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‘एसआईआर प्रोसेस को संवैधानिक प्रावधान के तहत पूरा करना होगा’

सुप्रीम कोर्ट ने बीएलओ की मौतों पर जताई चिंता

by ब्लिट्ज़ इंडिया
December 13, 2025
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राजेश दुबे
नई दिल्ली। दक्षिण भारत के एक राजनीतिक दल तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि एसआईआर प्रोसेस को संवैधानिक प्रावधान के तहत पूरा करना होगा। हालांकि, कोर्ट ने बीएलओ की मौतों पर गंभीर चिंता जताते हुए राज्यों को निर्देश दिया है कि वे कर्मचारियों का बोझ कम करें।
वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने के सिलसिले में तमिलनाडु के राजनीतिक दल तमिलगा वेत्री कषगम यानी टीवीके की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कई बातें कहीं। बेंच ने कहा कि किसी भी सूरत में यह संवैधानिक प्रावधान पूरा करना होगा, यानी राज्य सरकार को एसआईआर का काम करवाने में सहयोग देना होगा।
याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि काम के ज्यादा दबाव की वजह से 35-40 बीएलओ की मौत हो चुकी है, इसलिए उन्होंने मुआवज़ा देने की मांग की है। याचिकाकर्ता ने कहा कि तमाम राज्यों में चुनाव आयोग की ओर से जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 32 के तहत बीएलओ को नोटिस भेजे जा रहे हैं कि अगर उन्होंने टारगेट पूरे नहीं किए तो उन्हें जेल जाना पड़ सकता है।
दलील में कहा गया कि सिर्फ उत्तर प्रदेश में 50 एफ आईआर दर्ज की गई हैं। मीडिया में कहा जा रहा है कि बीएलओ को जेल भेजेंगे, स्कूल शिक्षकों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ ऐसा नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने जताई चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर के दौरान बीएलओ की मौतों पर गंभीर चिंता जताते हुए उन पर काम का बोझ कम करने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हम राज्यों से कह सकते हैं कि वे कर्मचारियों को बदल दें। कोर्ट ने कहा, यह राज्यों की ज़िम्मेदारी है। राज्य सरकारें और ज्यादा कर्मचारी लगाएं, जिससे काम के घंटे उसी हिसाब से कम किए जा सकें। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई बीमार या असमर्थ है, तो राज्य वैकल्पिक कर्मचारी तैनात कर सकता है। जहां दस हजार कर्मी हैं, वहां 20 या 30 हजार कर्मी लगाए जा सकते हैं।
वापस लेने की अनुमति नहीं
सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि उन्हें जिम्मेदारी लौटाने यानी खुद को वापस लेने या इस्तीफा देने की अनुमति नहीं दी जा रही है, यही तो समस्या है। यह स्वैच्छिक कार्य नहीं है। आप न तो वापस ले सकते हैं और न ही इस्तीफ़ा दे सकते हैं। सेक्शन 32 की शिकायत सिर्फ चुनाव आयोग ही शुरू कर सकता है। शंकरनारायणन ने कहा, मैं तालिकाएं और चार्ट दे रहा हूं। यह मानवीय मुद्दा है। उन्होंने बताया कि एक शख्स ने अपनी खुद की शादी के लिए छुट्टी मांगी थी, उसे छुट्टी नहीं दी गई, उसने सुसाइड कर लिया। चुनाव आयोग की तरफ से सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने कहा कि तमिलनाडु में 91 फीसदी काम पूरा हो चुका है। इसका चुनावों पर भी बड़ा असर पड़ेगा। सीजेआई ने कहा कि कर्मचारियों की लिस्ट तो राज्य सरकार देती है, राज्य सरकार वैकल्पिक कर्मचारी दे सकती है।
उन्होंने कहा, अगर किसी कर्मचारी के पास ड्यूटी से छूट मांगने की कोई खास वजह है, तो संबंधित अधिकारी केस-टू-केस आधार पर इस मुद्दे पर विचार कर सकते हैं।

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