• Latest
  • Trending
धर्म परिवर्तन पर एट्रोसिटी एक्ट लागू नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

‘इस्लाम अपनाते ही एससी/एसटी एक्ट के तहत मिलने वाली विशेष सुरक्षा खत्म’

July 13, 2026
daily-news

सप्ताह की समीक्षा: रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी, GST नियमों में राहत और रिकॉर्ड रक्षा निर्यात

October 11, 2026
daily-news

14416 पर चार साल में 47.75 लाख कॉल

October 10, 2026
medicine

दवा, कोयला, खादी और व्यापार पर सरकार के नए कदम

October 9, 2026
अर्थव्यवस्था

जीएसटी सुधार, नाविकों की संख्या और भारतनेट का विस्तार

October 9, 2026
यशोभूमि, नई दिल्ली में 10वें इंडिया मोबाइल कांग्रेस के उद्घाटन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, 8 अक्टूबर 2026। श्रेय : पीएमओ (pmindia.gov.in)

किसान के फोन पर किस्त, हर जिले में 5जी

October 8, 2026
यूपीआई और डीपीआई ने बदली भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था

कर्ज महंगा, पर अर्थव्यवस्था 7.1% की रफ्तार पर

October 7, 2026
भारत विकास: वीजा, रक्षा, खेल और ऊर्जा की बड़ी खबरें

भारत विकास: वीजा, रक्षा, खेल और ऊर्जा की बड़ी खबरें

October 6, 2026
भारतीय पायलट के हौसले की इंतहा...!

भारतीय पायलट के हौसले की इंतहा…!

October 5, 2026
jai-shankar

न्यूयॉर्क में दिखी नए भारत की ‘दबंग कूटनीति’

October 5, 2026
संसद का मॉनसून सत्र 2026: हंगामे में बर्बाद हुआ समय और जनता के धन का नुकसान

लोकतंत्र में विपक्ष कितना रचनात्मक

October 5, 2026
अर्थव्यवस्था के नए इंजन: उभरते 100 शहरों में 55 भारतीय

अर्थव्यवस्था के नए इंजन: उभरते 100 शहरों में 55 भारतीय

October 5, 2026
परमार्थ के पथ पर अशोक सिंघल युवा उनके आदर्शों से लें प्रेरणा

परमार्थ के पथ पर अशोक सिंघल युवा उनके आदर्शों से लें प्रेरणा

October 5, 2026
Sunday, October 11, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

‘इस्लाम अपनाते ही एससी/एसटी एक्ट के तहत मिलने वाली विशेष सुरक्षा खत्म’

बॉम्बे हाईकोर्ट कोर्ट का अहम फैसला

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 13, 2026
in वेस्ट
0
धर्म परिवर्तन पर एट्रोसिटी एक्ट लागू नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

ब्लिट्ज ब्यूरो

मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति वृषाली वी जोशी की सिंगल कोल्हापुर बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एक दंपति को ‘एट्रोसिटी एक्ट’ के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया। उन पर उनके ही एक रिश्तेदार ने केस किया था। कोर्ट ने माना कि जब कोई व्यक्ति इस्लाम अपना लेता है तो ‘अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम’ (अत्याचार कानून) के प्रावधान उस पर लागू नहीं होते।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस वृषाली वी. जोशी की बेंच ने पीड़िता का बयान दर्ज किया, जिसमें उसने साफ तौर पर कहा था कि उसके पति मुस्लिम धर्म को मानते हैं, इसलिए शादी के वक्त उसने इस्लाम अपना लिया था और तब से वह मुस्लिम धर्म का पालन कर रही है। उसने ये भी बताया कि धर्म परिवर्तन के बाद उसने अपना नाम भी बदल लिया था।

मामले के तथ्यों के अनुसार, पीड़ित महिला का अपने पति के रिश्तेदारों के साथ संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। साल 2015 में जब उसकी ननद और नंदोई उनके घर रहने आए, तब स्वच्छता बनाए रखने, कम पानी का इस्तेमाल करने और शौचालय को साफ रखने की बात पर उनके बीच तीखी बहस हो गई थी। महिला ने आरोप लगाया था कि रिश्तेदारों ने उसके साथ मारपीट की और उसकी पूर्व जाति को जानते हुए उसे जातिसूचक शब्द कहे।
रिश्तेदारों की तरफ से पेश वकील सत्यव्रत जोशी ने अदालत में दलील दी कि यह एक ही परिवार का सिविल विवाद है और यथास्थिति का आदेश उनके पक्ष में होने के कारण महिला ने झूठी एफआईआर दर्ज कराई है।

YOU MAY ALSO LIKE

मुंबई मेट्रो का महाविस्तार: 6 नए रूट पर 374 किमी में 130 स्टेशन

खटमलों ने उड़ाई अफसरों की नींद

– आरोपी दंपति एट्रोसिटी एक्ट के आरोपों से बरी
– प्राथमिकी में दर्ज अन्य अपराधों के तहत चलता रहेगा मामला

वहीं, अतिरिक्त लोक अभियोजक एसवी गवंड ने भी सुप्रीम कोर्ट के ‘चिंथाडा आनंद’ मामले का हवाला देते हुए सहमति जताई कि धर्म परिवर्तन के बाद महिला एट्रोसिटी एक्ट का लाभ लेने की हकदार नहीं है। भले ही वह धर्म परिवर्तन से पहले अनुसूचित जाति से संबंधित थी। हालांकि, इस पहलू का भारतीय दंड संहिता के तहत अपराधों से जुड़े आरोपों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

हाईकोर्ट की पीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आरोपी दंपति को एट्रोसिटी एक्ट के आरोपों से तो पूरी तरह मुक्त (डिस्चार्ज) कर दिया, लेकिन साफ किया कि प्राथमिकी में दर्ज अन्य अपराधों के तहत उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की अन्य धाराओं के तहत आरोपियों को अदालत में मुकदमे का सामना करना ही होगा।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation