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हरित भारत मिशन पर CAG रिपोर्ट: 10 साल के कामकाज में बड़ी कमियां

by ब्लिट्ज़ इंडिया
September 3, 2026
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हरित भारत मिशन CAG रिपोर्ट 2026

ब्लिट्ज ब्यूरो

हरित भारत मिशन पर सीएजी की रिपोर्ट

हरित भारत मिशन की बुनियाद में एक बात लिखी थी — यह काम अकेले कोई विभाग नहीं करेगा। पैसा और मेहनत कैम्पा से, मनरेगा से, राज्यों के वनरोपण कार्यक्रमों से आएगी, और मिशन का अपना बजट उसमें जुड़ेगा। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक ने अब दस साल की उसी व्यवस्था की जाँच की है, और रिपोर्ट 12 अगस्त 2026 को संसद में रखी गई।

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निष्पादन लेखापरीक्षा रिपोर्ट संख्या 4, वर्ष 2026, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से संबंधित है और उन 16 राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में 2015-16 से 2024-25 तक की योजना, क्रियान्वयन और निगरानी की जाँच करती है जिनके लक्ष्य मंत्रालय ने मंज़ूर किए थे।

पैसे का हिसाब, लेखापरीक्षक के शब्दों में
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने बारहवीं योजना से पहले चार वर्षों के लिए 2,000 करोड़ रुपये का परिव्यय मंज़ूर किया था, साथ ही राज्यों के हिस्से के लिए तेरहवें वित्त आयोग के अनुदान से 400 करोड़ रुपये। लेखापरीक्षा दर्ज करती है कि क्रियान्वयन के दस वर्षों में बजटीय सहायता से 1,149.14 करोड़ रुपये मिले — 47.88 फ़ीसदी। ब्लिट्ज़ ने यह प्रतिशत दोनों आंकड़ों से दोबारा जोड़कर देखा है और यह जैसा छपा है वैसा ही है। जिस अभिसरण से बाक़ी आना था, उसके न होने से 10,600 करोड़ रुपये की सहायता नहीं मिल सकी।

68 में से छह वार्षिक कार्य योजनाएँ ही वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले मंत्रालय तक पहुँचीं, और एक भी समय पर मंज़ूर नहीं हुई।

ज़मीन पर
वन आवरण की गुणवत्ता सुधारने के 14 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुक़ाबले सुधार 11,384 हेक्टेयर पर देखा गया, और वन आवरण बढ़ाने के उतने ही लक्ष्य के मुक़ाबले बढ़त 3,409 हेक्टेयर पर। रिपोर्ट इन कमियों को 91.87 और 97.57 फ़ीसदी बताती है; इस डेस्क की दोबारा की गई गणना उससे मिलती है।

दो राज्य जिन्होंने नाप लिया
इस रिपोर्ट का एक निष्कर्ष अलग से पढ़ने लायक़ है, क्योंकि किसी भी लेखापरीक्षा की सबसे उपयोगी बात यह होती है कि काम हो सकता है, इसका सबूत मिल जाए। लेखापरीक्षा दर्ज करती है कि 2015 से 2025 के बीच मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को छोड़कर किसी राज्य ने कार्बन अवशोषण (कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन) का आकलन नहीं किया। इन दोनों ने किया। जलवायु के संदर्भ में वनरोपण मिशन का पूरा मक़सद यही है, और यही सबसे कठिन नाप है। रिपोर्ट यह भी दर्ज करती है कि इसी नाप के लिए वहाँ लगे फ़्लक्स टावर रखरखाव की योजना न बनने के कारण बेकार पड़े रहे, जिस पर 3.50 करोड़ रुपये ख़र्च हुए थे — यह अलग समस्या है, नीयत की नहीं, देखभाल की, और सस्ती भी।

प्रक्रिया अभी कहाँ है
यह ठीक-ठीक लिखना ज़रूरी है। रिपोर्ट 12 अगस्त 2026 को सदन में रखी गई। इस समय इन अनुच्छेदों पर मंत्रालय के कृत कार्रवाई नोट सार्वजनिक अभिलेख पर नहीं हैं, और संसद की किसी समिति ने अभी इस रिपोर्ट पर विचार नहीं किया है। ऊपर जो लिखा है वह प्रस्तुतीकरण के चरण पर लेखापरीक्षक का निष्कर्ष है, उससे अधिक कुछ नहीं। मंत्रालय का उत्तर और लोक लेखा समिति की राय जब उपलब्ध होंगे, ब्लिट्ज़ उन्हें छापेगा। यहाँ किसी व्यक्ति का नाम नहीं है, और इस डेस्क ने जो दस्तावेज़ पढ़ा उसमें भी नहीं था।

भारत को इससे क्या मिलता है। जो मिशन नापा जाता है, वही सुधारा जा सकता है। वन और वृक्ष कार्बन पर भारत की प्रतिबद्धता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दर्ज होती है, और उस रिपोर्ट की विश्वसनीयता उसी नाप की शृंखला पर टिकी है जिसकी यह जाँच हुई है। जो लेखापरीक्षक साफ़ कहता है कि कहाँ नाप नहीं हुआ, वह भारत के दावे को दुनिया में भरोसेमंद बनाता है — वही काम जो लेखा-परीक्षित बहीखाता बिना जाँचे बहीखाते से ज़्यादा करता है।

केवल सुधारात्मक सुझाव के तौर पर — जिन दो राज्यों ने कार्बन अवशोषण नापा, उनकी विधि मिशन की मानक पद्धति बनाकर बाँटी जा सकती है, और इसमें ख़र्च कुछ नहीं है। जो फ़्लक्स टावर लग चुके हैं उन्हें नई मंज़ूरी नहीं, रखरखाव की एक मद चाहिए। और वार्षिक कार्य योजना का वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले पहुँच जाना वह एक शर्त है जिस पर मिशन की बाक़ी सारी समय-सीमाएँ टिकी हैं।

इस ख़बर के साथ कोई फ़ोटो नहीं है। सदन में रखी गई लेखापरीक्षा रिपोर्ट की उसी तारीख़ की कोई कार्यक्रम-तस्वीर नहीं होती, और परिपत्र BIMG/CIR/2026/02 उसकी जगह कोई विकल्प चित्र लगाने की अनुमति नहीं देता।

स्रोत भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक का कार्यालय, 13 अगस्त 2026 की प्रेस विज्ञप्ति Audit Report on Green India Mission Tabled (संदर्भ BSC/R/TT/IK/63-26), जिसमें 12 अगस्त 2026 को संसद में निष्पादन लेखापरीक्षा रिपोर्ट संख्या 4, वर्ष 2026 (संघ सरकार, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय) रखे जाने की जानकारी है — cag.gov.in पर पूरी पढ़ी गई। ऊपर का हर आंकड़ा और हर निष्कर्ष लेखापरीक्षक का है। · 47.88 फ़ीसदी और दोनों कमी-प्रतिशत इस डेस्क ने दोबारा जोड़े और वे छपे हुए से मिलते हैं। · जो इस्तेमाल नहीं हुआ, और क्यों: इस रिपोर्ट के किसी समाचार सारांश का उपयोग नहीं किया गया। मंत्रालय के कृत कार्रवाई नोट और किसी समिति की राय सार्वजनिक अभिलेख पर नहीं हैं, इसलिए वे यहाँ दर्ज नहीं हैं।

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