ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। कैंसर के सबसे खतरनाक और जानलेवा प्रकार में पैनक्रियाटिक कैंसर का नाम भी शामिल है, लेकिन हाल ही में हुई एक रिसर्च मरीजों के दिल में उम्मीद की नई किरण जगा रही है।
दरअसल, एक नई एक्सपेरिमेंटल टैबलेट ने एडवांस पैनक्रियाटिक कैंसर से पीड़ित मरीजों को लंबे समय तक जीवित रहने में मदद की है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, लॉस एंजिल्स के डॉ. जेव वेनबर्ग का कहना है कि हालांकि यह दवा कैंसर को पूरी तरह ठीक नहीं करती, लेकिन यह इस दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।
इस नई टैबलेट का नाम डैराक्सोनरासिब है। दरअसल, 90% से ज्यादा पैनक्रियाटिक कैंसर के मामलों में एक म्यूटेटेड प्रोटीन ट्यूमर को बढ़ाने का काम करता है। दशकों से वैज्ञानिक इस प्रोटीन को रोकने का तरीका ढूंढ़ रहे थे, लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही थी। अब यह नई दवा इसी म्यूटेटेड प्रोटीन को ब्लॉक करने का काम करती है।
कीमोथेरेपी के मुकाबले दोगुना असरदार
यह रिसर्च न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में पब्लिश हुई है और हाल ही में शिकागो में अमेरिकन सोसाइटी फॉर क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी की बैठक में इसे प्रेजेंट किया गया था। इस स्टडी में 500 ऐसे मरीजों को शामिल किया गया था, जिनका कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल चुका था और जिन पर पिछला इलाज बेअसर हो चुका था। इन मरीजों को दो ग्रुप्स में बांटकर यह टैबलेट या फिर कीमोथेरेपी दी गई। नतीजों में सामने आया कि रोजाना ली जाने वाली इस टैबलेट ने मरीजों के जीवित रहने के समय को करीब दोगुना कर दिया। टैबलेट लेने वाले मरीज औसतन 13.2 महीने तक जीवित रहे, जबकि कीमोथेरेपी लेने वाले मरीज सिर्फ 6.7 महीने ही जी सके। इसके अलावा, कीमोथेरेपी की तुलना में इस टैबलेट के साइड इफेक्ट्स भी कम देखे गए। भले ही यह सुधार छोटा है, लेकिन कीमोथेरेपी के मुकाबले इतनी बड़ी बढ़त दिखाने वाली यह पहली दवा है।
हालांकि, समय के साथ इस दवा का असर कम होने लगता है, लेकिन मरीजों ने कीमोथेरेपी ग्रुप की तुलना में इसका इस्तेमाल काफी लंबे समय तक किया।













