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भारत-उज़्बेकिस्तान व्यापक रणनीतिक साझेदारी

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 31, 2026
in the blitz
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भारत-उज़्बेकिस्तान व्यापक रणनीतिक साझेदारी

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।विदेश यात्राओं की ख़बर अक्सर हवाई अड्डे पर ख़त्म हो जाती है — कौन आया, किसने स्वागत किया, कितने समझौते हुए। 30 अगस्त 2026 को ताशकंद में जारी हुए भारत–उज़्बेकिस्तान संयुक्त बयान को अगर पूरा पढ़ा जाए तो उसमें आम आदमी के काम की चीज़ें उससे कहीं ज़्यादा हैं। सवाल यह नहीं कि रिश्ता किस दर्जे पर पहुँचा। सवाल यह है कि इससे किसकी पढ़ाई, किसकी नौकरी और किसके खेत का हिसाब बदलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 और 30 अगस्त 2026 को उज़्बेकिस्तान की राजकीय यात्रा पर रहे। राष्ट्रपति शवकत मिर्ज़ियोयेव के साथ बातचीत के बाद दोनों देशों ने अपने रिश्ते को व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) का दर्जा दिया। यह शब्द भारी है, पर इसके नीचे जो सूची है वह ठोस है।

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पढ़ाई और प्रशिक्षण

संयुक्त बयान में जो आँकड़े दिए गए हैं, वे बरसों की मेहनत के हैं। भारत के आईटीईसी कार्यक्रम के तहत 2,700 से ज़्यादा उज़्बेक नागरिक प्रशिक्षण ले चुके हैं। आईसीसीआर की छात्रवृत्तियों पर 400 से ज़्यादा उज़्बेक छात्र चुने जा चुके हैं, जिनमें आयुष की छात्रवृत्तियाँ भी हैं। जिन क्षेत्रों में यह साझेदारी सबसे पुरानी है, वे भी बयान में नाम से गिनाए गए हैं — चिकित्सा, दवा, रसायन, नैनो तकनीक और जैव तकनीक।

इसी हिस्से में एक घोषणा हिंदी के लिए है। उज़्बेकिस्तान में हिंदी भाषा के लिए लाल बहादुर शास्त्री छात्रवृत्ति शुरू की जा रही है, और उज़्बेक पक्ष ने इसका स्वागत किया है। ताशकंद और शास्त्री जी का जो रिश्ता इतिहास में है, उसे देखते हुए यह छात्रवृत्ति सिर्फ़ एक योजना नहीं है।
ताशकंद की सूची

मानदंड / विवरण जानकारी
आईटीईसी के तहत प्रशिक्षित उज़्बेक नागरिक 2,700 से अधिक
आईसीसीआर छात्रवृत्ति पर चुने गए उज़्बेक छात्र 400 से अधिक
2030 तक द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य 5 अरब डॉलर
अरल सागर के पर्यावरण सुधार के लिए भारतीय अनुदान 10 लाख डॉलर
सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम 2026–2030
तरजीही व्यापार समझौते का साझा अध्ययन पूरा हुआ
ताशकंद का पहला आईटी पार्क, भारतीय मॉडल पर 2019 से
दवा, अस्पताल और नौकरी

जिस हिस्से का असर सबसे जल्दी दिखेगा वह दवा उद्योग का है। संयुक्त बयान में ताशकंद फार्मा पार्क को साझा परियोजनाओं का मंच बताया गया है — निवेश, आधुनिक दवा निर्माण, उत्पादन का स्थानीयकरण, तकनीक का हस्तांतरण और कुशल कर्मचारियों की तैयारी, चारों एक साथ। इसके आगे बयान यह भी कहता है कि भारतीय कंपनियों के सहयोग से उज़्बेकिस्तान में नए चिकित्सा केंद्र, प्रयोगशालाएँ, शोध संस्थान और संयुक्त दवा इकाइयाँ खड़ी की जाएँगी। भारत की दवा कंपनियों के लिए यह बाज़ार भी है और निर्माण का ठिकाना भी।

सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी दोनों देश साथ आए हैं — जैव-चिकित्सा अनुसंधान और चिकित्सा नवाचार में एक-दूसरे की ताक़त का इस्तेमाल करके नए इलाज और नई चिकित्सा पद्धतियाँ विकसित करने पर।

रिश्ते का दर्जा बयान की पहली पंक्ति में है। असली बात उसके बाद की सूची में है।

किसान और खेत के लिए

• कृषि मूल्य शृंखला और निर्यात क्षमता पर साझा काम।
• कम संसाधन में ज़्यादा उपज देने वाली तकनीकों पर ज़ोर।
• शोध संस्थानों के बीच पौध आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण पर सहयोग।
• कृषि उत्पादों के द्विपक्षीय व्यापार को आसान बनाने पर सहमति।

खेत, खनिज और बिजली

खेती के हिस्से में दोनों देशों ने कृषि मूल्य शृंखला के विकास, निर्यात क्षमता और पशुपालन क्षेत्र की तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर सहमति जताई है। नवाचार और संसाधन बचाने वाली तकनीक पर अलग से ज़ोर है, और शोध संस्थानों तथा उद्यमों के बीच उत्पादकता बढ़ाने और पौध आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण पर सहयोग की बात है। मध्य एशिया में पानी सबसे बड़ी अड़चन है, इसलिए यह पंक्ति जितनी सादी दिखती है उतनी सादी है नहीं।

खनिज के हिस्से में बात आगे बढ़ी है। दोनों देश महत्वपूर्ण खनिजों (critical minerals) में भूवैज्ञानिक खोज, खनन, प्रसंस्करण और एकीकृत मूल्य शृंखला — चारों पर साझा परियोजनाएँ चलाएँगे। यानी सिर्फ़ पत्थर निकालना नहीं, उससे आगे का काम भी। भारतीय कंपनियों को उज़्बेकिस्तान के संभावित खनिज भंडारों के विकास में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, और उज़्बेक उद्यमों को भारत में साझा काम के लिए। परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग बढ़ाने में भी दोनों ने दिलचस्पी जताई है।

तकनीक और आईटी पार्क

ताशकंद का पहला आईटी पार्क 2019 में भारतीय मॉडल पर, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के सक्रिय सहयोग से बना था। संयुक्त बयान इसे सफल बताते हुए कहता है कि अब दोनों देशों के टेक्नोलॉजी पार्क, कंपनियाँ, स्टार्टअप और शैक्षिक संस्थान आपस में और जुड़ेंगे। फरवरी 2026 में नई दिल्ली में हुए इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के मौक़े पर जो समझ बनी थी, उस पर आगे बढ़ते हुए दोनों देश सुरक्षित और भरोसेमंद कृत्रिम बुद्धिमत्ता (artificial intelligence) प्रणालियों के विकास में सहयोग करेंगे। अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग, अंतरिक्ष अनुप्रयोगों, वैज्ञानिक आँकड़ों के आदान-प्रदान और साझा कार्यशालाओं पर भी सहमति है।

ब्लिट्ज़ की राय

बयान की सबसे बड़ी ख़ूबी यह है कि इसमें काम करने वाली संस्थाओं के नाम हैं — कौन-सा कार्यसमूह बनेगा, कौन-सा मंत्रालय क्या देखेगा। और सबसे बड़ी चुनौती भी यहीं है। दोनों विदेश मंत्रियों की अगुवाई में जो नई व्यवस्था बनी है, वह सिर्फ़ बैठक के लिए नहीं, अमल की निगरानी के लिए बनी है। सुझाव सिर्फ़ इतना है कि यह व्यवस्था साल में एक बार छोटा-सा हिसाब सार्वजनिक कर दे — क्या-क्या हुआ और क्या बाक़ी है। और तरजीही व्यापार समझौते पर जो ‘समयबद्ध’ निर्देश दिया गया है, उसके साथ एक तारीख़ जुड़ जाए तो काम की रफ़्तार अपने आप बढ़ेगी।

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