नई दिल्ली, 23 अक्टूबर। पोलैंड में करीब 30,000 भारतीय रहते हैं। इनमें करीब 5,000 छात्र हैं। करीब 11 भारतीय आईटी कंपनियां वहां 10,000 से ज्यादा लोगों को नौकरी देती हैं। अब दोनों देशों ने तय किया है कि 2030 तक आपसी कारोबार दोगुना होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने 22 अक्टूबर को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में बातचीत की। प्रधानमंत्री कार्यालय के जारी साझा बयान और नतीजों की सूची में यही लक्ष्य सबसे ऊपर है। पर दोगुना किस आंकड़े का, यह इन दस्तावेजों में नहीं लिखा।
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की यात्रा से लक्ष्य तो तय हुआ, पर उसका आधार-आंकड़ा साझा बयान में नहीं है। वह विदेश मंत्रालय के अपने दस्तावेज में मिला।
आधार-आंकड़ा कहां है
विदेश मंत्रालय की भारत-पोलैंड संबंधों पर रिपोर्ट 30 जून 2026 तक की है। उसके मुताबिक 2025 में दोनों देशों के बीच 6.36 अरब डॉलर का कारोबार हुआ। इसे दोगुना करें तो 2030 तक करीब 12.7 अरब डॉलर बनता है।
यह आसान नहीं है। पांच साल में दोगुना होने के लिए कारोबार को हर साल करीब 14.9 फीसदी बढ़ना होगा। 2013 से 2025 के बीच यह हर साल करीब 10.3 फीसदी बढ़ा। यानी अब रफ्तार डेढ़ गुना के करीब चाहिए।
एक नजर में
•भारत-पोलैंड कारोबार, 2025 : 6.36 अरब डॉलर
•भारत का पोलैंड को निर्यात, 2025 : 4.83 अरब डॉलर
•भारत का पोलैंड से आयात, 2025 : 1.53 अरब डॉलर
•22 अक्टूबर 2026 का लक्ष्य : 2030 तक दोगुना
तुलना
•भारत का निर्यात : 4.83 अरब डॉलर — बड़ा हिस्सा, 100%
•भारत का आयात : 1.53 अरब डॉलर — निर्यात का 32%
•भारत का निर्यात उसके आयात से 216 फीसदी ज्यादा है।
हमारा हिसाब
6.36 का दोगुना करीब 12.7 अरब डॉलर। इसके लिए हर साल करीब 14.9 फीसदी बढ़त चाहिए; 2013 से 2025 तक औसत करीब 10.3 फीसदी रहा।
भारत को क्या मिला
कारोबार का तारीख वाला लक्ष्य, रक्षा उद्योग में साझा उत्पादन का रास्ता और आपदा से बचाव वाले गठबंधन में नया साथी।
ब्लिट्ज की सराहना
विदेश मंत्रालय, जिसकी देश-रिपोर्ट से यह लक्ष्य नापा जा सकता है।
आंकड़े विदेश मंत्रालय की भारत-पोलैंड रिपोर्ट (30 जून 2026 तक) और भारत-पोलैंड साझा बयान (22 अक्टूबर 2026) से; mea.gov.in और pmindia.gov.in पर जांचे।
फायदा अभी भारत के पाले में
इस कारोबार में भारत आगे है। 2025 में भारत ने पोलैंड को 4.83 अरब डॉलर का सामान बेचा और 1.53 अरब डॉलर का खरीदा। यानी भारत को 3.3 अरब डॉलर का फायदा रहा। निवेश में भी यही हाल है। भारतीय कंपनियों ने पोलैंड में 3 अरब डॉलर से ज्यादा लगाए हैं। पोलैंड का भारत में निवेश करीब 68.5 करोड़ डॉलर है।’
इसीलिए पोलैंड की नजर भारत के बाजार पर है। प्रधानमंत्री टस्क करीब 100 कंपनियों के प्रमुखों को साथ लेकर आए। प्रधानमंत्री मोदी ने पोलैंड की कंपनियों को भारत के साथ मिलकर नई चीजें विकसित करने और बनाने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा में रिश्ते गहरे करने पर सहमति बनी है।
चार घोषणाएं, समझौता अभी बाकी
नतीजों की सूची में चार बातें हैं। कारोबार दोगुना करने का लक्ष्य। आपदा से बचाव वाले बुनियादी ढांचे के गठबंधन सीडीआरआई में पोलैंड का शामिल होना। रक्षा उद्योग पर नियमित बातचीत। और आतंकवाद के खिलाफ बातचीत। साझा बयान में 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा है।
कोई समझौता इस बार दस्तखत नहीं हुआ। गोपनीय जानकारी की सुरक्षा वाला समझौता जल्द होने की उम्मीद जताई गई है। अहम खनिजों पर एमओयू पर बातचीत चल रही है। रक्षा में साझा उत्पादन के लिए गोपनीय जानकारी वाला समझौता सबसे जरूरी कड़ी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्टार्टअप ब्रिज और युवाओं के लिए टेक्नोलॉजी हैकथॉन का भी एलान किया। ये दोनों नतीजों की सूची में नहीं हैं। प्रधानमंत्री टस्क ने बिजनेस फोरम में कहा कि रणनीतिक साझेदारी की कीमत घोषणाओं से नहीं, निवेश और नई तकनीक से नापी जाती है।
ब्लिट्ज की सलाह
वाणिज्य विभाग भारत-पोलैंड कारोबार का आधार-आंकड़ा अपने आंकड़ों में डॉलर और रुपये दोनों में हर साल जारी करे। तब 2030 तक दोगुना होने का हिसाब सबके सामने रहेगा।
बिजलीघरों में सिर्फ छह दिन का कोयला
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर। आपके घर की बिजली जिन कोयला बिजलीघरों से आती है, उनके पास 21 अक्टूबर को करीब 6.3 दिन का ही कोयला था। केंद्रीय बिजली प्राधिकरण की रोज की कोयला रिपोर्ट यही बताती है। पिछले साल इसी दिन करीब 14.9 दिन का भंडार था।
रिपोर्ट 191 बिजलीघरों की है। इनके पास 197.8 लाख टन कोयला था। तय मानक 611.7 लाख टन का है। यानी भंडार मानक का सिर्फ 32 फीसदी है। 100 बिजलीघरों के पास मानक के चौथाई से भी कम कोयला था। पिछले साल ऐसे बिजलीघर 11 थे।
एक नजर में
•रेल से कोयला ढुलाई, 1-18 अक्टूबर 2026 : 22.5 फीसदी ज्यादा
•बिजलीघरों में कोयला, 21 अक्टूबर 2026 : 197.8 लाख टन
•मानक का हिस्सा : 32%
•चौथाई से कम भंडार वाले बिजलीघर : 191 में से 100
तुलना
•भंडार, 21 अक्टूबर 2025 : 452.2 लाख टन — 100%
•भंडार, 21 अक्टूबर 2026 : 197.8 लाख टन — पिछले साल का 44%
•पिछले साल का भंडार इस साल से 128.6 फीसदी ज्यादा था।
हमारा हिसाब
197.8 लाख टन भंडार ÷ 31.35 लाख टन रोज की जरूरत = 6.3 दिन। पिछले साल 14.9 दिन।
भारत को क्या मिला
रेल की रिकॉर्ड ढुलाई से भंडार घटने के बीच भी बिजलीघर चलते रहे।
ब्लिट्ज की सराहना
भारतीय रेल की माल ढुलाई टीम और रोज का भंडार जारी करने वाला केंद्रीय बिजली प्राधिकरण।
आंकड़े रेल मंत्रालय की 22 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति और केंद्रीय बिजली प्राधिकरण की 21 अक्टूबर 2025 और 2026 की कोयला भंडार रिपोर्ट से; pib.gov.in और npp.gov.in पर जांचे।
रेल ने संभाला मोर्चा
दूसरी तरफ रेल ने कोयला ढुलाई का नया रिकॉर्ड बनाया है। रेल मंत्रालय की 22 अक्टूबर की विज्ञप्ति के मुताबिक अक्टूबर के पहले 18 दिनों में ढुलाई पिछले साल से 22.5 फीसदी ज्यादा रही। रोज 87 रेक ज्यादा चले। मंत्रालय ने इसकी वजह बिजली की बढ़ती खपत, ज्यादा औद्योगिक उत्पादन और कुछ इलाकों में कम बारिश बताई।
दोनों दस्तावेज साथ पढ़ें तो तस्वीर साफ होती है। रेल किसी फालतू भंडार के लिए कोयला नहीं ढो रही। वह घटते भंडार से होड़ ले रही है। 21 अक्टूबर को ही बिजलीघरों ने जितना कोयला जलाया, उससे 2.9 लाख टन कम पहुंचा।
ब्लिट्ज की सलाह
रेल और केंद्रीय बिजली प्राधिकरण हर हफ्ते एक साझा नोट जारी करें, जिसमें भेजे गए रेक और बिजलीघरों के भंडार के दिन साथ दिखें।
न्यूजीलैंड में 6,000 भारतीयों को हर साल वीजा
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर। न्यूजीलैंड में नौकरी या पढ़ाई का सपना देखने वालों के लिए रास्ता खुला है। भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता 20 अक्टूबर 2026 से लागू हो गया। इसके तहत न्यूजीलैंड हर साल कुशल भारतीयों को 5,000 अस्थायी नौकरी वीजा देगा। युवाओं के लिए 1,000 वर्किंग हॉलिडे वीजा अलग से होंगे।
छात्रों की कोई गिनती तय नहीं है। पढ़ाई के बाद काम करने की छूट भी मिलेगी। विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित के ग्रेजुएट तीन साल और पीएचडी करने वाले चार साल रुककर काम कर सकेंगे। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 21 सितंबर को यही जानकारी दी थी।
भारत के व्यापारियों को भी बड़ा फायदा है। भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले हर सामान पर अब कोई शुल्क नहीं लगेगा। न्यूजीलैंड भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश लाने में मदद करेगा। 2025-26 में दोनों देशों के बीच करीब 1.1 अरब डॉलर का सामान का कारोबार हुआ था।
1.74 लाख करोड़ से चलेंगे गांव के नल
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर। गांव में नल तो लग गया, पर खराब हो तो ठीक कौन कराए? इसका जवाब अब पंचायत के बजट में है। 16वें वित्त आयोग ने ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 4.35 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा तय किए हैं। इनमें से करीब 1.74 लाख करोड़ रुपये पानी और साफ-सफाई के लिए अलग रखे गए हैं। यानी करीब 40 फीसदी।
पेयजल और स्वच्छता
विभाग ने 22 अक्टूबर को राज्यों के साथ ऑनलाइन बैठक की जानकारी दी। विषय था जल जीवन मिशन 2.0 को इस पैसे से जोड़ना। पहले चरण में घर-घर पाइप पहुंचे। दूसरे चरण का जोर उन्हें चालू रखने पर है, और यह जिम्मा पंचायतों का होगा।
विभाग के सचिव अशोक के.के. मीणा ने याद दिलाया कि 73वां संविधान संशोधन पीने के पानी और सफाई को स्थानीय सरकार की जिम्मेदारी मानता है। कर्नाटक, ओडिशा और मध्य प्रदेश ने अपने मॉडल रखे। मध्य प्रदेश ने रखरखाव के अपने नियम 2026 पहले ही लागू कर दिए हैं। नवंबर में दो क्षेत्रीय सम्मेलन होंगे।
मछली निर्यात 73,890 करोड़ रुपये पर पहुंचा
भोपाल, 23 अक्टूबर। देश में पकड़ी और पाली जाने वाली मछली का तीन-चौथाई से ज्यादा हिस्सा अब समुद्र से नहीं, तालाब, नदी और जलाशय से आता है। मत्स्य विभाग के मुताबिक 2024-25 में देश में 197.75 लाख टन मछली का उत्पादन हुआ। इसमें 151.60 लाख टन अंतर्देशीय मत्स्य पालन से आया। यानी 76.7 फीसदी।
निर्यात भी तेजी से बढ़ा है। समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 में भारत ने 19.72 लाख टन समुद्री उत्पाद बेचे। इनसे 73,890 करोड़ रुपये की कमाई हुई। एक साल पहले यह 62,408 करोड़ रुपये थी। यानी 18.4 फीसदी की बढ़त।
यही बात भोपाल में मत्स्य निवेशक और निर्यातक सम्मेलन में रखी जा रही है। मध्य प्रदेश यहां मछली पालन में निवेश और निर्यात की अपनी गाइडलाइन 2026 जारी कर रहा है। राज्य के पास करीब 4.50 लाख हेक्टेयर पानी का इलाका है। सम्मेलन में 1,000 से ज्यादा मछली पालकों के आने की बात थी। समुद्र से दूर बसे राज्य के मछली पालक के लिए यह विदेशी बाजार तक पहुंचने का रास्ता है।
यमुना सफाई: 43 परियोजनाएं, मई 2029 तक
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर। दिल्ली में यमुना की सफाई से जुड़ी 8,941 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम आगे बढ़ा है। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 22 अक्टूबर को 10 परियोजनाओं का उद्घाटन किया और 33 की नींव रखी। गृह मंत्रालय की विज्ञप्ति के मुताबिक उन्होंने कहा कि मई 2029 से पहले यमुना को साफ कर दिया जाएगा।
औसतन हर परियोजना पर करीब 208 करोड़ रुपये लगेंगे। गृह मंत्री ने बताया कि कूड़े के पहाड़ों से 2.17 करोड़ टन कचरा हटाया जा चुका है और करीब 100 एकड़ जमीन खाली हुई है। उनके मुताबिक ओखला और भलस्वा के पहाड़ 30 से 40 मीटर और गाजीपुर का पहाड़ 10 से 15 मीटर नीचे आया है।

फोटो — यहां लगाएं : pib.gov.in — यमुना पुनरुद्धार परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास, 22 अक्टूबर 2026 · कैप्शन : नई दिल्ली में यमुना पुनरुद्धार परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास, 22 अक्टूबर 2026 · फोटो : पीआईबी
यह कचरा कहां जा रहा है, इसका जवाब राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की 22 अक्टूबर की विज्ञप्ति में है। उसने दिल्ली के कूड़ा स्थलों का करीब 13.58 लाख टन बेकार मलबा राजमार्गों के तटबंध बनाने में लगाया है। यह हटाए गए कचरे का करीब 6.3 फीसदी है।
विज्ञप्ति में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता और हर परियोजना का अलग ब्योरा नहीं है। दिल्ली वालों के लिए असली कसौटी यही होगी कि नालों का गंदा पानी नदी में जाने से पहले कितना साफ होता है।
ग्राफीन से नपेगा रोशनी का क्वांटम कंपन
मुंबई, 23 अक्टूबर। रोशनी कभी पूरी तरह स्थिर नहीं होती। सबसे साफ लेजर किरण में भी क्वांटम स्तर पर हल्का कंपन रहता है। इसे तेजी से नापना क्वांटम तकनीक की बड़ी चुनौती है। आईआईटी बॉम्बे के दो भौतिक विज्ञानियों ने इसके लिए ग्राफीन की एक परत का तरीका सुझाया है।
भौतिकी विभाग के कार्तिक प्रभु और प्रोफेसर गोपाल दीक्षित का यह शोध अमेरिकन फिजिकल सोसायटी की पत्रिका फिजिकल रिव्यू बी में छपा है। संस्थान ने 14 अक्टूबर 2026 को इसकी जानकारी दी।
यह सैद्धांतिक अध्ययन है, यानी अभी कागज पर है। टीम ने देखा कि खास तरह की रोशनी डालने पर ग्राफीन से निकलने वाली कुछ तरंगें आम तौर पर नहीं निकलतीं। पर जब रोशनी में क्वांटम कंपन बढ़ाया जाता है, तो ये तरंगें निकलने लगती हैं। इन्हीं तरंगों से कंपन को नापा जा सकता है।
संस्थान के मुताबिक यह तरीका बहुत तेज है। प्रोफेसर दीक्षित इसे दूसरे क्वांटम पदार्थों पर भी आजमाना चाहते हैं। अभी कोई प्रयोग, फंडिंग या उद्योग साझेदार नहीं बताया गया है। भारत की प्रयोगशालाओं के लिए यह आजमाने लायक एक ठोस प्रयोग है।
केरल पर्यटन: 74 परियोजनाएं समय से पीछे
तिरुवनंतपुरम, 23 अक्टूबर। केरल के पर्यटन विभाग को योजना के लिए 1,055.92 करोड़ रुपये मिले। इनमें से 755.24 करोड़ रुपये ही खर्च हुए। 300.68 करोड़ रुपये बिना खर्च रह गए या लौटा दिए गए। यानी 71.52 फीसदी पैसा ही काम आया।
यह बात भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में है। मार्च 2024 तक की यह अनुपालन ऑडिट (सिविल) रिपोर्ट संख्या 3, 2026 है। इसे 13 अक्टूबर 2026 को केरल विधानसभा में रखा गया।
रिपोर्ट के मुताबिक 74 पर्यटन परियोजनाएं तय समय से पीछे थीं। इनकी अनुमानित लागत 866.26 करोड़ रुपये थी, पर सिर्फ 154.97 करोड़ रुपये खर्च हुए। 31 परियोजनाओं में 21.12 करोड़ रुपये अग्रिम दिए गए थे। इसमें से 19.35 करोड़ रुपये वापस नहीं आए।
सरकार का जवाब
रिपोर्ट में राज्य सरकार के जवाब दर्ज हैं। 22 परियोजनाएं चल पाएंगी या नहीं, इस पर सीएजी की बातों में से सरकार ने नौ पर सहमति जताई और 13 पर नहीं। उसने माना कि 19.35 करोड़ रुपये का अग्रिम वापस नहीं आया है।
सीएजी ने तीन सुझाव दिए हैं
•मंजूरी से पहले जांच हो कि परियोजना चल पाएगी या नहीं।
•पर्यटन संपत्तियों का रजिस्टर बने और हर साल जांचा जाए।
•काम पूरा होकर सौंपने से पहले रखरखाव का समझौता हो।
रिपोर्ट का बाढ़ के बाद की सड़कों वाला हिस्सा सरकार के जवाब पढ़ने तक रोका गया है।
ब्लिट्ज की सलाह
देरी वाली 74 परियोजनाओं की हर तिमाही स्थिति सार्वजनिक हो, तो सुधार दिखेगा भी और भरोसा भी बढ़ेगा।














