ब्लिट्ज ब्यूरो
शिक्षा : 2,700 से ज़्यादा उज़्बेक भारत में पढ़े
भारत के आईटीईसी कार्यक्रम के तहत अब तक 2,700 से अधिक उज़्बेक नागरिकों ने प्रशिक्षण लिया है, और आईसीसीआर छात्रवृत्ति पर 400 से ज़्यादा उज़्बेक छात्र चुने जा चुके हैं, जिनमें आयुष की छात्रवृत्तियाँ भी शामिल हैं। दवा, रसायन, नैनो तकनीक और जैव तकनीक इस साझेदारी के पुराने क्षेत्र रहे हैं। दोनों देशों ने इस कार्यक्रम को और आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है।
भाषा : हिंदी के लिए शास्त्री छात्रवृत्ति
उज़्बेकिस्तान में हिंदी भाषा के लिए लाल बहादुर शास्त्री छात्रवृत्ति की घोषणा का उज़्बेक पक्ष ने स्वागत किया है। संयुक्त बयान में दोनों नेताओं ने उज़्बेकिस्तान में भारत-अध्ययन और भारत में उज़्बेक-अध्ययन, दोनों के विस्तार का समर्थन किया है। शास्त्री जी का ताशकंद से रिश्ता इस घोषणा को एक अलग वज़न देता है।
दवा उद्योग : ताशकंद फार्मा पार्क में भारत की भूमिका
दोनों नेताओं ने ताशकंद फार्मा पार्क को साझा परियोजनाओं का मंच बताया — निवेश, आधुनिक दवा निर्माण, उत्पादन का स्थानीयकरण, तकनीक हस्तांतरण और कुशल कर्मियों की तैयारी। भारतीय कंपनियों के सहयोग से उज़्बेकिस्तान में नए चिकित्सा केंद्र, प्रयोगशालाएँ और संयुक्त दवा इकाइयाँ खड़ी करने पर भी सहमति बनी है।
खेती : बीज और नस्ल पर मिलकर काम
दोनों देश कृषि मूल्य शृंखला, निर्यात क्षमता और पशुपालन की तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर साथ काम करेंगे। संयुक्त बयान में नवाचार और कम संसाधन में ज़्यादा उपज देने वाली तकनीकों पर ख़ास ज़ोर है, और शोध संस्थानों के बीच पौध आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण तथा टिकाऊ उपयोग पर सहयोग की बात कही गई है।
योग और आयुष : पारंपरिक चिकित्सा पर समझौता
उज़्बेकिस्तान के योग महासंघ और भारत के आयुष मंत्रालय के बीच प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण पर सहयोग का दोनों नेताओं ने स्वागत किया, और उज़्बेकिस्तान की योगासन प्रतियोगिताओं में भागीदारी को सराहा। पारंपरिक चिकित्सा में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर भी सहमति हुई है। 21 जून, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, का ज़िक्र बयान में अलग से है।
खेल : बैडमिंटन, तीरंदाज़ी और शतरंज
खेल के क्षेत्र में दोनों देश खिलाड़ियों की तैयारी और प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण में अनुभव साझा करेंगे, और संयुक्त बयान में तीन खेल नाम से गिनाए गए हैं — बैडमिंटन, तीरंदाज़ी और शतरंज। तीनों में भारत के पास कोचिंग का जो ढाँचा है, वह अब मध्य एशिया तक जाएगा।














