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‘ब्रेन ड्रेन’ रोकने के लिए इसरो का बड़ा कदम

वैज्ञानिकों का न इस्तीफा स्वीकार होगा, न वीआरएस

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 27, 2026
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‘ब्रेन ड्रेन’ रोकने के लिए इसरो का बड़ा कदम

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग ने एक बड़ा आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि गगनयान मिशन और देश के अन्य महत्वपूर्ण कामों से जुड़े इसरो के वैज्ञानिक और इंजीनियर इस्तीफा नहीं दे सकते और न ही जल्दी रिटायर हो सकते हैं। ऐसी अर्जी आने पर उसे सीधे ऊपर विभाग को भेजना होगा। यह खबर इसरो की बड़ी समस्या को सामने लाती है। इसरो एक समय सपनों का संस्थान था, लेकिन अब यहां से अच्छे लोग जा रहे हैं।

सरकार का नया आदेश क्या कहता है?

सरकार ने सभी इसरो केंद्रों को निर्देश दिया है कि गगनयान और दूसरे बड़े प्रोजेक्ट्स के वैज्ञानिकों की इस्तीफे या रिटायरमेंट की अर्जियां सीधे स्वीकार न करें। हर केस को अंतरिक्ष विभाग को भेजो, वहां से फैसला होगा। सरकार ने खुद माना है कि ऐसे कई मामले आ रहे हैं जिससे देश के बड़े मिशन प्रभावित हो रहे हैं। यह आदेश दिखाता है कि समस्या छोटी नहीं है। इसरो पहले देश के सबसे होशियार युवाओं को खींचता था। यहां काम करने वाले लोग देश के लिए कुछ बड़ा करना चाहते थे लेकिन अब कई युवा वैज्ञानिक बाहर जा रहे हैं। कारण सरल हैं- बाहर ज्यादा सैलरी, तेज प्रमोशन, अच्छा माहौल, कम दफ्तरशाही और अच्छा वर्क-लाइफ बैलेंस। निजी स्पेस कंपनियां अच्छे पैकेज दे रही हैं। इसरो में कुछ लोगों को लगता है कि नई सोच को जगह नहीं मिल रही, फैसले में देरी होती है और उनकी मेहनत पूरी तरह सराही नहीं जाती। जब मन नहीं लगता तो लोग चले जाते हैं।

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अंतरिक्ष क्षेत्र में नए बदलाव और मुश्किल

सरकार ने इन-स्पेस बनाकर निजी कंपनियों को अंतरिक्ष में काम करने की इजाजत दी। यह अच्छी बात है। निजी कंपनियां रॉकेट, सैटेलाइट और सर्विसेस बना रही हैं लेकिन इसरो मजबूत रहे, तभी यह सब काम करेगा। अगर इसरो के अनुभवी लोग चले गए तो नई टेक्नोलॉजी कौन बनाएगा? गगनयान मिशन में इंसान को अंतरिक्ष भेजना है। इसमें बहुत सावधानी और कुशल लोग चाहिए। अगर वे जा रहे हैं तो मिशन मुश्किल हो जाएगा।

इसरो की सफलता का राज था यहां वैज्ञानिकों को आजादी थी, गलती से सीखते थे और टीम में काम करते थे। विक्रम साराभाई और सतीश धवन जैसे बड़े लोग यहां संस्कृति बनाकर गए। लोग इसलिए रुकते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि वे देश के बड़े काम में हिस्सा हैं। अब कुछ लोग कहते हैं कि संस्थान में संस्कृति बदल गई है। नेतृत्व, फैसले लेने का तरीका और युवाओं को मौके कम मिल रहे हैं। यही वजह है कि रोकने वाला आदेश निकाला गया।

गगनयान मिशन पर खतरा

गगनयान भारत का पहला इंसानी अंतरिक्ष मिशन है। इसमें बहुत ऊंची तकनीक लगती है। अगर इससे जुड़े वैज्ञानिक चले गए तो काम प्रभावित होगा। सरकार ने सही पहचाना कि यह समस्या है, इसलिए आदेश जारी किया लेकिन यह सिर्फ तुरंत का उपाय है। लंबे समय तक रोककर समस्या नहीं सुलझेगी।

निजी कंपनियां इसरो की पुरानी तकनीक और ज्ञान पर काम कर रही हैं। देश के टैक्स का पैसा दशकों से लगाकर इसरो ने बुनियाद बनाई। अगर इसरो कमजोर हुआ तो निजी क्षेत्र भी प्रभावित होगा। दोनों को साथ चलना चाहिए। इसरो बड़े-बड़े रिसर्च और नए मिशन पर ध्यान दे, निजी कंपनियां व्यापार करे लेकिन इसके लिए इसरो को आकर्षक जगह बनाना जरूरी है।

सरकार को क्या करना चाहिए?

यह आदेश समस्या दिखाता है लेकिन हल नहीं। सरकार को वैज्ञानिकों से बात करनी चाहिए। उनकी शिकायतें सुननी चाहिए। सैलरी बढ़ानी चाहिए, प्रमोशन आसान बनाना चाहिए, रिसर्च के लिए पैसे देने चाहिए और अच्छा काम का माहौल बनाना चाहिए। युवा वैज्ञानिकों को आगे बढ़ने के मौके देने चाहिए। तभी वे खुशी से रहेंगे।

भारत 2040 तक बड़ा अंतरिक्ष देश बनना चाहता है। इसके लिए इसरो को फिर से सपनों का केंद्र बनाना होगा जहां लोग खुद आना चाहें और रहना चाहें। सिर्फ आदेश से नहीं, बल्कि अच्छे माहौल, अच्छी सैलरी और सही नेतृत्व से काम चलेगा। देश के वैज्ञानिक अभी भी इसरो में योगदान देना चाहते हैं। उन्हें सही मौका और प्रोत्साहन चाहिए। इसरो का यह नया आदेश बताता है कि अच्छे वैज्ञानिक जा रहे हैं। गगनयान औरदेश के सपनों के लिए इसे गंभीरता से लेना होगा।

कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर चल रहा काम

इसरो के कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। इनमें भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम ‘गगनयान’ सबसे प्रमुख है। इसके अलावा, इसरो ‘स्पेस-बेस्ड सर्विलांस फेज-III (एसबीएस-3)’ के तहत 52 एडवांस सैन्य उपग्रह तैयार कर रहा ह और शुक्र ऑर्बिटर मिशन तथा चंद्रयान-4 जैसी अंतरग्रहीय परियोजनाओं पर भी तेजी से काम कर रहा है।

इसरो के प्रमुख भावी प्रोजेक्ट्स का विस्तृत इस प्रकार है:

गगनयान : यह भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन है। इसके तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजा जाएगा। मुख्य मानव मिशन से पहले कई मानव रहित परीक्षण उड़ानें और ‘व्योममित्र’ नामक ह्युमनॉइड रोबोट को अंतरिक्ष में भेजा जा रहा है।

शुक्रयान : शुक्र ग्रह के वायुमंडल और उसकी सतह का अध्ययन करने के लिए इसरो द्वारा शुक्रयान मिशन की योजना है।

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन : इसरो का लक्ष्य 2035 तक अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन कक्षा में स्थापित करना है, जहां अंतरिक्ष यात्री लंबे समय तक रहकर अनुसंधान कर सकें।

चंद्रयान-4 / लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन मिशन (लुपेक्स): चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर और अधिक शोध करने तथा चंद्र नमूनों को सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने के लिए इसरो जापान की अंतरिक्ष एजेंसी (जाक्सा) के साथ मिलकर इस मिशन पर काम कर रहा है।

मंगलयान-2 : मंगल ग्रह की कक्षा में परिक्रमा करने और उसके वातावरण को गहराई से समझने के लिए यह दूसरा मंगल मिशन है।

वैज्ञानिक संकट की अटकलें खारिज, मंत्री बोले-किसी प्रोजेक्ट पर प्रतिकूल असर नहीं

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) से वैज्ञानिकों के इस्तीफे और कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (केकेएनपीपी) में डेटा लीक की खबरों पर केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने इसरो में वैज्ञानिक संकट की अटकलों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इसरो प्रमुख वी नारायणन ने इस संबंध में बयान दिया है कि जितने लोग जाएंगे, उतने ही लोग आएंगे। किसी परियोजना पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। सिंह ने उदाहरण दिया कि पूर्व इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ गगनयान परियोजना पर कार्य कर रहे थे लेकिन अब वे वहां नहीं हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि गगनयान पर कार्य रुक जाएगा? इसरो में काम निरंतरता के साथ होता है।

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