जमशेदपुर। भारत में पिछले करीब 60 वर्षों से यूरेनियम का सुरक्षित तरीके से खनन किया जा रहा है। यूरेनियम और रेडिएशन को लेकर लोगों के बीच फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए कंपनी लगातार जनजागरूकता अभियान चला रही है।
देश में उत्पादित यूरेनियम स्वच्छ ऊर्जा का प्रमुख स्रोत और भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की आधारशिला है। वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने के लिए 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है, जिसमें यूरेनियम की निर्बाध उपलब्धता की मुख्य भूमिका होगी।
यह जानकारी यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसील) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) डॉ. के. आनंद राव ने जादूगोड़ा में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान दी।
कॉपर टेलिंग्स
डॉ. के. आनंद राव ने बताया कि यूरेनियम उत्पादन को तेजी से बढ़ाने के लिए हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) के ‘कॉपर टेलिंग्स’ (अवशेषों) से यूरेनियम निकालने की संभावनाओं पर गंभीरता से काम चल रहा है। इसके साथ ही मौजूदा खदानों के विस्तार के अलावा राजस्थान और आंध्र प्रदेश में नई यूरेनियम खदानें शुरू करने की योजना पर अमल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ने से देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता मजबूत होगी, जिससे वर्ष 2070 तक ‘नेट जीरो’ कार्बन उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में बड़ी मदद मिलेगी।
झारखंड में संचालित खदानों का विवरण
उन्होंने सुरक्षित खनन, पर्यावरण संरक्षण और जनविश्वास को कंपनी की प्राथमिकताओं में शामिल बताया। पूर्वी सिंहभूम जिले में यूसीआइएल की एक बांदुहुरांग ओपन कास्ट माइंस तथा पांच भूमिगत (अंडरग्राउंड) खदानें- जादूगोड़ा, भाटिन, नरवापहाड़, तुरामडीह और बागजाता संचालित हैं। इसके अलावा पड़ोसी सरायकेला-खरसावां जिले में महुलडीह भूमिगत यूरेनियम खदान स्थित है। ये सभी खदानें यूसीआइएल के सीधे प्रबंधन में कार्य कर रही हैं।
भारत की परमाणु ऊर्जा क्रांति में 7.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश संभवन ई दिल्ली। भारत के हाल ही में तय लक्ष्य ( 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा) को पूरा करने के लिए निजी कंपनियां भी हाथ बंटा सकती हैं, जो खुद 30 गीगावाट तक का योगदान दे सकती हैं।
परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष एके मोहंती के मुताबिक, इस कदम से 7.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश आ सकता है। यह भारत के स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव होगा।
निजी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में शामिल करने से काम में तेजी आएगी। उन्होंने बताया कि भारत के पास दुनिया के लगभग एक-चौथाई थोरियम भंडार मौजूद हैं, जिससे टिकाऊ विकास की असली संभावनाएं बन रही हैं।
निजी कंपनियों की विशेषज्ञता और अपने प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल करके भारत स्वच्छ ऊर्जा के अपने भविष्य को मजबूत करना चाहता है। इस तरह देश नए अवसर भी पैदा करने की उम्मीद कर रहा है।














