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राष्ट्रपति बना तो एच-1बी वीजा खत्म कर दूंगा : रामास्वामी

by ब्लिट्ज़ इंडिया
September 25, 2023
in न्यूज ट्रैक
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ललित दुबे

वाशिंगटन। इस बार अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए अगर किसी उम्मीदवार के नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है तो वह भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी हैं। एफबीआई जैसी संस्थाओं को बंद करने का बयान देने के बाद एक बार फिर उन्होंने चौंकाने वाली बात कही है। उन्होंने एच-1बी वीजा कार्यक्रम को ‘गिरमिटिया दासता’ का एक रूप बताया। उन्होंने कहा कि वे लॉटरी आधारित इस व्यवस्था को बंद कर देंगे। वे अगर चुनाव जीतते हैं तो वे इसके स्थान पर मेरिटोक्रेटिक व्यवस्था कायम करेंगे। बता दें कि उनका ये बयान तब आया है जबकि उन्होंने खुद 29 बार एच-1बी वीजा प्रोग्राम का इस्तेमाल किया है।

रामास्वामी मे कहा कि एच-1 वीजा प्रणाली केवल उस कंपनी को लाभ देता है जिसने एच-1 बी अप्रवासी को प्रायोजित किया था। अमेरिका को श्रृंखला-आधारित प्रवासन को समाप्त करने की आवश्यकता है। मैं इसे खत्म कर दूंगा। अमेरिका में लॉटरी आधारित इस व्यवस्था को मेरिटोक्रेटिक एंट्री से बदलने की जरूरत है। जो लोग परिवार के सदस्यों के रूप में आते हैं, वे योग्यता आधारित आप्रवासी नहीं हैं जो इस देश में कौशल-आधारित योगदान देते हैं।
पोलिटिको की रिपोर्ट के अनुसार, 2018 से 2023 तक अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवाओं ने एच-1बी वीजा के तहत कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए रामास्वामी की पूर्व कंपनी रोइवंत साइंसेज के लिए 29 आवेदनों को मंजूरी दी है। बावजूद इसके उन्होंने कहा कि एच-1बी वीजा प्रणाली इसमें शामिल सभी लोगों के लिए खराब है। बता दें कि रामास्वामी ने फरवरी 2021 में रोइवंत में अपने सीओओ का पद छोड़ दिया था, हालांकि इस साल फरवरी तक वे कंपनी के निदेशक मंडल के अध्यक्ष बने रहे थे।

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जब उनसे रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नीतिगत रुख के बारे में पूछा गया तो उनकी प्रेस सचिव ट्रिसिया मैकलॉघलिन ने कहा कि एक नीति निर्माता की भूमिका में वह करना उनका उद्देश्य है जो समग्र रूप से देश के लिए सही है। विवेक का मानना है कि अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र की देखरेख करने वाले नियम बुरी तरह टूट गए हैं उन्हें ठीक करने की जरूरत है।

यह है एच-1बी वीजा

एच-1बी वीजा एक गैर-आप्रवासी वीजा है, जो अमेरिकी कंपनियों को विदेशी श्रमिकों को विशेष व्यवसायों में नियुक्त करने की अनुमति देता है। प्रौद्योगिकी कंपनियां भारत और चीन जैसे देशों से हर साल हजारों कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए इस पर निर्भर हैं। अमेरिका की सरकार हर साल विभिन्न कंपनियों को 65-85 हजार एच-1बी वीजा उपलब्ध कराती है जिनकी मदद से कंपनियां विदेशों से स्किल्ड कामगारों को नौकरी दे सकती हैं। इनके अतिरिक्त एडवांस डिग्रीधारकों के लिए अमेरिकी सरकार की ओर से 20 हजार अतिरिक्त वीजा कंपनियों को दिए जाते हैं। यह वीजा 3 साल के लिए मान्य होता है और इसे अगले तीन सालों के लिए रिन्यू कराया जा सकता है। वित्तीय वर्ष 2022 में अमेरिका सरकार की ओर से आंकड़ों के अनुसार वहां के कुल एच-1बी वीजाधारकों में से 73 प्रतिशत यानी लगभग 4,42,000 वीजा भारतीय मूल के लोगों को ही जारी किए गए हैं।

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