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सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट के प्रावधानों को किया रद

कहा- ये असंवैधानिक प्रयास था

by ब्लिट्ज़ इंडिया
November 22, 2025
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Score of 67 toppers in NEET UG is 720/720, 14 girls also included.

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राजेश दुबे

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट के प्रावधानों को रद कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसले को पलटने का एक असंवैधानिक प्रयास था, जो न्यायिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करता था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे द्वारा रद किए गए प्रावधानों को मामूली बदलावों के साथ फिर से लागू किया गया है ताकि, पहले के फैसले को निष्प्रभावी किया जा सके। इस मामले के फैसले में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि टुकड़ों में किए गए सुधारों से संरचनात्मक कमियों को दूर नहीं किया जा सकता।
हम केंद्र सरकार को राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के गठन के लिए तीन महीने का समय देते हैं। कोर्ट ने कहा कि आईटीएटी के सदस्यों का पूरा कार्यकाल पुराने अधिनियम के अनुसार होगा। 2021 अधिनियम से पहले की गई नियुक्तियां एमबीए 4 और 5 के अनुसार होंगी, न कि 2021 के कानून के तहत संक्षिप्त कार्यकाल के अनुसार।
2021 के अधिनियम के प्रावधान बरकरार नहीं
सीजेआई ने कहा कि हमने अध्यादेश और 2021 के अधिनियम के प्रावधानों की तुलना की है और यह दर्शाता है कि मामूली फेरबदल के साथ रद किए गए सभी प्रावधानों को फिर से लागू किया गया है। इस प्रकार, हमने माना है कि 2021 के अधिनियम के प्रावधानों को बरकरार नहीं रखा जा सकता, क्योंकि यह शक्तियों के पृथक्करण और न्यायिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।
जुलाई 2021 में, कोर्ट ने न्यायाधिकरण सुधार अध्यादेश, 2021 द्वारा संशोधित वित्त अधिनियम, 2017 की धारा 184 को इस हद तक रद कर दिया था कि इसने न्यायाधिकरणों के सदस्यों और अध्यक्ष का कार्यकाल 4 साल तक निर्धारित कर दिया था। यह बिना किसी दोष और बाध्यकारी फैसले को दूर किए विधायी अधिलेखित करने के समान है। यह गलत है, इसलिए इसे असंवैधानिक घोषित किया जाता है। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने इस मामले में फैसला सुनाया है।
कोर्ट कब रद कर सकता है?
कोर्ट ने स्वीकार किया कि वह संसद से किसी विशेष स्वरूप में कानून बनाने की अपेक्षा नहीं कर सकता।
हालांकि, उसने यह भी कहा कि यदि कोई विधायी उपाय मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, शक्तियों के पृथक्क रण या न्यायिक स्वतंत्रता जैसे संरचनात्मक सिद्धांतों का उल्लंघन करता है, विधायी क्षमता से परे जाता है, या बाध्यकारी संवैधानिक निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो न्यायालय उसे रद कर सकता है।
कोर्ट ने कहा कि जहां न्यायालय संवैधानिक कमियों की पहचान करता है और संवैधानिक सिद्धांतों, जैसे कि न्यायिक निकायों की स्वतंत्रता, संरचना या कार्यकाल से संबंधित, का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य निर्देश जारी करता है, वे निर्देश बाध्यकारी होते हैं।

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