• Latest
  • Trending
खेलो इंडिया योजना

खेलो इंडिया का पैसा आठ गुना हुआ — पर गांव-कस्बे के बच्चे के लिए असली बदलाव यह है कि अब चुनाव स्कूल में ही होगा

August 3, 2026
daily-news

भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की रिकॉर्ड बिक्री, हरित बिजली, उड़ान, जहाज निर्माण और भारत-अमेरिका व्यापार की बड़ी खबरें

August 24, 2026
जुलाई 2026 महंगाई: खुदरा महंगाई 4.45% पहुंची, गांवों में शहरों से ज्यादा महंगाई का असर

अदरक 83 फ़ीसदी महँगा, और गाँव की थाली

August 24, 2026
semiconductor

बारह कारखाने मंज़ूर, तीन चालू

August 24, 2026
brics

ब्रिक्स की बहस इस बार लखनऊ में

August 24, 2026
monsoon

बारिश लौट आई, बाँध अब भी आधे ख़ाली

August 24, 2026
मक्का की कम बुवाई से एथेनॉल होगा महंगा लेकिन नहीं घटाया जाएगा उत्पादन

अब पॉपकॉर्न का बीज भी अपना

August 24, 2026
daily-news

आज की बड़ी खबरें 24 अगस्त 2026

August 24, 2026
गोबरधन योजना 2026: 23,731 करोड़ का बजट, 10 साल तक तय CBG कीमत और गांवों को बड़ा फायदा

गोबर अब 2,110 रुपये का सौदा है

August 24, 2026
भारत-अमेरिका

युद्धों के बीच मोदी की मजबूत संवाद नीति का दिखा प्रभाव कश्मीर पर बदली अमेरिकी भाषा भारत की बढ़ती साख का संदेश

August 24, 2026
trump

ट्रंप के बयान से पस्त हुआ विपक्ष का ‘ईवीएम विलाप’ और ‘वोट चोरी’ का नैरेटिव

August 24, 2026
संसद का मॉनसून सत्र 2026: हंगामे में बर्बाद हुआ समय और जनता के धन का नुकसान

कोलाहल का अखाड़ा न बने संसद

August 24, 2026
पूर्वोत्तर भारत में हरित विकास और स्वास्थ्य क्रांति, स्वच्छ ऊर्जा से बेहतर हो रहा गांवों का जीवन

ऊर्जा सुरक्षा और हरित विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा नॉर्थ ईस्ट

August 24, 2026
Monday, August 24, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

खेलो इंडिया का पैसा आठ गुना हुआ — पर गांव-कस्बे के बच्चे के लिए असली बदलाव यह है कि अब चुनाव स्कूल में ही होगा

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 3, 2026
in the blitz, खेल, खेल-फ़िल्म
0
खेलो इंडिया योजना

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।बड़ी बात यह है कि रकम आठ गुना हो गई। कैबिनेट ने 31 जुलाई को नए सिरे से बनी खेलो इंडिया योजना और खेल संघों को दी जाने वाली मदद, दोनों को मिलाकर 2026–27 से 2030–31 तक के लिए 36,441 करोड़ रुपये मंज़ूर किए हैं। यह पिछली खेलो इंडिया योजना के मुक़ाबले करीब आठ गुना है।

पर पैसे से ज़्यादा अहम यह है कि पैसा कहां घुसेगा। योजना में दो नई चीज़ें जुड़ी हैं — खेलो इंडिया फीडर स्कूल और खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय। इसका मतलब यह है कि प्रतिभा ढूंढने का काम अब आम स्कूल के भीतर होगा, अलग से बने किसी सेंटर में नहीं। तीसरी बात, उभरते खिलाड़ियों यानी इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट्स की सूची करीब दस गुना बड़ी की जा रही है। तीनों को एक साथ पढ़िए तो साफ़ दिखता है कि सरकार ने कहां हाथ डाला है — अब मदद उन्हें नहीं मिलेगी जो पहले ही सामने आ चुके, बल्कि उन तक पहुंचेगी जो कभी सामने ही नहीं आ पाते।

YOU MAY ALSO LIKE

भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की रिकॉर्ड बिक्री, हरित बिजली, उड़ान, जहाज निर्माण और भारत-अमेरिका व्यापार की बड़ी खबरें

अदरक 83 फ़ीसदी महँगा, और गाँव की थाली

रास्ता स्कूल से शुरू होता है: फीडर स्कूल और उत्कृष्ट विद्यालय के ज़रिए बच्चा वहीं परखा जाएगा जहां वह पहले से पढ़ता है।

भारत में हुनरमंद बच्चों की कमी कभी नहीं रही। कमी हमेशा उस छलनी की रही, जो हुनर की जगह ज़िले और जेब से छांटती थी।

एक नज़र में

• मंज़ूरी: 31 जुलाई 2026 — नई खेलो इंडिया योजना और खेल संघों को बढ़ी हुई मदद
• कुल रकम: 36,441 करोड़ रुपये, 2026–27 से 2030–31 तक
• पहले से: करीब आठ गुना
• नया क्या: खेलो इंडिया फीडर स्कूल और उत्कृष्ट विद्यालय
• खिलाड़ियों की सूची: उभरते खिलाड़ियों का दायरा करीब दस गुना
• संघों को मदद: कोचिंग, स्पोर्ट्स साइंस, उपकरण, विदेशी कोच, विदेश में मुक़ाबले और कैंप

खेल संघों वाला हिस्सा कम चर्चा में है, पर शायद ज़्यादा काम का है। बढ़ी हुई मदद में कोचिंग, स्पोर्ट्स साइंस, आधुनिक उपकरण, विदेश में मुक़ाबलों का ख़र्च, कैंप और विदेशी विशेषज्ञों को बुलाना — सब शामिल है। ये सारे ख़र्च हर साल आते हैं, और यही वह जगह है जहां भारतीय खेल संघ हमेशा फंसते रहे हैं। ओलंपिक वाले साल पैसा आता है, बाक़ी तीन साल सूखा रहता है। एक ही मंज़ूरी में पांच साल का पैसा तय हो जाने से संघ अब पूरे चक्र की योजना बना सकते हैं — और टीम एक सीज़न में नहीं, एक चक्र में बनती है।

अब आगे का असली काम। फीडर स्कूल तभी फीडर स्कूल है जब वहां मैदान हो, कोच हो और साल भर का मुक़ाबला कैलेंडर हो। इतनी बड़ी रकम में सबसे बड़ा ख़तरा यही रहता है कि पैसा इमारत तक तेज़ी से पहुंच जाए और कोच तक धीरे-धीरे। दूसरी ज़रूरत स्पोर्ट्स साइंस की है — फिज़ियोथेरेपिस्ट, आहार विशेषज्ञ और चोट संभालने वाले लोग, वह भी ज़िला स्तर पर, सिर्फ़ राष्ट्रीय कैंप में नहीं। यही एक चीज़ है जो बड़ी हुई सूची को असली खिलाड़ियों में बदलेगी, और यही सबसे धीरे तैयार होती है, क्योंकि पहले इन लोगों को पढ़ाना पड़ता है। अगर हर साल यह आंकड़ा छपे कि ज़िलों में कितने प्रशिक्षित कोच और सहायक स्टाफ़ तैनात हुए, तो देश को दिख जाएगा कि रास्ता सिर्फ़ मंज़ूर हुआ है या बन भी रहा है। ग्लासगो के राष्ट्रमंडल खेलों ने एक बात साबित की — जहां रास्ता बना हुआ है, जैसे मुक्केबाज़ी में, वहां पदक अपने आप आते हैं।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation