न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए ) की 81वीं बैठक में 6वीं समिति के एजेंडा आइटम 75 पर भारत ने अपना रुख बेहद सख्त और स्पष्ट कर दिया है। ‘संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों और मिशन पर तैनात विशेषज्ञों की आपराधिक जवाबदेही’ विषय पर बोलते हुए भारतीय सांसद प्रिया सरोज ने जोरदार तरीके से अपनी आवाज रखी है। उन्होंने साफ और दो टूर शब्दों में साफ किया कि भारत यूएन कर्मियों के किसी भी तरह के आपराधिक आचरण और कदाचार को बर्दाश्त नहीं करेगा।
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत का राष्ट्रीय बयान देते हुए सांसद प्रिया सरोज ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इसके अधिकारियों का आचरण पारदर्शी और बेदाग होना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा यूएन मिशन पर तैनात कर्मियों की तरफ से किए गए किसी भी आपराधिक कृत्य या अनैतिक आचरण के खिलाफ भारत ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर कायम है।
अपराधियों को सजा दिलाने और जांच प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र और सदस्य देशों के बीच और ज्यादा मजबूत सहयोग और प्रभावी जवाबदेही तंत्र की आवश्यकता है।
न्याय प्रणाली में उचित प्रक्रिया का पालन होना चाहिए साथ ही अपराध का शिकार हुए लोगों और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है।
संयुक्त राष्ट्र की साख और जवाबदेही पर दिया जोर
प्रिया सरोज ने अपने संबोधन में दोहराया कि भारत संयुक्त राष्ट्र की साख, जवाबदेही और वैश्विक विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जब यूएन के अधिकारी या विशेषज्ञ खुद किसी अपराध में शामिल होते हैं तो इससे अंतरराष्ट्रीय संस्था की छवि को धक्का पहुंचता है। इसलिए ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई समय की मांग है।
प्रिया सरोज ने इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के साथ चर्चा में भाग लिया, यूनिसेफ के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूत बिनाय एस. प्रधान के साथ भारतीय समुदाय के लोगों से बातचीत की।














