ब्लिट्ज ब्यूरो
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़े फर्जीवाड़े के संकेत मिले हैं। चुनाव से पहले राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की प्रक्रिया हुई थी। अब इसमें जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। साल 2025 में अचानक बड़ी संख्या में बर्थ सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं। उस समय ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी की सरकार थी। इस असामान्य उछाल को देखते हुए बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने पूरे राज्य में सघन जांच के आदेश दे दिए हैं।
पंचायत और नगर पालिकाओं से जब्त होंगे रजिस्टर
इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासन पूरी तरह से एक्शन में है। अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि वे जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों से जुड़े सभी रजिस्टर जब्त कर लें। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नगर पालिकाओं और पंचायतों द्वारा मेंटेन किए गए सभी रजिस्टरों को इकट्ठा किया जा रहा है। डेटा जुटाने के बाद दो से तीन दिनों में ये रजिस्टर स्थानीय निकायों को वापस कर दिए जाएंगे।
बंगाल के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने इस पूरी जांच प्रक्रिया को ‘शुद्धिकरण अभियान’ करार दिया है। असली और फर्जी प्रमाणपत्रों की पहचान करने के लिए अगले तीन से चार महीनों तक इस डेटा की गहराई से जांच की जाएगी।
टेस्ट चेक में सामने आया 1.8 लाख फर्जी सर्टिफिकेट का आंकड़ा
मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल के मुताबिक, एक शुरुआती जांच (टेस्ट चेक) में ही भारी संख्या में फर्जी सर्टिफिकेट मिलने की पुष्टि हुई है। जांचे गए 46,998 ‘डिलेड बर्थ सर्टिफिकेट’ (देरी से बनवाए गए प्रमाणपत्र) में से कम से कम 11,390 फर्जी पाए गए।
वहीं, लगभग 11 लाख 24 हजार डिजिटाइज्ड सर्टिफिकेट्स की जब जांच की गई, तो उनमें से करीब 1 लाख 80 हजार प्रमाणपत्र फर्जी निकले। अकेले दक्षिण 24 परगना के काकद्वीप और दार्जिलिंग के माटीगाड़ा जैसी दो जगहों पर ही 4,000 से 6,000 के बीच ऐसे संदिग्ध सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं।
अचानक कैसे बढ़ गया प्रमाणपत्रों का आंकड़ा?
सरकारी आंकड़े खुद गवाही दे रहे हैं कि साल 2025 में जन्म प्रमाणपत्र जारी होने की दर में अप्रत्याशित उछाल आया है। साल 2023 में राज्य में कुल 1,21,453 बर्थ सर्टिफिकेट जारी किए गए थे। साल 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 3,81,591 पर पहुंच गया।लेकिन 2025 में इसमें भारी उछाल आया और पूरे राज्य में 10,50,441 जन्म प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए।
अब सिर्फ सरकारी अधिकारियों को ही मिला अधिकार
इस बड़े फर्जीवाड़े की आशंका के बीच सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि अब से केवल अधिकृत सरकारी अधिकारी ही जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि ऐसा करने से भविष्य में जवाबदेही आसानी से तय की जा सकेगी।
इन तीन जिलों में जारी हुए सबसे ज्यादा सर्टिफिकेट
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि प्रमाणपत्र जारी होने का सबसे बड़ा आंकड़ा तीन मुस्लिम बहुल जिलों- मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तरी दिनाजपुर में देखा गया है। गौरतलब है कि मुस्लिम बहुल जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में एसआईआर के दौरान मतदाताओं के नाम कटने के मामले भी असमान रूप से अधिक रहे हैं।














