• Latest
  • Trending
Uttar Pradesh Madrasa Education Act unconstitutional: High Court

उप्र मदरसा शिक्षा कानून असंवैधानिक : हाईकोर्ट

March 29, 2024
राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम

भारत अब अपनी हवा लगभग हर जगह नाप सकता है — अगला दशक इस पर काम करने का है कि मीटर क्या कह रहे हैं

July 31, 2026
Raj-Mandir

पाँच हफ़्ते, सोलह फ़िल्में: जुलाई ने परखा कि भारतीय पर्दे एक साथ कितना बोझ उठा सकते हैं

July 31, 2026
दूर होगा डेंगू का डर, पहली वैक्सीन को दवा नियामक से मिली मंजूरी

डेंगू के टीके को मंज़ूरी, और चुपचाप बदलता देश का प्रयोगशाला नेटवर्क

July 31, 2026
export

निर्यात रिकॉर्ड पर, घाटा भी पाँच महीने के शिखर पर — और दोनों की वजह एक ही आँकड़े में है

July 31, 2026
भारत के एक विश्वविद्यालय पुस्तकालय में पढ़ते छात्र

साढ़े चार करोड़ छात्र, एक करोड़ विज्ञान-तकनीक में — और बढ़ोतरी की रफ़्तार गिरकर 0.8% पर

July 31, 2026
भारत भूजल पुनर्भरण

448 अरब घन मीटर: भूजल की लड़ाई भारत धीरे-धीरे जीत रहा है — पर सबसे तेज़ी वहीं नहीं, जहां सबसे ज़्यादा ज़रूरत है

July 31, 2026
mission Gaganyaan

तीन परीक्षण जिन्हें कोई नहीं देखता — और जिन पर तय होता है कि यात्री सुरक्षित लौटेगा या नहीं

July 31, 2026
United-Kingdom-Parliament

भारत–ब्रिटेन समझौते के दो हफ़्ते: 99% निर्यात पर शुल्क शून्य होने से असल में बदलता क्या है

July 31, 2026
The-Sabarmati-riverfront-in-Ahmedabad,-Gujarat

गुजरात पर रेड अलर्ट, अहमदाबाद में स्कूल बंद — और महीना आंकड़ों में जितना दिखता है, उससे ज़्यादा सूखा

July 31, 2026
Commonwealth-Games

एक ही फ़ाइनल में भारत के तीन भाला फेंक खिलाड़ी — यह आंकड़ा किसी एक थ्रो से बड़ा है

July 31, 2026
5.5% और 16.2%: भारत में नौकरियों की कमी नहीं है, उम्र का मेल नहीं बैठ रहा है

5.5% और 16.2%: भारत में नौकरियों की कमी नहीं है, उम्र का मेल नहीं बैठ रहा है

July 30, 2026
vikram

वह रडार जो ज़मीन का खिसकना देख लेता है: निसार के पहले साल से भारत को क्या मिला

July 30, 2026
Saturday, August 1, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

उप्र मदरसा शिक्षा कानून असंवैधानिक : हाईकोर्ट

इसे बताया पंथ निरपेक्षता व शिक्षा के मौलिक अधिकारों के विपरीत

by ब्लिट्ज़ इंडिया
March 29, 2024
in उत्तर-प्रदेश
0
Uttar Pradesh Madrasa Education Act unconstitutional: High Court
संजय द्विवेदी

लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम 2004 को असंवैधानिक घोषित करते हुए कहा है कि यह अधिनियम संविधान में पंथ निरपेक्षता के मूल सिद्धांतों के साथ ही समानता, जीवन और शिक्षा के मौलिक अधिकारों के विपरीत है।

यूजीसी एक्ट के भी विरुद्ध
कोर्ट ने इस अधिनियम को यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन एक्ट की धारा 22 के भी विरुद्ध पाया है और सरकार को आदेश दिया है कि मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को विभिन्न बोर्ड के नियमित स्कूलों में समायोजित किया जाए।

YOU MAY ALSO LIKE

महिलाओं के कार्यस्थल की नियमित सुरक्षा ऑडिट के निर्देश

अचानक बांकेबिहारी मंदिर पहुंचे योगी, ठाकुर जी की छवि को निहारते रहे

बड़ी संख्या में मदरसों के छात्र प्रभावित होंगे
अधिनियम समाप्त होने के बाद बड़ी संख्या में मदरसों में पढ़ने वाले छात्र प्रभावित होंगे, लिहाजा राज्य पर्याप्त संख्या में सीटें बढ़ाए और आवश्यकता हो तो नए विद्यालयों की स्थापना करे। यह निर्णय जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने अंशुमान सिंह राठौर की याचिका पर पारित किया।

– सरकार सुनिश्चित करे, 6-14 वर्ष का कोई बच्चा स्कूल दाखिले से वंचित न रहे
– मुलायम सिंह यादव की सरकार में बना था अधिनियम

8 फरवरी को निर्णय किया था सुरक्षित
याचिका के साथ कोर्ट ने एकल पीठों द्वारा भेजी गई उन याचिकाओं पर भी सुनवाई की जिनमें मदरसा बोर्ड अधिनियम की संवैधानिकता का प्रश्न उठाते हुए बड़ी बेंच को मामले भेजे गए थे। याचिकाओं पर कोर्ट ने आठ फरवरी, 2024 को अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया था।

विशेष धर्म के बच्चे को अलग शिक्षा क्यों
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि राज्य यह नहीं कर सकता कि किसी विशेष धर्म के बच्चे को बाकियों से अलग शिक्षा दे। धार्मिक आधार पर समाज को बांटने वाली राज्य की नीति संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत होती है। सरकार यह अवश्य सुनिश्चित करे कि छह से 14 वर्ष का कोई बच्चा मान्यता प्राप्त विद्यालयों में दाखिले से न छूट जाए। याचिका में कहा गया कि मदरसा अधिनियम में यह स्पष्ट ही नहीं है कि एक विशेष धर्म की शिक्षा के लिए अलग से सरकारी बोर्ड बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

राज्य सरकार ने दी दलील
राज्य सरकार व मदरसा बोर्ड की ओर से दलील दी गई कि सरकार के पास पारंपरिक शिक्षा प्रदान करने के लिए नियम बनाने की शक्ति है। इस पर न्यायालय ने कहा कि सरकार के पास यह शक्ति जरूर है, लेकिन दी जाने वाली पारंपरिक शिक्षा पंथनिरपेक्ष प्रकृति की होनी चाहिए। सरकार के पास ऐसी कोई शक्ति नहीं है जिसके तहत वह धार्मिक शिक्षा के लिए बोर्ड का गठन कर दे।

न्यायालय द्वारा नियुक्त न्यायमित्र ने भी दलील दी कि शिक्षा के अधिकार के तहत सरकार छह से 14 वर्ष के बच्चों को ऐसी शिक्षा दे सकती है जो यूनिवर्सल हो न कि धर्म विशेष से संबधित। मुख्य याचिका के विरुद्ध कुछ मदरसों, मदरसों के शिक्षक व कर्मचारी संगठन ने हस्तक्षेप प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान अपर महाधिवक्ता अनिल प्रताप सिंह व न्याय मित्र गौरव मेहरोत्रा ने पक्ष रखा।

इसी कानून से हो रहा प्रदेश के मदरसों का संचालन
मदरसा शिक्षा का यह अधिनियम वर्ष 2004 में मुलायम सिंह यादव की सरकार में बना था। यह ऐसा कानून है जिससे प्रदेश के मदरसों का संचालन होता है। मानक पूरा करने वाले मदरसों को मदरसा बोर्ड मान्यता देता है। बोर्ड मदरसों को पाठ्यक्रम, शिक्षण सामग्री और शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए भी दिशा-निर्देश प्रदान करता है। प्रदेश में इस समय प्राइमरी व जूनियर स्तर के 11057, हाईस्कूल स्तर के 4394 व सरकार से अनुदान पाने वाले 560 मदरसे हैं। मदरसों में 13.57 लाख बच्चे पढ़ते हैं।

मदरसा बोर्ड ने जताया आश्चर्य
उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डा. इफ्तिखार अहमद जावेद ने उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम 2004 को असंवैधानिक घोषित किए जाने के हाई कोर्ट के निर्णय पर आश्चर्य जताया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय बहुत बड़ा है।

बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने बोर्ड के दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से अदालत तक पहुंचाने में संभावित चूक का संकेत दिया। बोर्ड जल्द ही पूरे आदेश की विस्तार से समीक्षा करेगा और आगे की कार्रवाई के लिए यूपी सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपेगा। उन्होंने कहा कि सरकारी अनुदान मदरसों में धार्मिक शिक्षा के लिए नहीं मिलता है। यह अनुदान अरबी, फारसी व संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए मिलता है। यही वजह है कि संस्कृत और अरबी फारसी बोर्ड सरकार ने बनाया है। दोनों बोर्ड अपना काम कर रहे हैं। न्यायालय को समझाने में हमसे कहीं न कहीं चूक हुई है।

न्यायालय के निर्णय को देख-समझ लें, फिर इसकी समीक्षा करवाई जाएगी। इसके बाद सरकार इस संबंध में उचित निर्णय लेगी।
– ओम प्रकाश राजभर
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation