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आत्मनिर्भर भारत, लोकल से ग्लोबल को सिद्ध करने में सक्षम है नई शिक्षा नीति

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आत्मनिर्भर भारत, लोकल से ग्लोबल को सिद्ध करने में सक्षम है नई शिक्षा नीति

नई शिक्षा नीति : नई पहल, नई संभावनाएं पर शिलांग विवि के कुलपति डॉ. प्रभाशंकर शुक्ला के विचार

by ब्लिट्ज़ इंडिया
December 30, 2022
in दृष्टिकोण
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आत्मनिर्भर भारत, लोकल से ग्लोबल को सिद्ध करने में सक्षम है नई शिक्षा नीति

शिक्षा व्यक्ति के माध्यम से समाज को बदलने का सबसे सशक्त माध्यम है। समय के साथ व्यक्ति और समाज की आवश्यकताएं भी बदलती रहती हैं। इसलिए सामयिक होना इसके प्रासंगिक होने की अनिवार्य शर्त है। शिक्षा को भी प्रासंगिक होने के लिए सामयिक होना चाहिए। नई शिक्षा नीति-2020 अपने अनेक संदर्भों के साथ-साथ इस संदर्भ में भी महत्त्वपूर्ण है। समय एवं समाज में परिवर्तन के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था में भी सामयिक और प्रसंगानुकूल परिवर्तन/परिवर्धन होते रहना चाहिए। नई शिक्षा नीति-2020 के पूर्व सन 1986 में एक शिक्षा नीति का प्रस्ताव सरकार द्वारा किया गया था जबकि इस अवधि में विज्ञान एवं तकनीकी के साथ-साथ समय एवं समाज में व्यापक परिवर्तन लक्षित किए जा सकते हैं।

हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं और सौवें वर्ष के लिए प्रस्थान कर चुके हैं। आजादी के इस अमृतकाल में देश के पास एक सुनिश्चित शिक्षा योजना होनी चाहिए, जिसके संगत परिणाम सौवें साल तक देश को सुदृढ़ स्थिति में पहुंचा सकें। शिक्षा, जो अपने आप को पहचानने और रोजगार प्रदान करने में सक्षम हो; उसकी गंभीर आवश्यकता देश को है। हमारी चली आती हुई शिक्षा व्यवस्था के परिणाम हमारे सामने हैं। नई शिक्षा नीति इन सबका एक व्यवस्थित उपाय है जिसमें स्वत्वबोध के साथ-साथ रोजगार प्रदान करने की पूरी क्षमता है। नई शिक्षा नीति को अमल में आए दो वर्ष से अधिक का समय हो चुका है। सरकार द्वारा शिक्षा के सभी घटकों शिक्षक, शिक्षार्थी, शिक्षालय, अभिभावक और संबंधित कर्मचारियों के सहयोग से इसके सम्यक क्रियान्यवन का प्रयास किया जा रहा है। इसलिए अब समय इसके सुचारू क्रियान्यवन और उसमें आने वाली चुनौतियों से निपटने और संभावनाओं को परखने का है। वर्ष 2023 में नई शिक्षा नीति के इसी पक्ष को देखने की आवश्यकता है।

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नई शिक्षा नीति शिक्षा के क्षेत्र में एक आमूलचूल परिवर्तन है। परंपरागत शिक्षा पद्धति जिसका ढांचा 10+2 आधारित था, जो नई शिक्षा नीति में 5+3+3+4 के रूप में परिवर्तित किया गया है। नई नीति में पूर्व प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था शिक्षा में एक क्रांतिकारी परिणाम देने वाली है। कक्षा दो तक गृह कार्य रहित प्राथमिक शिक्षा जिसमें खेल-खेल में शिक्षा का प्रावधान है; बच्चों के लिए उत्साहजनक और अच्छे परिणाम देने वाला है। प्राथमिक शिक्षा में सीखने के बीच भाषा की बाधा को दूर करने के लिए नई शिक्षा नीति में स्थानीय या क्षेत्रीय भाषाओं को माध्यम के रूप में प्रयोग करना नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। कक्षा छह से आठ तक कोडिंग सीखने और इंटर्नशिप जैसे प्रयोग छात्रों की रूचि के अनुरूप उनके शैक्षणिक विकास को निश्चित करने में महत्वपूर्ण साबित होंगे। साथ ही कक्षा नौ से बारह तक की शिक्षा में गणित, विज्ञान, जीवविज्ञान, वाणिज्य आदि धाराओं में विभाजन की अपेक्षा अभिरुचि के अनुसार विषय आधारित विकल्प रोजगार उन्मुख शिक्षा के लिए अनेक संभावनाकारी होगा। नई शिक्षा नीति में स्नातक एवं स्नातकोत्तर अध्ययन को भी पुनर्गठित किया गया है, जिसके माध्यम से प्रत्येक विद्यार्थी के समक्ष अपनी रुचि और सामर्थ्य के अनुरूप चयन का विकल्प है। दोनों पाठ्यक्रमों में प्रवेश व निकास के अनेक अवसर उपलब्ध होने से शिक्षा से वंचित होने की संभावनाएं काफी कम होने की उम्मीद है। अकादमिक क्रेडिट बैंक की परिकल्पना इस दिशा में सहयोगी सिद्ध होगी। राष्ट्रीय स्तर पर प्रवेश परीक्षा का आयोजन में शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपाय सिद्ध होगा। एक देश, एक पाठ्यक्रम एवं एक शिक्षा व्यवस्था होने से अनेक प्रकार की उम्मीदें की जा सकती हैं।

नई शिक्षा नीति आधारित चरणबद्ध डिग्री युक्त चार वर्षीय स्नातक और एक या दो वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों को संचालित करने का निर्णय देश के अनेक विश्वविद्यालयों ने कर लिया है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली नियामक संस्था विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने इस दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर पाठ्यक्रम का एक नया ढांचा भी प्रस्तावित किया है। इस ढांचे के अनुरूप 2023 में लगभग एक समान पाठ्यक्रम की संभावना में दिखाई दे रही है। एक समान पाठ्यक्रम होने से विद्यार्थियों को चयन, प्रवेश, निकास आदि में सुगमता होगी। एक समान पाठ्यक्रम के साथ-साथ एक समान शैक्षणिक सत्र एवं एक समान परीक्षा व्यवस्था की आवश्यकता राष्ट्रीय स्तर पर प्रतीत हो रही है। एक समान पाठ्यक्रम के साथ-साथ एक समान शैक्षणिक सत्र एवं एक समान परीक्षा व्यवस्था होने से विद्यार्थियों को अंतरविषयी और बहुविषयी आवागमन में सुविधा प्राप्त होगी। शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर इस प्रकार के पहल की संभावनाएं प्रकट हो रही हैं।

सीमारहित विश्वविद्यालयी व्यवस्था उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक अनोखी पहल है। इससे राष्ट्रीय ही नहीं अपितु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उच्चस्तरीय गुणवत्तायुक्त शिक्षा की प्रतिस्पर्धा का वातावरण निर्मित होगा। विद्यार्थी अपनी रुचि एवं आवश्यकता के अनुरूप वैश्विक स्तर पर उच्च गुणवत्तायुक्त शिक्षा को प्राप्त कर सकता है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय विश्वविद्यालयों के द्वार विदेशी विद्यार्थियों के लिए भी खुल सकेंगे जो विश्वविद्यालयों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकेंगे। आगामी वर्षों में सरकार द्वारा एक जिला अथवा क्षेत्र स्तर पर बहुविषयी शिक्षा एवं शोध विश्वविद्यालय (मेरू) विकसित किए जाने का प्रावधान है और भविष्य में उसी के अनुरूप सभी संस्थानों को विकसित कर शिक्षा को समय एवं समाज के अनुरूप एवं उपयोगी बनाने की संभावनाएं 2023 में की जा सकती हैं। नई शिक्षा नीति की मूल प्रस्तावना और कोविड के समय ने शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी प्रयोग की अनेक संभावनाओं की ओर लोगों का ध्यान आकृष्ट किया है। मेटावर्स मॉडल ने इस दिशा में आगामी वर्षों में सजीव एवं सार्थक संभावनाओं की ओर संकेत किया है। अभी की तकनीक के अनुसार वास्तविक और आभासी शिक्षा में पर्याप्त अंतर दिखाई दे रहा है। आभासी पटल अपनी अनेक अच्छाइयों के साथ भी वास्तविक पटल की भांति परिणामकारी नहीं है। मेटावर्स माडल आभासी दुनिया की वास्तविक अनुभूति है जिसमें शिक्षार्थी वास्तविक शिक्षा के सभी उपादानों को वास्तविक रूप से अनुभव कर सकेगा।

शिक्षा में दक्षता विकास का प्रयोग 2023 में अपना निश्चित स्वरूप निर्मित कर सकेगा। यह रोजगार सृजन की दिशा में निश्चित रूप से सकारात्मक फलदायी होगा। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में ज्ञान के विविध आयाम तो समाहित थे किंतु रोजगार उन्मुखता की कमी थी। उच्च शिक्षा प्राप्त शिक्षार्थी को उसके शिक्षा के अनुरूप रोजगार प्रदान करना या अवसर उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी होती है। नई शिक्षा नीति में दक्षता विकास को केंद्र में रखकर रोजगार की दिशा में सार्थक पहल की गई है। यह उद्यमिता निर्माण में सहायक होगा। नई शिक्षा नीति रोजगार की मांग की प्रवृत्ति को रोजगार प्रदान करने की दिशा में विस्थापित कर सकेगी। आत्मनिर्भर भारत, लोकल से ग्लोबल जैसी अवधारणाओं को सिद्ध करने में नई शिक्षा नीति कारगर सिद्ध होगी। स्वत्व को जानने एवं समझने की दिशा में नई शिक्षा नीति जरूरी पहल के रूप में देखी जा रही है। भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति इस शिक्षा नीति में सार्थक पहल है। शिक्षार्थी अपने देश की गौरवमयी परंपरा को जान सकेगा। भारत अपने ज्ञान के बल पर ही विश्वगुरू के स्थान पर आसीन था। ज्ञान के विविध क्षेत्रों यथा- गणित, दर्शन, खगोल विद्या, आयुर्विद्या, योगविद्या आदि में भारत ने कीर्तिमान स्थापित किए हैं जिनके आगे विश्व की परंपराएं बौनी दिखाई देती हैं। नई शिक्षा नीति में इसी गौरवशाली ज्ञान परंपरा के पुनअर्ध्ययन और उसके विकास की संभावनाएं हैं। भौगोलिक एवं प्राकृतिक रूप से भी हमारी विविधता में एकता विश्व के लिए जिज्ञासा का विषय है। एक भारत-श्रेष्ठ भारत और देखो अपना देश में निहित विचार सूत्रों के माध्यम से देश की गौरवशाली परंपरा को जागृत करने, समझने और उस पर गर्व करने का अवसर नई शिक्षा नीति प्रदान करती है। नई शिक्षा नीति को लागू हुए दो वर्ष से अधिक का समय हो चुका है। अब आवश्यकता उसके सम्यक क्रियान्यवन की है। सम्यक क्रियान्यवन से ही सार्थक परिणाम मिल सकते हैं। 2023 में इस दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

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