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मालती को है बीमार की जान बचाने की जिद

- हजारों महिलाओं को साक्षर बनाने की प्रक्रिया से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई

by ब्लिट्ज़ इंडिया
January 5, 2024
in महिला-खेल
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Malti is determined to save the life of the sick person.
ब्लिट्ज ब्यूरो

बोकारो। झारखंड में बोकारो जिले की रहने वाली मालती नायक ने वनौषधि के माध्यम से इलाज कर सैंकड़ों लोगों को नया जीवन दिया है। मालती अब तक हजारों लोगों को आयुर्वेद और वन औषधीय इलाज के जरिये लाभ पहुंचा चुकी हैं। स्थानीय ग्रामीण बताते है कि साल 2006 में बरतु घासी की बेटी काजल कुमारी अचानक लकवाग्रस्त हो गई थी। पूरा परिवार चिंतित और परेशान था। मालती ने वनौषधि की मदद से सफल इलाज़ करते हुए उसे पूर्णतः स्वस्थ कर दिया। इसी तरह से वर्ष 2008 में हलमाद बाजार के खेतु रविदास कोमा में चले गए थे। उसकी जिंदगी पूरी तरह से खतरे में पड़ चुकी थी, मालती ने वनौषधि से इलाज करते हुए उसे कोमा से बाहर निकाला और नया जीवन दिया। मालती नायक आज भी ग्रामीणों को सेवा दे रही हैं। वे गरीबों का मुफ्त इलाज करती हैं।

साक्षरता अभियान को सफल बनाने निकलीं
दो दशक पहले बोकारो जिला के कसमार प्रखंड और इसके आसपास के क्षेत्रों में गांवों की महिलाओं की सामाजिक गतिविधियां नगण्य थी। महिलाएं सामाजिक कार्यों के लिए घर की देहरी लांघकर निकलने से कतराती थीं, या फिर हिम्मत नहीं जुटा पाती थीं। ऐसी बात नहीं कि तब महिलाओं में सामाजिक जिम्मेदारियों का अहसास नहीं था लेकिन, घर-समाज की पाबंदी उन्हें घरों से निकलने से बांधे रखती थी। कुछ लोग चाहकर भी समाज के तानों के डर से अपने घरों की महिलाओं को सामाजिक कार्यों में भागीदारी के लिए आगे बढ़ने की इजाजत नहीं दे पाते थे। उन दिनों इस क्षेत्र में कुछ गिनी-चुनी महिलाएं ही सामाजिक कार्यों में घरों से निकलने की हिम्मत जुटा पाती थीं। मालती नायक भी उन्हीं चंद महिलाओं में एक हैं।

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2000 में सामाजिक क्षेत्र में रखा कदम
दांतू गांव निवासी विवेकानंद नायक की पत्नी मालती (उम्र 48 वर्ष) ने वर्ष 2000 में सामाजिक क्षेत्र में उन दिनों कदम रखा, जब बोकारो के तत्कालीन उपायुक्त विमल कृति सिंह के नेतृत्व में साक्षरता अभियान ने बहुत जोर पकड़ा था।

इस अभियान को सफल बनाने के लिए इसमें महिलाओं को जोड़ना सबसे जरूरी था, क्योंकि कुल आबादी में निरक्षरों की संख्या पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की अधिक थी।

साक्षरता अभियान का नेतृत्व
महिला नेतृत्व के बिना इस अभियान को सफल बनाना संभव नहीं था। इसी परिस्थिति में मालती नायक अपने पति की प्रेरणा से घर की देहरी लांघ कर बाहर निकलीं और साक्षरता अभियान से जुड़कर इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई। मालती ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए खुद को पूरी तरह से समर्पित कर दिया और प्रखंड की हजारों महिलाओं को इस अभियान से जोड़कर साक्षर बनाने की प्रक्रिया से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।

वनौषधि संरक्षण, उत्पादन और उपयोग का प्रशिक्षण
शिक्षा साक्षरता के अलावा अन्य सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाने में भी उनकी भूमिका कम नहीं है। चिकित्सा के क्षेत्र में इनका योगदान भी विशेष उल्लेखनीय है। इस क्षेत्र में सेवा देने के लिए सबसे पहले वर्ष 2002 से 2004 तक पेटरवार वनौषधि प्रशिक्षण केंद्र में वनौषधि संरक्षण, उत्पादन और उपयोग का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस दौरान राज्य में पहली बार हर्बल पायलट प्रोजेक्ट के तहत वन औषधीय की पहचान और उसके उपयोग के लिए यह प्रशिक्षण दिया जा रहा था। इस प्रशिक्षण के पूरा होने के बाद वर्ष 2004-2005 के दौरान प्रशिक्षक वैद्य श्याम विहारी तिवारी से दीक्षा प्राप्त कर ‘प्राण विद्या विद’ की उपाधि प्राप्त की।

पूर्वी भारत में स्पिरुलिना की पहली उत्पादक
महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए भी मालती अनेक पहल व प्रयास कर चुकी हैं। कई महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन कर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का काम किया। मालती झारखंड समेत पूर्वी भारत में स्पिरुलिना (पानी में पाया जाने वाला पौधा-वनस्पति) की पहली उत्पादक भी हैं। वर्ष 2005-06 में अपने पति की मदद से स्पिरुलिना की खेती पूरे राज्य में पहली बार इन्होंने ही की थी। मालती का मायका बोकारो जिला के ही नावाडीह प्रखंड अंतर्गत गोनियाटो गांव है। वह अपनी ससुराल दांतू से लेकर मायके तक के गांवों में चिकित्सा सेवा देने के साथ-साथ अन्य सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं। मैट्रिक की शिक्षा के बावजूद इनमें शिक्षा, चिकित्सा समेत अन्य का अच्छा खासा ज्ञान और अनुभव है।

चार-पुत्र-पुत्री अच्छे जॉब में
मालती नायक ने सामाजिक कार्यों के साथ अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर भी विशेष ध्यान दिया। इनकी चार संतान हैं। तीन पुत्र व एक पुत्री। प्रथम पुत्र प्रवीर कुमार (अभियंता), द्वितीय पुत्र समीर कुमार (अपराधशास्त्री), कनिष्ठ पुत्र प्रसेनजीत कुमार (कृषि विशेषज्ञ) तथा पुत्री आकांक्षा कुमारी (अपराधशास्त्री) हैं।

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