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25 साल पहले जिसे कूड़ेदान में फेंका गया वही बन गई सिरमौर

by ब्लिट्ज़ इंडिया
May 24, 2024
in महिला-खेल
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The same thing which was thrown in the dustbin 25 years ago became Sirmaur
ब्लिट्ज ब्यूरो

मुंबई। ख्वाबों को हकीकत करने के लिए सिर्फ हौसला, हिम्मत, मेहनत और जुनून चाहिए। इस बात को सच कर रही है ंमहाराष्ट्र की माला की कहानी। माला को दिखाई नहीं देता और बचपन में ही माता-पिता ने माला को कूड़ेदान में फेंक दिया था, जिसके बाद अब इतिहास रच कर माला सबको जवाब दे रही है। सपनों को हकीकत में बदलने के हौसले और जुनून ने इतनी मजबूती दी कि माला ने महा एग्जाम एमपीएससी (महाराष्ट्र पब्लिक सर्विस कमीशन) क्रैक कर लिया।

माला को पैदाइश के समय से दिखाई नहीं देता , आज माला की उम्र 25 साल है। पच्चीस साल पहले, महाराष्ट्र के जलगांव रेलवे स्टेशन पर एक कूड़ेदान में बच्ची को फेंका हुआ पाया गया था। पुलिस ने बच्ची के माता-पिता का पता लगाने की कोशिश की लेकिन उनका पता नहीं लगाया जा सका जिसके बाद नवजात बच्ची को पुलिस जलगांव के एक रिमांड होम में ले गई। वहां से बच्ची को 270 किमी दूर अमरावती के परतवाड़ा में बधिर व दृष्टि दिव्यांग लोगों के लिए एक बेहतर एनजीओ में शिफ्ट कर दिया गया।

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वहां नवजात बच्ची का नाम माला पापलकर रखा गया। दिखाई न देने के बावजूद और एनजीओ में पली बढ़ी माला ने अपनी मेहनत से इतिहास रच दिया और कामयाबी की ऊंचाइयों को छुआ। पिछले दिनों एमपीएससी के नतीजे सामने आए, जिसमें माला ने सफलता हासिल की और मुंबई में महाराष्ट्र सचिवालय – मंत्रालय में एक क्लर्क-सह-टाइपिस्ट के रूप में काम करने वाली हैं। माला के गुरु और पद्म पुरस्कार से सम्मानित शंकरबाबा पापलकर ने न सिर्फ माला को अपना सरनेम दिया बल्कि माला के हुनर को सराहा, साथ ही उसे ब्रेल (जिन बच्चों को दिखाई नहीं देते उनको पढ़ाने का एक स्कूल) में पढ़ाया।

माला ने अपनी कामयाबी पर कहा कि ऊपर वाले ने मुझे बचाने के लिए फरिश्ते भेजे, आज मैं जहां हूं, इन सब लोगों की वजह से ही हूं। साथ ही माला ने कहा कि यह मेरी कामयाबी की महज शुरुआत है मैं अभी यहां नहीं रुकूंगी बल्कि यूपीएससी की तैयारी करुंगी और एक आईएएस ऑफिसर बनकर दिखाऊंगी।

माला के गुरु शंकरबाबा ने बताया कि माला ने ब्रेल स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी की और 12 क्लास में फर्स्ट डिविजन हासिल की। इसके बाद 2018 में माला ने अमरावती यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की। गवर्नमेंट विदर्भ इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस से आर्ट्स में पोस्ट ग्रेजुएशन की। माला ने ब्रेल की मदद से पढ़ाई की और हर एग्जाम में एक राइटर की मदद से पेपर दिया । शंकरबाबा ने बताया कि बाद में माला की बेहतर पढ़ाई के लिए दरियापुर के प्रोफेसर प्रकाश टोपले पाटिल ने उन्हें गोद ले लिया।

दो बार एग्जाम पास नहीं हुआ
माला को यूनिक एकेडमी के डायरेक्टर प्रोफेसर अमोल पाटिल ने एमपीएससी परीक्षाओं के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी ली। माला ने अगस्त 2022 और दिसंबर 2023 में तहसीलदार पद के लिए परीक्षा दी लेकिन वो एग्जाम पास नहीं कर पाईं। बाद में, उन्होंने एमपीएससी क्लर्क (टाइपराइटिंग) का एग्जाम दिया। इस एग्जाम में उन्हें कामयाबी हासिल हुई और वो पूरे देश के लिए मिसाल बन गई।

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