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‘स्वयं’के लिए नहीं, ‘सर्वम्’ के लिए सोचता है भारत : मोदी

by ब्लिट्ज़ इंडिया
April 25, 2024
in राष्ट्रीय
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India thinks not for 'self' but for 'all': Modi
पुनीत जैन

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में महावीर जयंती के शुभ अवसर पर 2550वें भगवान महावीर निर्वाण महोत्सव का उद्घाटन किया। उन्होंने भगवान महावीर की मूर्ति पर चावल और फूलों की पंखुड़ियों से श्रद्धांजलि अर्पित की और स्कूली बच्चों द्वारा भगवान महावीर स्वामी पर “वर्तमान में वर्धमान” नामक नृत्य नाटिका की प्रस्तुति देखी।

सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भव्य भारत मंडपम आज 2550वें भगवान महावीर निर्वाण महोत्सव का गवाह है। स्कूली बच्चों द्वारा भगवान महावीर स्वामी पर प्रस्तुत नृत्य नाटिका ‘वर्तमान में वर्धमान’ का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान महावीर के मूल्यों के प्रति युवाओं का समर्पण और प्रतिबद्धता देश के सही दिशा में आगे बढ़ने का संकेत है।

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– देश हजारों वर्षों तक भगवान महावीर के मूल्यों का उत्सव मनाता रहेगा
– संघर्षों में फंसी दुनिया भारत से शांति की अपेक्षा कर रही
– पीएम ने महावीर जयंती पर 2550वें निर्वाण महोत्सव का किया उद्घाटन

स्मारक डाक टिकट व सिक्क ा भी जारी किया
उन्होंने इस अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट और सिक्क ा भी जारी किया और जैन समुदाय को उनके मार्गदर्शन और आशीर्वाद के लिए धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री ने आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की और आचार्य के साथ हाल में हुई अपनी मुलाकात को याद किया।

2500 वर्ष बाद भी भगवान महावीर का निर्वाण दिवस
प्रधानमंत्री ने कहा, “हम 2500 वर्षों के बाद भी भगवान महावीर का निर्वाण दिवस मना रहे हैं और मुझे यकीन है कि देश आने वाले हजारों वर्षों तक भगवान महावीर के मूल्यों का उत्सव मनाता रहेगा।”

सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाली सभ्यता का ठिकाना भारत
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की सदियों और सहस्राब्दियों की कल्पना करने की ताकत और उसके दूरदर्शी दृष्टिकोण ने इसे पृथ्वी पर सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाली सभ्यता और आज मानवता का सुरक्षित ठिकाना बना दिया है।

‘स्वयं’के लिए नहीं, ‘सर्वम्’ के लिए सोचता है भारत : मोदी

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Bhagwan-Mahaveer-Nirvan-Mahotsav
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‘स्व’ की नहीं, ‘सर्वस्व’ की भावना
पीएम ने कहा, यह भारत ही है जो ‘स्वयं’ के लिए नहीं, ‘सर्वम ्’ के लिए सोचता है। जो ‘स्व’ की नहीं, ‘सर्वस्व’ की भावना करता है, जो अहम ्नहीं वयम ्की सोचता है, जो ‘इति’ नहीं, ‘अपरिमित’ में विश्वास करता है, जो नीति ही नहीं, नेति की भी बात करता है।

पिंड में ब्रह्मांड की बात
ये भारत ही है जो पिंड में ब्रह्मांड की बात करता है, विश्व में ब्रह्म की बात करता है, जीव में शिव की बात करता है।”

तीर्थंकरों की शिक्षाएं और भी महत्वपूर्ण हो गईं ं
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पिछले 75 वर्षों के मंथन से इस अमृत काल में अमृत निकलना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा, ” दुनिया में अनेक युद्धों के समय हमारे तीर्थंकरों की शिक्षाएं और भी महत्वपूर्ण हो गई हैं।” पीएम मोदी ने अनेकांतवाद और स्याद्वाद जैसे दर्शनों को याद किया जो हमें एक विषय के अनेक पहलुओं को समझने और दूसरों के दृष्टिकोण को भी देखने और स्वीकारने की उदारता को अपनाना सिखाते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा,‘‘आज संघर्षों में फंसी दुनिया भारत से शांति की अपेक्षा कर रही है। उन्होंने कहा कि नए भारत की इस नई भूमिका का श्रेय हमारे बढ़ते सामर्थ्य और विदेश नीति को दिया जा रहा है लेकिन इसमें हमारी सांस्कृतिक छवि का बहुत बड़ा योगदान है। आज भारत इस भूमिका में आया है, क्योंकि आज हम सत्य और अहिंसा जैसे व्रतों को वैश्विक मंचों पर पूरे आत्मविश्वास से रखते हैं।

वैश्विक संकटों, संघर्षों का समाधान भारत की प्राचीन संस्कृति में
हम दुनिया को बताते हैं कि वैश्विक संकटों और संघर्षों का समाधान भारत की प्राचीन संस्कृति और प्राचीन परंपरा में है। इसीलिए, आज विरोधों में भी बंटे विश्व के लिए, भारत ‘विश्व-बंधु’ के रूप में अपनी जगह बना रहा है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए मिशन लाइफ और एक विश्व-एक सूर्य-एक ग्रिड के रोडमैप के साथ एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य के दृष्टिकोण जैसी भारतीय पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज भारत अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन जैसी भविष्योन्मुखी वैश्विक पहल का नेतृत्व कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, “इन पहलों ने न केवल दुनिया में आशा पैदा की है बल्कि हमारी संस्कृति और परंपरा के प्रति वैश्विक धारणा में बदलाव आया है।”

जैन धर्म का अर्थ है जिन का मार्ग
जैन धर्म के अर्थ के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि जैन धर्म का अर्थ है, जिन का मार्ग, यानी जीतने वाले का मार्ग। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमने कभी दूसरे देशों को जीतने के लिए आक्रमण नहीं किए बल्कि हमने स्वयं में सुधार करके अपनी कमियों पर विजय पाई है। इसीलिए मुश्किल से मुश्किल दौर आए, लेकिन हर दौर में कोई न कोई ऋषि, मनीषी हमारे मार्गदर्शन के लिए प्रकट हुआ, जिससे कई महान सभ्यताओं के नष्ट होने के बावजूद देश को अपना रास्ता खोजने में मदद मिली।

‘मिच्छामी दुक्क ड़म’ का पाठ
प्रधानमंत्री ने कहा, “संसद के नए भवन में प्रवेश करने से पहले मुझे अपने मूल्यों को याद करने के लिए ‘मिच्छामी दुक्क ड़म’ का पाठ करना याद है। इसी तरह, हमने अपनी धरोहरों को संवारना शुरू किया। हमने योग व आयुर्वेद की बात की। आज देश की नई पीढ़ी को ये विश्वास हो गया है कि हमारी पहचान हमारा स्वाभिमान है। जब राष्ट्र में स्वाभिमान का ये भाव जाग जाता है, तो उसे रोकना असंभव हो जाता है। भारत की प्रगति इसका प्रमाण है।

25 करोड़ से अधिक भारतीय गरीबी से बाहर
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत भ्रष्टाचार और निराशा के दौर से उभर रहा है क्योंकि 25 करोड़ से अधिक भारतीय गरीबी से बाहर आ गए हैं। नागरिकों से इस क्षण का लाभ उठाने का आह्वान करते हुए, प्रधानमंत्री ने सभी से ‘अस्तेय और अहिंसा’ के मार्ग पर चलने के लिए कहा और राष्ट्र के भविष्य के लिए काम करते रहने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और संतों को उनके प्रेरक शब्दों के लिए धन्यवाद दिया।

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