ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। भारत व अमेरिका एक अंतरिम ट्रेड डील पर मुहर लगाने के बेहद करीब पहुंच गए हैं। एक ऐसी डील जो दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच कारोबार का नक्शा बदल सकती है। बातचीत निर्णायक दौर में पहुंच चुकी। डील को दोनों पक्ष ऐतिहासिक बता रहे हैं। जून के आखिर में मंत्री स्तर की गहन बातचीत हुई, और अब मकसद है कि 24 जुलाई के आसपास अमेरिका का बेस टैरिफ खत्म होने से पहले इस नाज़ुक ढांचे को एक पक्क ी अंतरिम डील में बदल दिया जाए। समय रहते डील हो गई तो एक साल से भारतीय एक्सपोर्टर्स पर मंडरा रहा अनिश्चितता का बादल छंट जाएगा।
डील में है क्या?
खाका लगभग तैयार है। अमेरिका ने भारतीय सामान पर अपना टैरिफ 25 से घटाकर 18 फीसदी करने पर हामी भरी है और रूसी तेल की खरीद घटाने के भारत के कदम को देखते हुए 25 फीसदी का एक अतिरिक्त टैरिफ भी हटाया जा रहा है। बदले में भारत तमाम अमेरिकी इंडस्टि्रयल सामान पर टैक्स घटाएगा और कुछ चुनिंदा खेती के प्रोडक्ट के लिए बाज़ार खोलेगा। साथ ही भारत का बड़ा वादा है — अगले पांच साल में करीब 500 अरब डॉलर की अमेरिकी एनर्जी, विमान, टेक्नोलॉजी और कोकिंग कोल खरीदना।
भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए दांव सीधा और बड़ा है। टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, फार्मा, इंजीनियरिंग सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स, इन सबका सबसे बड़ा बाजार अमेरिका है और कम व तयशुदा टैरिफ उन्हें वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिद्वंद्वियों के बराबर मुकाबले में ला देगा। किसी एक खेप की कीमत से भी बढ़कर, एक पक्क ी डील वह चीज देती है जो कारोबारी सबसे ज़्यादा चाहते हैं, निश्चितता यानी लंबे कॉन्ट्रैक्ट साइन करने और नई क्षमता में निवेश करने का भरोसा।
मौका बहुत बड़ा है। दोनों देशों के बीच आज करीब 190 अरब डॉलर का कारोबार है और दोनों सरकारों ने मिलकर एक लक्ष्य रखा है ‘मिशन 500’ यानी 2030 तक इसे 500 अरब डॉलर तक ले जाना।
अंतरिम टैरिफ समझौता उस मंजिल की तरफ पहला जरूरी कदम है, जो सामान, सेवाओं और निवेश में उस रफ्तार को खोल देगा जिसे अनिश्चितता ने रोक रखा है।
किसानों हितों पर भारत दृढ़
भारत के वार्ताकारों ने छोटे किसानों के हितों की पूरी रक्षा की है, डेयरी, चावल, गेहूं और कई संवेदनशील चीजों को अंतरिम डील से बाहर रखा गया है। यह समझदारी भरा क़दम है, क्योंकि भारत की ज्यादातर खेती छोटी जोतों पर होती है, जो सस्ते और सब्सिडी वाले आयात की बाढ़ नहीं झेल सकतीं। बाकी सवाल, खेती में पहुंच और डिजिटल ट्रेड के नियम, ऐसे हैं जो टकराव नहीं, बल्कि धैर्य भरी बातचीत से सुलझते हैं और दोनों राजधानियों ने माहौल सकारात्मक बनाए रखा है।
असली रणनीतिक इनाम
इस अंतरिम डील को एक बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौते की पहली किस्त समझना चाहिए, जिसे दोनों पक्ष इसी साल के आख़िर तक पूरा करना चाहते हैं। ऐसे दौर में जब व्यापार और रणनीतिक रिश्ते एक-दूसरे से जुड़ चुके हैं, दो बड़े लोकतंत्रों का पास आना टैरिफ से कहीं आगे की कीमत रखता है, मजबूत सप्लाई चेन, गहरा निवेश, और बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत के लिए पक्क ी जगह। दोनों ओर की सद्भावना और साझेदारी के तर्क के साथ, यह पखवाड़ा एक लंबी दोस्ती को टिकाऊ और फायदेमंद रिश्ते में बदलने का सच्चा मौका देता है।
एक नजर में
भारत पर यूएस टैरिफ: 25% से घटकर 18%; अतिरिक्त 25% भी हटेगा।
भारत का वादा: 5 साल में ~$500 अरब की यूएस एनर्जी, विमान, टेक व कोकिंग कोल की खरीद ।
सुरक्षित: डेयरी, चावल, गेहूं और संवेदनशील खेती डील से बाहर।
डेडलाइन: यूएस बेस टैरिफ ~24 जुलाई 2026 को खत्म।














