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हरियाणा पराली योजना 2026: किसानों को ₹1200 प्रति एकड़

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हरियाणा ने प्रदूषण नियंत्रण और भूमि की उपजाऊ क्षमता बढ़ाने को बनाया मिशन

पराली प्रबंधन के लिए प्रति एकड़ मिलेगी ₹1200 की सब्सिडी

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 13, 2026
in कृषि
0
हरियाणा पराली योजना 2026: किसानों को ₹1200 प्रति एकड़

ब्लिट्ज ब्यूरो

चंडीगढ़। धान की कटाई के बाद खेतों में बची हुई पराली को जलाने से होने वाले भारी वायु प्रदूषण को रोकने और मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बचाने के लिए हरियाणा सरकार ने पराली प्रबंधन योजना शुरू की है।

इस योजना के तहत जो किसान पराली को खेत में जलाने के बजाय उसका उचित प्रबंधन मशीनरी के माध्यम से करेंगे, उन्हें सरकार की ओर से ₹1,200 प्रति एकड़ की नकद प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। सबसे अच्छी बात यह है कि खरीफ 2026 सीजन के लिए इस योजना का आवेदन पूरी तरह से ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ (एमएफएमबी) पोर्टल के साथ जोड़ दिया गया है।

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योजना का नाम है हरियाणा पराली अवशेष प्रबंधन योजना 2026।

वित्तीय प्रोत्साहन (सब्सिडी) ₹1,200 प्रति एकड़ (सीधे बैंक खाते में)।

योग्य फसल धान

आवेदन पोर्टल फसल.हरियाणा.जीओवी. इन (एमएफएमबी) प्रबंधन के विकल्प इन सिटू (खेत के अंदर) या एक्स- सिटू (खेत के बाहर)।

“इन सिटू” और “एक्ससीटू” पराली प्रबंधन क्या है?

ऑनलाइन फॉर्म भरते समय पोर्टल आपसे पूछेगा कि आप पराली का प्रबंधन कैसे करेंगे (इन सिटू या एक्स सिटू) सब्सिडी का लाभ लेने के लिए आपको इनका सही अर्थ पता होना चाहिए।

इन सिटू: जीरो टिल ड्रिल या रोटावेटर जैसी कृषि मशीनों का उपयोग करके पराली को बारीक काटकर मिट्टी में दबा देते हैं।
फायदे: यह पराली खेत में सड़कर प्राकृतिक खाद (जैविक कार्बन) बन जाती है, जिससे आने वाली फसल (जैसे गेहूं) की पैदावार बढ़ती है और यूरिया/डीएपी की जरूरत कम होती है।

एक्स सिटू मैनेजमेंट

अर्थ: पराली को खेत से बाहर निकालकर बेचना या उपयोग करना।

कैसे होता है: किसान स्ट्रॉ बेलर मशीन का उपयोग करके पराली के टाइट गट्ठर (बेल्स) बना लेते हैं।

हरियाणा पराली योजना 2026: किसानों को ₹1200 प्रति एकड़
फायदे: खेत अगली फसल के लिए जल्दी और पूरी तरह साफ हो जाता है। इन गट्ठरों को बायोमास प्लांट, एथेनॉल प्लांट, गत्ता फैक्ट्रियों या गौशालाओं में बेचकर किसान अतिरिक्त कमाई भी कर सकते हैं।

ऑनलाइन आवेदन कैसे करें

ध्यान दें: पराली प्रबंधन योजना (₹1,200/एकड़) का लाभ लेने के लिए कोई अलग से फॉर्म नहीं भरा जाता है। किसानों को अपनी फसल का विवरण देते समय ही इसका चयन करना होता है। खरीफ फसलों के संपूर्ण पंजीकरण के लिए आप सीधे ‘मेरी फसल, मेरा ब्योरा’ रजिस्ट्रेशन खरीफ 2026 पर जाकर अपना फॉर्म सबमिट कर सकते हैं।

चूंकि 2026 में पोर्टल के नियमों में बदलाव हुआ है, इसलिए फॉर्म भरने से पहले अन्य काश्तकार (ठेके की जमीन) और भूमि प्रोफाइल तैयार करने की पूरी प्रक्रिया को अच्छे से समझ लें ताकि आपका आवेदन प्रशासनिक स्तर पर रिजेक्ट न हो।

फॉर्म भरते समय इस योजना को क्लेम करने के मुख्य स्टेप्स इस प्रकार हैं:
अगर आप पहले से ही खरीफ 2026 सीज़न के लिए रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं, तो ₹1,200 प्रति एकड़ का प्रोत्साहन पाने के लिए आवेदन करना बेहद आसान है। इन चरणों का ठीक से पालन करें:

चरण 1: लॉगिन करें और ज़मीन की प्रोफ़ाइल तैयार करें।

  • आधिकारिक ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर जाएं: fasal.haryana.gov.in पर विजिट करें।
  • लॉगिन और वेरिफिकेशन: अपनी फैमिली आईडी (पीपीपी) या [Aadhaar Redacted] का इस्तेमाल करके लॉगिन करें और ओटीपी के जरिए वेरिफ़ाई करें।
  • ज़मीन का विवरण भरें: अपना ज़िला, तहसील, गांव, मुरब्बा और किला नंबर चुनकर ज़मीन जोड़ने का चरण पूरा करें।
  • फसल रजिस्ट्रेशन सेक्शन (चरण 2): एक बार ज़मीन जुड़ने के बाद “फसल का विवरण भरें” (क्रॉप डिटेल) पर क्लिक करें, ‘कृषि फ़सल’ श्रेणी चुनें और मुख्य फ़सल के तौर पर ‘धान’ को सिलेक्ट करें।
  • पराली प्रबंधन का विकल्प (चरण 3): धान की किस्म डालते समय नीचे स्क्रॉल करें और “पराली अवशेष प्रबंधन” सेक्शन में जाएं। यहाँ सब्सिडी का दावा करने के लिए अपना सही विकल्प चुनें (जैसे: मिट्टी में मिलाना या गांठें/बेल्स बनाना)।

सबसे अच्छी बात यह है कि खरीफ 2026 सीजन के लिए इस योजना का आवेदन पूरी तरह से ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ (एमएफएमबी) पोर्टल के साथ जोड़ दिया गया है।

ज़रूरी बात: इस सेक्शन को छोड़ें नहीं या खाली न छोड़ें। अगर आप कोई विकल्प नहीं चुनते हैं, तो कृषि विभाग यह मान लेगा कि आप इसमें हिस्सा नहीं लेना चाहते हैं, और ₹1,200/एकड़ की सब्सिडी आपको नहीं मिलेगी।

चरण 4: अंतिम सबमिशन

अपनी फसल के सभी विवरणों की समीक्षा करें और “सब्मिट” पर क्लिक करें। हर उस ‘किला’ (एकड़) के लिए इस प्रक्रिया को दोहराएं जहां आपने धान लगाया है। अपनी रजिस्ट्रेशन पर्ची का एक प्रिंटआउट ले लें।

फिजिकल वेरिफिकेशन और पैसा
धान की कटाई के सीजन के दौरान कृषि विभाग और प्रशासन द्वारा सैटेलाइट (हरसेक) और फिजिकल वेरिफिकेशन के जरिए खेतों की निगरानी की जाती है।

निरीक्षण विभाग के अधिकारी (एडीओ/पटवारी) आपके रजिस्टर किए गए किल्ला नंबरों पर आकर चेक करेंगे कि आपने पराली को मशीन से मैनेज किया है या उसमें आग लगाई है।

सब्सिडी ट्रांसफर: यदि आपके खेत में आगजनी की कोई घटना नहीं पाई जाती है और प्रबंधन सही मिलता है, तो आपके आधार से जुड़े बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से ₹1,200 प्रति एकड़ की राशि भेज दी जाएगी। यदि खेत में आग लगी पाई गई, तो आवेदन तुरंत रद्द कर दिया जाएगा और जुर्माना भी लग सकता है।

सीएससी ऑपरेटर्स के लिए: किसानों से हमेशा पूछें कि क्या वे कटाई के बाद बेलर या सुपर सीडर का इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं। ‘इन सिटू’ या ‘एक्स-सिटू’ विकल्प को पहले से ही चुन लेने से यह सुनिश्चित होता है कि किसान को प्रति एकड़ मिलने वाला ₹1,200 का बोनस सही समय पर मिल जाए; इससे किसानों का आप पर भरोसा बढ़ता है और वे बार-बार आपके सेंटर पर आते हैं।

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