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पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधि नियंत्रण विधेयक 2026 पारित किया। कानून के तहत 12 माह तक हिरासत और संपत्ति जब्ती का प्रावधान है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में ‘गुंडा नियंत्रण विधेयक’ पारित

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पश्चिम बंगाल विधानसभा में ‘गुंडा नियंत्रण विधेयक’ पारित

बिना मुकदमे 12 महीने तक हिरासत का प्रावधान

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 13, 2026
in ईस्ट
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पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधि नियंत्रण विधेयक 2026 पारित किया। कानून के तहत 12 माह तक हिरासत और संपत्ति जब्ती का प्रावधान है।

ब्लिट्ज ब्यूरो

कोलकाता। बंगाल विधानसभा ने एक दिवसीय विशेष सत्र में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बेहद अहम और सख्त विधेयक पारित कर दिया। पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधि नियंत्रण विधेयक, 2026 यानी ‘गुंडा नियंत्रण बिल’ को सदन में 176 सदस्यों के समर्थन और विपक्षी 41 विधायकों के विरोध के साथ मंजूरी मिल गई।

भाजपा शासित उत्तर प्रदेश और गुजरात मॉडल पर लाए गए इस विधेयक के तहत राज्य सरकार को ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का अधिकार मिलेगा, जिन्हें संगठित हिंसा, दंगा, तोड़फोड़ या अन्य असामाजिक गतिविधियों में शामिल माना जाएगा। इस विधेयक में सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि ऐसे आरोपितों को बिना मुकदमा चलाए अधिकतम 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकेगा।

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मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल लोगों को जेल भेजना नहीं, बल्कि राज्य में संगठित अपराध और हिंसा पर प्रभावी रोक लगाना है। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानूनों में दंगों या हिंसा के दौरान सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई दोषियों से वसूलने का स्पष्ट प्रावधान नहीं था, इसलिए यह नया कानून लाना जरूरी हो गया था।

मुख्यमंत्री ने सदन को आश्वस्त करते हुए स्पष्ट किया कि यह कानून विशेष रूप से गुंडों और असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई के लिए बनाया गया है और इसका किसी भी राजनीतिक उद्देश्य से दुरुपयोग नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से मुआवजा वसूला जाए और जरूरत पड़ने पर उनकी चल-अचल संपत्तियां भी जब्त की जाएगी।

इस विधेयक पर सदन में अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2019 के बाद राज्य में कुछ वर्गों को राजनीतिक संरक्षण देकर हिंसक प्रदर्शनों को बढ़ावा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान कई मौकों पर सरकारी और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया, लेकिन दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई संभव नहीं हो सकी।

उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) और केंद्र के वक्फ संशोधन विधेयक जैसे मुद्दों पर लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए उकसाया गया था, जिससे कई जगह हिंसा और आगजनी की घटनाएं हुईं। मुख्यमंत्री ने इस विधेयक को ऐतिहासिक बताते हुए स्पष्ट कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद बंगाल में अब कानून के शासन की प्रतिष्ठा हुई है, जहां पहले शासक का कानून था। उन्होंने कहा कि अब इस तरह के कृत्य करने वालों को 10 बार सोचना पड़ेगा।

प. बंगाल में भी लागू होगा यूसीसी
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति के गठन की घोषणा की, जो प्रस्तावित यूसीसी बिल का प्रारूप तैयार करेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि समिति को चार सप्ताह के भीतर अपनी सिफारिशें सौंपने का निर्देश दिया गया है, ताकि अगस्त में विधानसभा के विस्तारित बजट सत्र के दौरान समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया जा सके।

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