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वैश्विक बाजारों से जुड़ता नया भारत

by ब्लिट्ज़ इंडिया
December 20, 2025
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। भारत अपनी व्यापार नीति को नए सिरे से परिभाषित करते हुए वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका को लगातार मजबूत कर रहा है। इसी दिशा में किए जा रहे मुक्त व्यापार समझौते आज भारत के निर्यात, उद्योग, निवेश और रोजगार सृजन के लिए एक प्रभावी रणनीतिक औजार बन चुके हैं। दिसंबर 2025 में हस्ताक्षरित भारत–ओमान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (सीईपीए) इसी बदलती व्यापार सोच का ताजा उदाहरण है।
एफटीए का मूल उद्देश्य
मुक्त व्यापार समझौता दो देशों के बीच ऐसा करार होता है, जिसके तहत आपसी व्यापार पर कस्टम ड्यूटी को कम या समाप्त कर दिया जाता है। इससे एक देश का उत्पाद दूसरे देश में अधिक सस्ता, प्रतिस्पर्धी और आसानी से उपलब्ध हो जाता है। आज के आधुनिक एफटीए केवल शुल्क कटौती तक सीमित नहीं हैं। इनमें सेवाओं का व्यापार, निवेश सुरक्षा, व्यापार प्रक्रिया को सरल बनाना, लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन और बौद्धिक संपदा जैसे विषय भी शामिल होते हैं।भारत के लिए एफटीए का उद्देश्य है—निर्यात बढ़ाना, घरेलू उद्योग को बढ़ावा देना, विदेशी निवेश आकर्षित करना और ‘मेक इन इंडिया’ व विकसित भारत @2047 जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को गति देना।
भारत–ओमान सीईपीए : खाड़ी क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त
भारत और ओमान के बीच हुआ सीईपीए समझौता भारत को खाड़ी और पश्चिम एशिया के बाजारों से जोड़ने वाला एक अहम पुल बनकर उभरा है। इस समझौते के तहत:
ओमान ने भारत के 98 प्रतिशत से अधिक उत्पादों पर शून्य आयात शुल्क की सुविधा दी है
भारत ने भी ओमान के लगभग 78 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क में कटौती की है
डेयरी जैसे कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा गया है।
वर्तमान में भारत–ओमान द्विपक्षीय व्यापार लगभग 10.6 अरब डॉलर का है। सरकार और उद्योग जगत का अनुमान है कि इस समझौते के बाद अगले दो से तीन वर्षों में भारत के निर्यात में करीब 2 अरब डॉलर की वृद्धि हो सकती है।
लाभकारी क्षेत्र
भारत–ओमान समझौते से कई प्रमुख क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनमें शामिल हैं—
रत्न और आभूषण, वस्त्र उद्योग, दवा क्षेत्र, ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्योग।
इसके साथ ही, सेवाओं के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खुल रही हैं। स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, प्रोफेशनल सेवाएं, पर्यटन और बिजनेस सपोर्ट सेवाओं में भारत की भागीदारी बढ़ने की संभावना है।
ओमान की भौगोलिक स्थिति भी रणनीतिक रूप से अहम है, जो उसे खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया के लिए एक लॉजिस्टिक्स और री-एक्सपोर्ट हब बनाती है।
भारत के अब तक के एफटीए: एक व्यापक नेटवर्क
ओमान समझौते के साथ भारत अब तक 17 मुक्त व्यापार और व्यापक व्यापार समझौते कर चुका है। इनमें कुछ समझौते एकल देशों के साथ हैं, जबकि कुछ क्षेत्रीय समूहों के साथ किए गए हैं। भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में आसियान के 10 देश, यूरोप का ईएफटीए समूह, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड, श्रीलंका, भूटान और मॉरीशस शामिल हैं। इन समझौतों के जरिए भारत को दर्जनों देशों के बाजारों तक विशेष व्यापारिक पहुंच प्राप्त हुई है।
भविष्य के एफटीए
भारत फिलहाल 9 बड़े व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है। इनमें यूरोपीय संघ, अमेरिका, न्यूज़ीलैंड, चिली, पेरू, यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के साथ उन्नत समझौते तथा श्रीलंका के साथ गहन आर्थिक सहयोग शामिल हैं।
सरकार का जोर इस बात पर है कि नए समझौते भारतीय उद्योगों और रोजगार के लिए ठोस और दीर्घकालिक लाभ लेकर आएं।
व्यापार जगत का फायदा
मुक्त व्यापार समझौते व्यापारियों को नए बाज़ार देते हैं, उद्योगों की लागत कम करते हैं और उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प उपलब्ध कराते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर ये समझौते निर्यात विविधीकरण, आर्थिक स्थिरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूती प्रदान करते हैं।
भारत के एफटीए अब केवल व्यापारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की विकास नीति का अहम स्तंभ बन चुके हैं। भारत–ओमान सीईपीए यह स्पष्ट संकेत देता है कि भारत अब सोच-समझकर, अपने हितों की रक्षा करते हुए और वैश्विक अवसरों का लाभ उठाते हुए आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में यही समझौते भारत को वैश्विक व्यापार मंच पर और अधिक सशक्त बनाएंगे।

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