• Latest
  • Trending

यूजीसी, एआईसीटीई-एनसीटीई का विलय

December 20, 2025
दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026

बारिश लौटी, बुवाई अब भी पीछे

August 10, 2026
आयुष्मान भारत योजना

70 पार हैं तो इलाज का हक़ अलग

August 10, 2026
student

चार साल की डिग्री, तो पीजी एक साल में

August 10, 2026
ev-scooter

हर नौवाँ स्कूटर बैटरी वाला

August 10, 2026
boxing

बॉक्सिंग में सात गोल्ड, अब आगे

August 10, 2026
student

अब सर्टिफ़िकेट पर नहीं, नौकरी पर पैसा

August 10, 2026
Makhana

दरभंगा का मखाना, अब जहाज़ से ऑस्ट्रेलिया

August 10, 2026
पीएम-किसान अब 2031 तक चलेगी

बारिश 11 फ़ीसदी कम, अब क्या करें

August 10, 2026
ई20 पेट्रोल से इंजन खराब नहीं होते: गडकरी

E20 पेट्रोल: जाँच में क्या निकला

August 10, 2026
milk

गाँव की समिति अब डिजिटल हो रही है

August 10, 2026
gale cricket stedium

गॉल से शुरुआत, और दो बड़े झटके

August 10, 2026
E20 पेट्रोल

ई20: आत्मनिर्भर भारत की नई क्रांति

August 10, 2026
Tuesday, August 11, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

यूजीसी, एआईसीटीई-एनसीटीई का विलय

अब कहलाएंगे विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान

by ब्लिट्ज़ इंडिया
December 20, 2025
in the blitz
0

YOU MAY ALSO LIKE

बारिश लौटी, बुवाई अब भी पीछे

70 पार हैं तो इलाज का हक़ अलग

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। सरकार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई), राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) का विलय करेगी। इसे विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (वीबीएसए) कहा जाएगा। पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी के बाद संबंधित विधेयक को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लोकसभा में पेश किया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत तैयार विधेयक के संसद में पारित होते ही उच्च शिक्षा के कामकाज का स्वरूप बदल जाएगा। विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान के अध्यक्ष का चयन राष्ट्रपति करेंगे। इसके तहत तीन स्वतंत्र स्तंभ होंगे, जिसमें रेगुलेटरी काउंसिल का नाम विकसित भारत शिक्षा विनियम परिषद, एक्रीडिटेशन काउंसिल का नाम विकसित भारत शिक्षा गुणवत्ता परिषद और स्टैंडर्ड काउंसिल का नाम विकसित भारत शिक्षा मानक परिषद होगा। इससे कामकाज में तेजी और पारदर्शिता आएगी, गुणवत्ता में सुधार होगा। आईआईटी और आईआईएम भी इसके दायरे में लाए गए हैं। अभी तक आईआईटी और आईआईएम यूजीसी, एआईसीटीई में शामिल नहीं होते थे।
समान रूप से लागू होंगे नियम
विधेयक के नियम सभी प्रकार के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों पर लागू होंगे। इसमें ओपन और डिस्टेंस लर्निंग, ऑनलाइन शिक्षा और डिजिटल शिक्षा संस्थान भी शामिल हैं। अभी सामान्य विश्वविद्यालयों का विनियमन यूजीसी करता है जबकि तकनीकी शिक्षा कॉलेजों के लिए एआईसीटीई व शिक्षक शिक्षा का विनियमन एनसीटीई करता है।
वीबीएसए तीनों परिषदों के साथ
समन्वय के लिए जिम्मेदार
विनियमन, प्रत्यायन और मानकों को सुनिश्चित करने के लिए वीबीएसए तीन परिषदों के साथ समन्वय करेगी।
ये होंगे तीन परिषद- विकसित भारत शिक्षा मानक परिषद (नियामक परिषद), विकसित भारत शिक्षा गुणवत्ता परिषद (मान्यता परिषद) और विकसित भारत शिक्षा मानक परिषद (मानक परिषद)। नियामक परिषद उच्च शिक्षा के लिए सामान्य नियामक के रूप में कार्य करेगी, जबकि प्रत्यायन परिषद स्वतंत्र प्रत्यायन प्रणाली की निगरानी और देखरेख करने वाली प्रत्यायन संस्था होगी। मानक परिषद शैक्षणिक मानक निर्धारण के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी।
जुर्माना 10 लाख से 75 लाख तक
नियामक परिषद को अधिनियम या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों या विनियमों के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना लगाने का अधिकार होगा। जुर्माना 10 लाख से लेकर 75 लाख रुपये तक हो सकता है।
आयोग या राज्य सरकार की अनुमति के बिना उच्च शिक्षा संस्थान स्थापित करने पर 2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
नियामक परिषद के पास विश्वविद्यालय के अलावा किसी भी मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षा संस्थान को उसके द्वारा निर्दिष्ट तरीके से डिग्री प्रदान करने के लिए अधिकृत करने की शक्ति भी होगी।
तीनों परिषदों की अध्यक्षता संबंधित अध्यक्ष करेंगे, जिनका प्रोफेसर का अनुभव कम से कम 10 वर्ष होगा।
तीन साल के लिए होगी अध्यक्षों की नियुक्ति, परिषद में 14 सदस्य
अध्यक्ष की नियुक्ति तीन वर्ष की अवधि के लिए होगी, जिसे पांच वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। इन परिषदों में 14 सदस्य होंगे।
अध्यक्ष और परिषद के अन्य सदस्यों की नियुक्ति, पदेन सदस्यों व सदस्य-सचिव को छोड़कर केंद्र सरकार की चयन समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति करेंगे।
कर्तव्य में लापरवाही बरतने पर राष्ट्रपति के पास अध्यक्ष, विभिन्न परिषदों के अध्यक्ष और उनके सदस्यों को हटाने का अधिकार होगा।
आयोग और परिषदें अपने कर्तव्यों के निर्वहन में असमर्थ होती हैं, तो केंद्र के पास उन्हें निरस्त करने का अधिकार होगा।

ShareTweetSend

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation