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‘वन नेशन वन इलेक्शन’ से हर साल बचेंगे 7 लाख करोड़ रुपए

जेपीसी को उम्मीद, सदस्य और संसद राष्ट्रीय हित में करेंगे काम

by Blitzindiamedia
June 6, 2026
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विनोद शील

नई दिल्ली। ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के प्रस्ताव पर विचार-विमर्श कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा है कि लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाने चाहिए। ऐसा करने पर देश को हर साल सात लाख करोड़ रुपये की बचत हो सकती है एवं इससे देश की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 1.6 प्रतिशत का इजाफा होगा और अर्थशास्त्रियों का भी यही मत है।

उन्होंने कहा, ‘‘इस राशि का इस्तेमाल बुनियादी ढांचा विकास, गरीबों के कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और अन्य जन कल्याणकारी कार्यों के लिए किया जा सकता है।’’

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जेपीसी में कुल 39 सदस्य हैं जिसमें 27 लोकसभा और 12 राज्यसभा से हैं। इस माह के तीसरे सप्ताह में जेपीसी अध्यक्ष पी.पी. चौधरी की अध्यक्षता में समिति के सदस्यों ने विभिन्न राज्यों (जैसे- गुजरात और कर्नाटक) का दौरा किया था। इस दौरान समिति ने राजनीतिक दलों, कानूनी विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों के साथ विचार-विमर्श किया। चौधरी ने गुजरात के मुख्य सचिव को ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ प्रस्ताव के संबंध में सभी विभागों से प्राप्त सुझावों पर एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया है। गुजरात राज्य मजबूती से ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की अवधारणा का समर्थन करता है। परामर्श स्थल के रूप में गुजरात का महत्व सिर्फ इसलिए नहीं बल्कि इसलिए भी है क्योंकि यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन के विजन से गहराई से मेल खाता है।

यह विजन केंद्रीकृत दक्षता, निर्बाध प्रशासन, निरंतर निष्पादन और कम से कम अड़चनों पर आधारित है। समिति ने गांधीनगर की गिफ्ट सिटी में नौकरशाहों, मुख्य सचिव एमके दास, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पदाधिकारियों और विभिन्न विभागों के सचिवों के साथ बैठक की थी। बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में जेपीसी अध्यक्ष और भाजपा सांसद चौधरी ने बताया कि राज्य सरकार के अधिकारियों ने विस्तृत प्रस्तुति दी और कई ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रकाश डाला गया जिन पर पहले विचार नहीं किया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘चर्चा बेहद सकारात्मक और रचनात्मक रही। हमने उन्हें एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया जिसे बाद में देश भर की अन्य राज्य सरकारें एक आदर्श के रूप में अपना सकती हैं ताकि वे अपनी रिपोर्ट उसी प्रारूप में सौंपें।’’ चौधरी ने कहा कि रिपोर्ट में उद्योगों, उत्पादन हानि, श्रम प्रवासन, रोजगार, जीएसटी संग्रह, अर्थव्यवस्था, पर्यटन और शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव का व्यापक आकलन होना चाहिए। उल्लेखनीय है कि चौधरी की अध्यक्षता में संसदीय समिति एक साथ चुनाव कराने से संबंधित दो प्रस्तावित कानूनों- संविधान (129वां संशोधन) विधेयक और केंद्र-शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक पर विचार कर रही है।

छह पूर्व प्रधान न्यायाधीश भी पक्ष में

भाजपा नेता ने चुनाव सुधार प्रक्रिया शुरू करने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देते हुए कहा कि केंद्र ने इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में इस मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए एक समिति का गठन किया था। चौधरी ने कहा कि जेपीसी के सदस्य भी एक साथ चुनाव कराने के तरीकों पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत के छह पूर्व प्रधान न्यायाधीशों ने समिति को बताया है कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ से संघीय संरचना, मूल संरचना या मौलिक अधिकारों के संबंध में किसी भी तरह का उल्लंघन नहीं होता है।

एक साथ चुनाव पर बड़ी सिफारिश

उन्होंने कहा, ‘‘समिति ने लगभग 18,000 पन्नों की एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है। चौधरी ने बताया कि सिफारिशों के अनुसार, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होने चाहिए जबकि पंचायतों और नगरपालिकाओं के चुनाव संसदीय और विधानसभा चुनावों के 100 दिनों के भीतर पूरे हो जाने चाहिए। चौधरी ने कहा, ‘‘इस सुधार से लगातार चुनाव कराने की आवश्यकता नहीं होगी और सरकारों को शासन, विकास, गरीबी उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और समग्र राष्ट्रीय प्रगति के लिए अधिक समय और संसाधन लगाने का अवसर मिलेगा।’’ उन्होंने कहा कि समिति विस्तृत अध्ययन कर रही है और उन्हें विश्वास है कि इसके सदस्य और संसद, दोनों ही दलीय राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित में काम करेंगे।

अवधारणा राष्ट्रीय हित में

संवाददाताओं से चौधरी ने कहा कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की अवधारणा राष्ट्रीय हित में है और इसे कई संस्थाओं और समितियों का समर्थन हासिल है। उन्होंने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय के मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले भारतीय विधि आयोग ने भी कहा है कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होने चाहिए।’’ चौधरी ने कहा कि नीति आयोग ने भी अपने लेखों में एक साथ चुनाव कराने की वकालत की है जबकि विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों वाली संसद की स्थायी समिति ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।

सहमति बनाने के लिए राज्यों का दौरा जारी

उन्होंने बताया कि समिति गुजरात पहुंचने से पहले महाराष्ट्र, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और कर्नाटक का दौरा कर चुकी है। चौधरी ने कहा, ‘‘हमारा प्रयास सभी की बात सुनना और सभी दृष्टिकोणों को ध्यान में रखना है। जब हम संसद को अपनी सिफारिशें सौंपेंगे, तो हमारा प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी हितधारकों के बीच व्यापक सहमति बनी हो।’’

कब-कब हुए एक साथ चुनाव

आजादी के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही हुए थे लेकिन 1968 और 1969 में कई विधानसभाएं समय से पहले ही भंग कर दी गईं। उसके बाद दिसंबर, 1970 में लोकसभा भी भंग कर दी गई। इस वजह से एक देश-एक चुनाव की परंपरा टूट गई।

रिपोर्ट/कंसोलिडेटेड सब्मिशन कब?

जेपीसी को रिपोर्ट 2026 के मानसून सेशन के आखिरी सप्ताह के पहले दिन तक प्रस्तुत करनी है। रिपोर्ट में सभी कंसलटेशंस, प्रेजेंटेशंस और मीटिंग के इनपुट्स को इकट्ठा करके सिफारिशें दी जाएंगी। अभी कोई फाइनल डेडलाइन या सब्मिशन डेट पब्लिश नहीं हुई है। जेपीसी की रिपोर्ट के बाद संसद में आगे चर्चा/वोटिंग होगी।

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