 2026
गेहूँ के आटा-मैदा निर्यात से हटी रोक, किसानों और मंडी भाव पर क्या होगा असर?

बारिश 13% कम, पर दाल का रकबा बढ़ गया

August 26, 2026
farmer

चार साल बाद गेहूं और आटे का निर्यात खुला

August 26, 2026
Thursday, August 27, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

दिन की धूप का हल भारत ने निकाल लिया। असली समस्या अब शाम सात बजे की है।

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 2, 2026
in the blitz
0
renewable-energy-1.webp

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।पहले आँकड़ा देख लीजिए, फिर बात साफ़ हो जाएगी। 30 जून तक देश में नवीकरणीय बिजली की कुल क्षमता 288.58 गीगावाट हो चुकी है — 2014 के 76.38 गीगावाट से करीब चार गुना। अकेले सौर ऊर्जा 162.15 गीगावाट है, पवन ऊर्जा 57.44, बड़ी पनबिजली 57.24 और बायो-पावर 11.75 गीगावाट। इसमें 8.78 गीगावाट परमाणु बिजली जोड़ दें तो गैर-जीवाश्म क्षमता 297.36 गीगावाट बैठती है, और 2030 का लक्ष्य 500 गीगावाट का है। इस साल के पहले छह महीनों में ही करीब 29 गीगावाट नई सौर और पवन क्षमता जुड़ी — रिकॉर्ड, और लगभग उतनी ही रफ़्तार जितनी 2030 का लक्ष्य माँगता है।

अब इस हफ़्ते के फ़ैसले को इस आँकड़े के साथ पढ़िए। शुक्रवार को कैबिनेट ने ‘प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना’ मंज़ूर की — 5,070 करोड़ रुपये, 5,000 मेगावाट तैरते हुए सोलर प्लांट के लिए। लेकिन असली बात इसकी दूसरी शर्त में है: हर प्रोजेक्ट के साथ कम से कम दो घंटे की बैटरी लगानी होगी, कुल मिलाकर 10,000 मेगावाट-घंटा। यानी यह योजना सिर्फ़ बिजली बनाने के लिए नहीं है। यह उस बिजली के लिए है जो सूरज डूबने के बाद भी मिल सके।

YOU MAY ALSO LIKE

तीन साल में आधी सिफ़ारिश पर हुआ अमल

लक्ष्मी योजना: पैसा 1 सितंबर से, पर 2.61 लाख फॉर्म अधूरे

आसान हिस्सा, बड़े पैमाने पर: कर्नाटक के पावागड़ा जैसे बड़े सोलर पार्कों की बदौलत भारत 2014 के 76 गीगावाट से इस जून तक 288.58 गीगावाट पहुँचा। मुश्किल हिस्सा बिजली बनाना नहीं है — मुश्किल यह है कि शाम सात बजे वह बिजली उपलब्ध हो।

सोलर पैनल दिन की आख़िरी यूनिट ठीक उसी वक़्त बनाता है जब घर में पहली बत्ती जलती है। इस फ़ासले को जो भी चीज़ पाटती है — बैटरी, जलाशय या ट्रांसमिशन लाइन — वह अब ग्रिड के लिए एक और पैनल से ज़्यादा क़ीमती है।

यह क्यों मायने रखता है

• 30 जून तक नवीकरणीय क्षमता 288.58 गीगावाट; सौर 162.15, पवन 57.44, बड़ी पनबिजली 57.24, बायो 11.75
• परमाणु मिलाकर गैर-जीवाश्म क्षमता 297.36 गीगावाट; 2030 का लक्ष्य 500 गीगावाट
• सूर्य सरोवर योजना: 5,070 करोड़ रुपये, 5,000 मेगावाट तैरता सोलर और 10,000 मेगावाट-घंटा भंडारण
• केंद्रीय मदद 1 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट — पर प्लांट चालू होने के बाद ही मिलेगी
• मार्च 2026 तक देश में बैटरी भंडारण करीब 5.9 गीगावाट-घंटा; 2031–32 तक ज़रूरत 236 गीगावाट-घंटा आँकी गई है
• तैरते प्लांट खेती की ज़मीन नहीं घेरते और जलाशय का पानी भाप बनकर कम उड़ता है

पीछे की वजह सीधी है। सौर बिजली दोपहर में सबसे ज़्यादा बनती है और शाम ढलते ही शून्य हो जाती है। भारत में बिजली की माँग इसका ठीक उल्टा करती है — वह शाम को चढ़ती है और अंधेरा होने के बाद सबसे ऊपर पहुँचती है, जब पंखे, बत्तियाँ, चूल्हे और एसी एक साथ चलते हैं। इंजीनियर इस आकार को ‘डक कर्व’ कहते हैं। दरअसल भारत के पास साफ़ बिजली की कमी नहीं है। कमी शाम साढ़े सात बजे की साफ़ बिजली की है — और अभी वह जगह कोयला भरता है।

इसका जवाब बैटरी है, और यहाँ रफ़्तार तेज़ है पर शुरुआत बहुत छोटी है। जनवरी–मार्च 2026 की तिमाही में अकेले 4.6 गीगावाट-घंटा बैटरी भंडारण जुड़ा, जबकि उससे पिछली तिमाही में यह सिर्फ़ 442.7 मेगावाट-घंटा था। मार्च तक कुल क्षमता करीब 5.9 गीगावाट-घंटा पहुँची। अब इसे ज़रूरत से मिलाकर देखिए — 2026–27 तक अनुमानित माँग 34 गीगावाट-घंटा है और 2031–32 तक 236 गीगावाट-घंटा। यानी छह साल में करीब चालीस गुना बढ़ना है। सरकार इसके लिए ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ का रास्ता अपना रही है — वही तरीक़ा जिस पर एसजेवीएन ने 24 जुलाई को हरियाणा में 265 मेगावाट/530 मेगावाट-घंटा की बैटरी परियोजना का टेंडर निकाला, और वही तर्क अब सूर्य सरोवर योजना के 1 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट में भी है।

दूसरी अड़चन कम चर्चा में रहती है और उसे सुलझाना ज़्यादा वक़्त माँगता है — तार। बिजली वहाँ बनती है जहाँ धूप और हवा है, यानी राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु; और ख़र्च वहाँ होती है जहाँ कारख़ाने और शहर हैं। ऊर्जा पर काम करने वाली संस्था एम्बर के विश्लेषण के मुताबिक़ इस साल की पहली तिमाही में करीब 300 गीगावाट-घंटा साफ़ बिजली ट्रांसमिशन की सीमाओं की वजह से ग्रिड तक नहीं पहुँच सकी, और यह दिक़्क़त ज़्यादातर उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रीय पूलिंग स्टेशनों पर रही। एक सोलर फ़ार्म साल भर में खड़ा हो जाता है; एक ट्रांसमिशन लाइन को मंज़ूरी और ज़मीन मिलने में उससे कहीं ज़्यादा समय लगता है।

बड़ी बात यह है कि यह किसी नाकामी की कहानी नहीं है — यह उस कार्यक्रम की अगली स्वाभाविक चुनौती है जो अपनी पहली चुनौती पार कर चुका है, और नीति ने इसे तेज़ी से पहचाना भी है। तैरता सोलर एक साथ तीन दिक़्क़तों का जवाब देता है: ज़मीन का झगड़ा ख़त्म, जलाशय का पानी कम भाप बनकर उड़ता है, और इस योजना के तहत बैटरी साथ ही आती है। सरकार का अनुमान है कि इससे हर साल करीब एक करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड कम होगी और 16 से 17 हज़ार रोज़गार बनेंगे। आगे का रास्ता भी साफ़ है — हर नए टेंडर के साथ बैटरी की शर्त जोड़ी जाए, धूप और हवा वाले राज्यों में ट्रांसमिशन लाइनों की मंज़ूरी बिजली परियोजनाओं से पहले दी जाए, और इन पाँच-साला योजनाओं की लंबी अवधि का इस्तेमाल देश में ही बैटरी बनाने की क्षमता खड़ी करने में हो। जो देश दस साल में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सौर बेड़ा बना सकता है, उसके लिए उस बिजली को शाम तक संभालकर रखना उससे छोटी इंजीनियरिंग समस्या है।

भारत और दुनिया

ब्रिटेन: भारत–ब्रिटेन व्यापार समझौता (सीईटीए) 15 जुलाई से लागू है और इस हफ़्ते इसने अपने पहले पूरे पखवाड़े का सफ़र पूरा किया। इसके तहत भारत के करीब 99% निर्यात को ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त पहुँच मिलती है। पहले ही दिन 14 करोड़ डॉलर से ज़्यादा का सामान बिना ड्यूटी भेजा गया — बीस से ज़्यादा बंदरगाहों, हवाई अड्डों और कंटेनर डिपो से करीब पचास खेप। सबसे ज़्यादा फ़ायदा कपड़ा उद्योग को मिलने की उम्मीद है, जहाँ भारतीय निर्यातक अब तक शुल्क-मुक्त प्रतिस्पर्धियों के सामने खड़े थे। इसका सीधा मतलब है — तिरुपुर, लुधियाना और सूरत जैसे शहरों में ऑर्डर और नौकरियाँ।

अमेरिका: द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत इस हफ़्ते भी जारी रही, और भारत की प्राथमिकता सूची में कपड़ा सबसे ऊपर है। अमेरिका में शुल्क की क़ानूनी स्थिति फ़रवरी के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद अब भी साफ़ नहीं है, और जुलाई के आख़िर में घोषित एक और शुल्क-दौर ने निर्यातकों की अनिश्चितता बढ़ाई है। भारत का रुख़ नहीं बदला — बातचीत जारी रखो, और बाज़ार फैलाते रहो।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष: आईएमएफ़ ने जुलाई की अपनी ताज़ा रिपोर्ट में भारत के 2026–27 के विकास दर के अनुमान को 6.5% से घटाकर 6.4% किया, और वजह मुख्य रूप से ऊँची ऊर्जा क़ीमतें बताईं। साथ ही 2027–28 का अनुमान 6.5% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया। इन्हीं आँकड़ों के हिसाब से भारत अब भी दुनिया की सबसे तेज़ बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में है — और जिस एक चीज़ ने अनुमान घटाया, इस हफ़्ते के ऊर्जा फ़ैसले ठीक उसी पर निशाना लगाते हैं।

ऊर्जा और समुद्र: ‘समुद्र मंथन’ योजना सिर्फ़ उद्योग की बात नहीं, विदेश नीति की भी बात है। भारत अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा तेल बाहर से ख़रीदता है। 84,084 करोड़ रुपये की यह योजना समुद्री सर्वे, गहरे पानी में खुदाई और साझा ढाँचे पर ख़र्च करके 600 मिलियन टन से ज़्यादा तेल-गैस भंडार जोड़ने का लक्ष्य रखती है। इसका सबसे सस्ता हिस्सा शायद सबसे क़ीमती है — सर्वे का डेटा, जिस पर एक बार पैसा लगने के बाद हर आने वाली कंपनी उसका इस्तेमाल कर सकती है।

आगे के हफ़्ते में क्या देखें

• रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति (3–5 अगस्त) — मौद्रिक नीति समिति सोमवार से बुधवार तक बैठेगी और गवर्नर संजय मल्होत्रा बुधवार, 5 अगस्त को फ़ैसला सुनाएँगे। रेपो दर अभी 5.25% है; ज़्यादातर अर्थशास्त्री इसके स्थिर रहने की उम्मीद कर रहे हैं। आपके होम लोन और एफ़डी की ब्याज दर इसी पर टिकी है।

• राष्ट्रमंडल खेलों का समापन (2 अगस्त) — ग्लासगो में समापन समारोह के साथ वह अभियान ख़त्म होगा जिसमें भारत ने 39 पदक जीते, और ध्यान अब 36,441 करोड़ रुपये वाली नई खेलो इंडिया योजना पर जाएगा।

• मानसून और बुवाई — हर हफ़्ते आने वाले बारिश और खरीफ़ बुवाई के आँकड़े बताएँगे कि अगस्त मौसम विभाग के 97% वाले अनुमान पर चल रहा है या नहीं — और पूर्वी भारत की कमी भर रही है या नहीं।

• पीएम-किसान की अगली किस्त — योजना के विस्तार के बाद अब नज़र इस पर रहेगी कि नई पात्रता और भुगतान का शेड्यूल कब जारी होता है। जिनका आधार बैंक खाते से नहीं जुड़ा, उनके लिए यही समय है।

• जुलाई के अंतिम पीएमआई आँकड़े — विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पक्के आँकड़े हफ़्ते की शुरुआत में आएँगे, जिनसे पता चलेगा कि 54.3 की नरमी सिर्फ़ सेवाओं तक सीमित थी या नहीं।

• नई योजनाओं के नियम — सूर्य सरोवर और समुद्र मंथन — दोनों के अमल के दिशा-निर्देशों का इंतज़ार है। पैसा कितना है, यह तय हो चुका; अब देखना यह है कि टेंडर की शर्तें क्या बनती हैं।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation