ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा ने पिछड़े वर्गों से जुड़े दो अहम संशोधन विधेयकों को पारित किया गया है। ये विधेयक पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के साल 2012 के पुराने कानून में संशोधन करते हैं।
सदन में मतदान के दौरान विपक्ष के नेता रिताब्रत बनर्जी समेत बागी टीएमसी विधायकों ने वॉकआउट कर दिया। हालांकि, ममता बनर्जी के प्रति वफादार रहने वाले धड़े ने सदन में रहकर इस संशोधन के पक्ष में मतदान किया। इन दो विधेयकों के नाम ‘पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को छोड़कर) (सेवाओं और पदों में रिक्तियों का आरक्षण) (संशोधन) विधेयक, 2026’ और ‘पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026’ हैं।
समझें नफा-नुकसान
इन नए विधेयकों के जरिए ओबीसी श्रेणी के तहत 66 वर्गों को आरक्षण दिया गया है। कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए आरक्षण के कोटे को पिछले 17 प्रतिशत से घटाकर अब 7 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके साथ ही ओबीसी श्रेणियों का पुनर्गठन भी किया गया है।
दूसरा विधेयक साल 1993 के उस कानून में संशोधन करता है जो पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग के कामकाज को कंट्रोल करता है। सदन में विधेयकों के पक्ष में कुल 186 विधायकों ने वोट दिया, जबकि 17 सदस्यों ने इसके खिलाफ मतदान किया। छह विधायक मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे।
आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी के अनुरोध पर स्पीकर रथिंद्र बोस ने वोटों के विभाजन का आदेश दिया था। नौशाद सिद्दीकी और बागी टीएमसी विधायक बिश्वनाथ दास ने पिछड़े वर्गों के सामाजिक न्याय के उल्लंघन का हवाला देते हुए इन विधेयकों का विरोध किया था। उन्होंने इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग भी उठाई थी।
बिना सर्वे के शामिल की जातियां हटाई ंगईं
विधेयकों को सदन में पेश करते हुए राज्य के पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री गौरीशंकर घोष ने कहा कि सरकार पूरी तरह से हाईकोर्ट के निर्देशों के मुताबिक काम कर रही है। इन संशोधनों के पीछे कोई राजनीतिक मंशा नहीं है।
मंत्री गौरीशंकर घोष ने सदन को बताया, ‘हमने उन 113 वर्गों को लिस्ट से हटा दिया है जिन्हें पहले बिना किसी फील्ड सर्वे के शामिल किया गया था।













