कोलकाता। पश्चिम बंगाल का नाम जल्द ही बदला जा सकता है। राज्य के भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने इस बारे में बड़ा दावा किया है। समिक भट्टाचार्य ने कहा है कि राज्य की भाजपा सरकार जल्द ही विधानसभा में पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंग’ करने के लिए विधेयक पेश करेगी। समिक भट्टाचार्य ने कहा है कि सरकार ने ये फैसला बंगाल को उसके इतिहास से जोड़ने के लिए लिया है।
क्या बोले समिक भट्टाचार्य?
दरअसल, समिक भट्टाचार्य उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ‘पश्चिम बंग भवन’ के निर्माण के प्रस्ताव से जुड़े एक सवाल का जवाब दे रहे थे। इसी दौरान उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल का नाम पश्चिम बंग रखने का ये फैसला राज्य को इसके इतिहास से जोड़ने के लिए लिया गया है। उन्होंने कहा- अब आपको पश्चिम बंगाल जैसे नाम लेने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि राज्य सरकार बहुत जल्द, संभवत: विधानसभा के अगले सत्र में, राज्य का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंग’ करने के लिए विधेयक पेश करेगी।
राज्य का नाम बदलने की कोशिश 1999 से कई बार हो चुकी है। 2018 में बांग्ला नाम का प्रस्ताव भी केंद्र की मंजूरी नहीं पा सका। अब नए प्रस्ताव पर राजनीतिक हलचल बढ़ने की संभावना है।
इस बार इस बात की संभावना प्रबल है कि वेस्ट बंगाल का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंग’ रख दिया जाए।
समिक भट्टाचार्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लोगों को जल्द ‘बांग्ला’ या ‘वेस्ट बंगाल जैसे नामों का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा। राज्य सरकार बहुत जल्द विधानसभा में विधेयक पेश करेगी। हालांकि यह प्रस्ताव कब और किस प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा, इसकी अंतिम स्थिति विधानसभा में विधेयक आने के बाद ही साफ होगी।
2016 में फिर बदला प्रस्ताव
2016 में नाम बदलने की कवायद दोबारा शुरू हुई। सरकार ने अलग-अलग भाषाओं में ‘बांग्ला’ और ‘बंगाल’ जैसे नामों पर विचार किया। 2018 में विधानसभा ने सर्वसम्मति से ‘बांग्ला’ नाम रखने का प्रस्ताव पास किया। यह प्रस्ताव भी केंद्र की मंजूरी हासिल नहीं कर सका। केंद्र की ओर से संवैधानिक संशोधन की जरूरत बताई गई। साथ ही बीजेपी के एक वर्ग ने ‘बांग्ला’ नाम को बांग्लादेश से मिलता-जुलता होने पर आपत्ति जताई थी। यानी नाम बदलने की कोशिश कई बार हुई लेकिन हर बार मामला राजनीतिक और संवैधानिक पेच में फंस गया।
वाराणसी में बनेगा ‘पश्चिम बंग’ भवन
समिक भट्टाचार्य ने वाराणसी में प्रस्तावित ‘पश्चिम बंग भवन’ की जानकारी भी दी। उनके मुताबिक राज्य का संस्कृति और पर्यटन विभाग केंद्र और कूचबिहार के राजपरिवार के वंशजों के साथ मिलकर इसकी योजना पर काम कर रहा है। यह भवन सांस्कृतिक केंद्र के साथ बंगाल से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए ठहरने की जगह भी होगा। इसमें सम्मेलन कक्ष, पुस्तकालय और बंगाली साहित्य व गीतों का संग्रह प्रस्तावित है। वाराणसी और बंगाल के पुराने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंध को भी इस परियोजना की बड़ी वजह बताया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार ‘पश्चिम बंग’ नाम का प्रस्ताव विधानसभा से आगे निकलकर केंद्र की मंजूरी तक पहुंच पाएगा? पिछले अनुभवों को देखते हुए इस पर सबकी नजर रहेगी।














