• Latest
  • Trending
67 लाख करोड़ रुपये का है ‘व्हाइट गुड्स’ बाजार

67 लाख करोड़ रुपये का है ‘व्हाइट गुड्स’ बाजार

July 4, 2026
भारत के सरकारी, कौशल, प्रवासी और जनकल्याण अपडेट

भारत के कौशल, प्रवासी, रक्षा, खाद्य और सरकारी योजनाओं से जुड़े प्रमुख अपडेट

September 24, 2026
भारत स्वास्थ्य, रेलवे, रक्षा और विकास अपडेट

भारत के स्वास्थ्य, रेलवे, रक्षा, आयुर्वेद और विकास से जुड़े प्रमुख अपडेट

September 24, 2026
infra

भारत का निर्यात, मैन्युफैक्चरिंग, एफटीए और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर: प्रमुख आर्थिक अपडेट

September 24, 2026
भारत मंडपम, नई दिल्ली में 9वें भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह का उद्घाटन करते उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, 22 सितंबर 2026। श्रेय : पीआईबी।

भारत की सरकारी योजनाएं, उड़ान, जल सप्ताह और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: प्रमुख अपडेट

September 24, 2026
आयुर्वेद, कोयला, सेमीकंडक्टर, MMA और सिने हब

22 सितंबर 2026 की प्रमुख खबरें: आयुर्वेद, कोयला, सेमीकंडक्टर, MMA और सिने हब

September 23, 2026
EPF स्कीम 2026 नए नियम

22 सितंबर 2026 की प्रमुख खबरें: पीएफ सीमा, न्यूजीलैंड FTA, फिल्म पुरस्कार और CAG रिपोर्ट

September 22, 2026
daily-news

भारत की प्रमुख खबरें 22 सितंबर 2026: बुजुर्ग योजना, कोर सेक्टर, हाईवे और रक्षा

September 22, 2026
daily-news

भारत की प्रमुख खबरें 21 सितंबर 2026: तेजस उड़ान, ग्वालियर टेलीकॉम जोन, खेल और फिल्म पुरस्कार

September 21, 2026
ब्रिक्स ने पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की

ब्रिक्स 2026: भारत की कूटनीतिक विजय

September 21, 2026
केदारनाथ यात्रा 2026

केदारनाथ पर बढ़ता प्राकृतिक जोखिम

September 21, 2026
पीएम मोदी का ‘दिमागी नक्सल’ बयान: विपक्ष की प्रतिक्रिया और वैचारिक बहस

सेवा के 25 वर्ष सुशासन का संकल्प और राष्ट्र निर्माण की सतत यात्रा।

September 21, 2026
modi

पीएम मोदी के जन्मदिन पर शुरू हुआ ‘सेवा संकल्प अभियान’

September 21, 2026
Friday, September 25, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

67 लाख करोड़ रुपये का है ‘व्हाइट गुड्स’ बाजार

घरों में आराम बढ़ा रही मशीनें, लेकिन धरती पर बढ़ रहा है संकट।

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 4, 2026
in the blitz
0
67 लाख करोड़ रुपये का है ‘व्हाइट गुड्स’ बाजार

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली । जून की तपती दोपहर, जयपुर के एक मध्यमवर्गीय परिवार में खुशी का माहौल है। महीनों की बचत के बाद घर में नया इनवर्टर एसी लगा है। जैसे ही एसी चालू होता है, कमरे में ठंडी हवा फैल जाती है और परिवार के चेहरे खिल उठते हैं।

ऐसी ही लाखों कहानियां आज भारत के शहरों और कस्बों में लिखी जा रही हैं। कोई नया फ्रिज खरीद रहा है, कोई वॉशिंग मशीन, तो कोई पहली बार अपने घर में एसी लगवा रहा है।

YOU MAY ALSO LIKE

भारत के कौशल, प्रवासी, रक्षा, खाद्य और सरकारी योजनाओं से जुड़े प्रमुख अपडेट

भारत के स्वास्थ्य, रेलवे, रक्षा, आयुर्वेद और विकास से जुड़े प्रमुख अपडेट

दूसरी तरफ, दुनिया की बड़ी कंपनियां ऐसे स्मार्ट उपकरण बना रही हैं जो आपके मोबाइल से चलेंगे, बिजली बचाएंगे और जरूरत पड़ने पर खुद आपको सूचना भी देंगे।

यही है दुनिया के तेजी से बढ़ते ‘व्हाइट गुड्स उद्योग’ की कहानी। व्हाइट गुड्स यानी वे घरेलू उपकरण जिनके बिना आधुनिक जीवन की कल्पना करना मुश्किल होता जा रहा है—फ्रिज, एयर कंडीशनर, वॉशिंग मशीन, डिशवॉशर, माइक्रोवेव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण।

आज यह उद्योग दुनिया भर में करीब 804 अरब डॉलर (लगभग ₹67 लाख करोड़) का हो चुका है। अनुमान है कि वर्ष 2035 तक इसका आकार बढ़कर 1.87 ट्रिलियन डॉलर (करीब ₹156 लाख करोड़) तक पहुंच जाएगा

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया के सबसे बड़े और सबसे तेजी से बढ़ने वाले बाजारों में शामिल होगा। यही वजह है कि दुनिया की बड़ी कंपनियां भारत को अपने भविष्य के सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में गिन रही हैं।

2035 तक हो जाएगा ₹156 लाख करोड़ का

लेकिन इस विकास की चमक के पीछे एक ऐसा सवाल खड़ा है, जो आने वाले वर्षों में पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। हमारी सुविधा और आराम की कीमत पर्यावरण चुका रहा है।

एसी अब शौक नहीं, जरूरत

कुछ साल पहले तक एसी को अमीरों की चीज माना जाता था लेकिन लगातार बढ़ती गर्मी और बदलती जीवनशैली ने तस्वीर बदल दी है। भारत के शहरों में अब एसी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन की मांग तेजी से बढ़ रही है। आसान ईएमआई, बढ़ती आय और तेजी से फैलते शहरी क्षेत्रों ने घरेलू उपकरणों की पहुंच को पहले से कहीं अधिक बढ़ा दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया के सबसे बड़े और सबसे तेजी से बढ़ने वाले बाजारों में शामिल होगा।

यही वजह है कि दुनिया की बड़ी कंपनियां भारत को अपने भविष्य के सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में गिन रही हैं।

अब मशीनें सिर्फ काम नहीं करतीं, सोचती भी हैं

तकनीक ने घरेलू उपकरणों की दुनिया पूरी तरह बदल दी है। आज का फ्रिज सिर्फ खाने-पीने की चीजें ठंडी नहीं रखता। कई स्मार्ट मॉडल आपको मोबाइल पर जानकारी भी दे सकते हैं।

एयर कंडीशनर आपके इस्तेमाल के अनुसार खुद को एडजस्ट कर सकता है। वॉशिंग मशीन कपड़ों की मात्रा देखकर पानी और बिजली की खपत तय कर सकती है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और इंटरनेट तकनीक ने घरेलू उपकरणों को पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट बना दिया है।

उपभोक्ताओं को इससे सुविधा तो मिल ही रही है, साथ ही बिजली की बचत भी हो रही है।

कुछ बड़ी कंपनियों का दबदबा

वैश्विक बाजार में एलजी, सैमसंग, हायर और व्हर्लपूल जैसी कंपनियां प्रमुख भूमिका निभा रही हैं।

इन कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा अब केवल उत्पाद बेचने की नहीं रह गई है। मुकाबला इस बात का है कि कौन सबसे स्मार्ट, सबसे टिकाऊ और सबसे ऊर्जा-कुशल उपकरण बाजार में ला सकता है।

तकनीक और नवाचार ही अब इस उद्योग की असली ताकत बन चुके हैं।

विकास की रफ्तार के साथ बढ़ रहा है एक बड़ा खतरा

घरेलू उपकरणों की बिक्री जितनी तेजी से बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से बढ़ रहा है ई-कचरा।

हर फ्रिज, हर एसी और हर वॉशिंग मशीन की एक उम्र होती है। कुछ वर्षों बाद यही उपकरण कबाड़ बन जाते हैं। समस्या यह है कि दुनिया भर में निकलने वाले ई-कचरे का बहुत बड़ा हिस्सा सुरक्षित तरीके से रिसाइकिल नहीं हो पाता।

इन उपकरणों में मौजूद सीसा, पारा और अन्य हानिकारक तत्व मिट्टी और पानी को प्रदूषित कर सकते हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यदि इस समस्या पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में ई-कचरा प्लास्टिक प्रदूषण जितनी बड़ी चुनौती बन सकता है।

भारत भी चुनौती के मोड़ पर

भारत तेजी से बढ़ता हुआ उपभोक्ता बाजार है लेकिन इसके साथ इलेक्ट्रॉनिक कचरे की मात्रा भी तेजी से बढ़ रही है।

दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहरों में हर साल लाखों टन ई-कचरा पैदा हो रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि नई मशीनें खरीदना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी उनके सुरक्षित निपटान और रिसाइक्लिंग की व्यवस्था बनाना भी है।

अगर अभी तैयारी नहीं की गई, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।

सवाल भविष्य का

विशेषज्ञों का मानना है कि अब केवल ज्यादा उत्पाद बेचने का दौर खत्म होना चाहिए।

कंपनियों को ऐसे उपकरण बनाने होंगे जो ज्यादा समय तक चलें, आसानी से ठीक हो सकें और बाद में दोबारा रिसाइकिल किए जा सकें।

यूरोप के कई देशों ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। भारत में भी अब ऐसी नीतियों की जरूरत महसूस की जा रही है। आखिरकार सवाल भविष्य का है।

घरेलू उपकरणों ने हमारे जीवन को आसान बनाया है। उन्होंने समय बचाया है, मेहनत कम की है और जीवन स्तर बेहतर किया है लेकिन हर सुविधा के साथ जिम्मेदारी भी आती है। दुनिया आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां उसे यह तय करना है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए क्योंकि आने वाली पीढ़ियां केवल यह नहीं पूछेंगी कि हमने कितने एसी और फ्रिज खरीदे थे। वे यह भी पूछेंगी कि हमने उनके लिए कैसी धरती छोड़ी थी।

ShareTweetSend

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation