ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।रिकॉर्ड आय वाली कंपनियों और बढ़ते बाज़ार की हर खबर के नीचे एक कहीं लंबा सवाल चलता रहता है, जिसका जवाब किसी एक तिमाही में नहीं मिलता — भारत की विशाल युवा आबादी को हुनरमंद और रोज़गार से जुड़ा कैसे बनाया जाए। दुनिया की सबसे युवा बड़ी आबादियों में से एक होना भारत का सबसे बड़ा मौका है, जिसे “जनसांख्यिकीय लाभांश” कहते हैं — पर यह लाभांश तभी मिलता है जब हर साल काम की उम्र में पहुंच रहे करोड़ों युवाओं को अच्छा काम और सही कौशल मिले।
गणित ही इसकी अहमियत बताता है। हर महीने लाखों युवा काम की उम्र में दाखिल हो रहे हैं, और उनके लिए रोज़गार बनाना सिर्फ एक आर्थिक ज़रूरत नहीं, एक पूरी पीढ़ी से किया वादा है। सवाल दोहरा है — एक तरफ पर्याप्त अच्छी नौकरियां पैदा करना, दूसरी तरफ यह पक्का करना कि युवाओं के पास वे हुनर हों जो फैक्ट्री की लाइन, डिजिटल दफ्तर और नई अर्थव्यवस्था मांगती है। मैन्युफैक्चरिंग, निर्माण, सेवाएं और डिजिटल कारोबार — हर क्षेत्र में यही मेल असली फर्क डालता है।
जनसांख्यिकीय लाभांश अपने आप नहीं मिलता; वह हुनर और नौकरियों से कमाया जाता है। युवा आबादी एक मौका है — और मौके पर मेहनत करनी पड़ती है।
ईमानदारी से देखें तो मुश्किलें असली हैं। पढ़ाई और नौकरी की मांग के बीच का फासला, कई जगह ट्रेनिंग की गुणवत्ता, और महिलाओं की कार्यबल में कम भागीदारी — ये असल चुनौतियां हैं। पर हर एक सुलझने वाली है, और तरीका आज़माया हुआ है: उद्योग की ज़रूरत से जुड़ी कौशल ट्रेनिंग, मज़बूत आईटीआई और अप्रेंटिसशिप, डिजिटल हुनर पर ज़ोर, और ऐसे उद्योगों का विस्तार जो बड़ी संख्या में नौकरियां देते हैं। कौशल और रोज़गार को साथ-साथ बढ़ाना ही असली काम है।
बड़ी तस्वीर में अच्छी बात यह है कि यह मौका भारत की पहुंच में है, बशर्ते इसे एक स्थायी प्राथमिकता की तरह देखा जाए, न कि किसी एक साल की चिंता। आगे का रास्ता कौशल को उद्योग की मांग से जोड़ने, ट्रेनिंग की गुणवत्ता बढ़ाने, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, और नौकरियां देने वाले क्षेत्रों को फैलाने में है। धीरज और लगातार निवेश से संभाला जाए, तो युवा आबादी सबसे बड़ी ताकत बनकर आने वाले दशकों तक भारत की तरक्की का इंजन बन सकती है।












