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पाकिस्तान में पढ़ाई जाएगी महाभारत-गीता, पहली बार गूंजे श्लोक

प्रोफेसर बोले- हमें संस्कृत को अपनाना होगा

by ब्लिट्ज़ इंडिया
December 20, 2025
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।पाकिस्तान के कॉलेजों में संस्कृत के श्लोक गूंज रहे हैं। स्टूडेंट्स को संस्कृत की ट्रेनिंग दी जा रही है। पूरे इलाके में दर्शन, साहित्य और आध्यात्मिक पंरपराओं को नया आकार दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में स्टूडेंट्स महाभारत और गीता पढ़ेंगे। 1947 विभाजन के बाद यह पहली बार है जब पाकिस्तान में संस्कृत पढ़ाने की पहल की गई है।
पाकिस्तान में संस्कृत की पढ़ाई
किसने शुरू की?
पाकिस्तान की लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज (एलयूएमएस) के गुरमानी सेंटर के डायरेक्टर डॉ. अली उस्मान कासमी और फॉर्मन क्रिश्चियन कॉलेज में सोशियोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर शाहिद रशीद ने संस्कृत पढ़ाने की शुरुआत की है। इन्होंने भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद पहली बार अपने देश में संस्कृत की पढ़ाई शुरू की है।
मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, एसोसिएट प्रोफेसर शाहिद रशीद ने पाकिस्तान में संस्कृत की पढ़ाई शुरू करने को छोटा लेकिन अहम कदम बताया है, जिससे पूरे इलाके में दर्शन, साहित्य और आध्यात्मिक परंपराओं को नया आकार दिया जा रहा है।
पाकिस्तान में संस्कृत पढ़ाने
की शुरुआत कैसे हुई?
इसके पीछे कई महीनों की कोशिश है। इसकी नींव रखने के लिए तीन महीने तक एक वीकेंड वर्कशॉप चलाई गई, जिसमें स्टूडेंट्स, स्कॉलर्स और भाषा में रुचि रखने वाले लोगों को बुलाया गया। संस्कृत को लेकर उत्सुकता और भागीदारी पर जोर दिया गया। कॉलेज प्रशासन को यह सोचने पर मजबूर किया गया कि संस्कृत को रेगुलर सिलेबस में जगह मिलने चाहिए। तब जाकर पाकिस्तान में पहली बार संस्कृत की पढ़ाई शुरू हो रही है।
महाभारत-गीता पढ़ेंगे स्टूडेंट्स
आने वाले दिनों में पाकिस्तान के कॉलेज में महाभारत, भगवद्गीता और सुबोध पद्य को गंभीरता व सम्मान के साथ पढ़ाया जाएगा। एलयूएमएस महाभारत और गीता पर नए कोर्स शुरू करने की तैयारी कर रहा है। डायरेक्टर डॉ. कासमी ने कहा, ‘उम्मीद है इससे मोमेंटम बनेगा। 10-15 साल में हम पाकिस्तान में रहने वाले महाभारत और गीता के स्कॉलर्स देख सकते हैं।’
एसोसिएट प्रोफेसर शाहिद रशीद लंबे समय से संस्कृत पढ़ने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने खुद संस्कृत पढ़ी है। मीडिया को दिए इंटरव्यू में प्रोफेसर ने कहा, ‘मैं उनसे (जो संस्कृत पढ़ने पर सवाल उठाते हैं) कहता हूं, हमें इसे क्यों नहीं सीखना चाहिए। यह पूरे इलाके को जोड़ने वाली भाषा है। संस्कृत के व्याकरणविद पाणिनि का गांव (शलातुरा) इसी इलाके में था। हमें इसे अपनाना होगा। यह हमारी भी है, यह किसी एक खास धर्म से बंधी नहीं है।
संस्कृत से लिए उर्दू के कई शब्द
प्रोफेसर रशीद ने आगे बताया कि वे ज्यादातर संस्कृत व्याकरण पढ़ाते हैं और जब वे श्लोक पढ़ाते हैं तो उनके बहुत से स्टूडेंट्स इस बात से हैरान रह जाते हैं कि उर्दू के इतने सारे शब्द संस्कृत से लिए गए हैं। वे कहते हैं, ‘कई तो यह तक नहीं जानते थे कि संस्कृत हिंदी से अलग है। पहले उन्हें यह मुश्लिक भाषा लगी लेकिन एक बार लॉजिकल स्ट्रक्चर समझने के बाद उन्हें यह पसंद आने लगी।
पाकिस्तान में संस्कृत से जुड़ी धरोहर
वहीं डॉ. उस्मान कासमी का कहना है कि पाकिस्तान में संस्कृत से जुड़ी धरोहर बहुत समृद्ध है। संस्कृत की कई ताड़ के पत्तों पर लिखी पांडुलिपियों को 1930 के दशक में प्रसिद्ध विद्वान जेसीआर वूलनर ने सूचीबद्ध किया था, जो देश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है लेकिन बंटवारे के बाद किसी का इस पर ध्यान नहीं गया।
अब स्कॉलर्स और स्टूडेंट्स को संस्कृत में ट्रेनिंग देने की पहल शुरू हो चुकी है।

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