नई दिल्ली। गांव की जिस महिला को कभी पानी के लिए रोज दूर जाना पड़ता था, उसके आंगन में अब नल है। ऐसे घरों की गिनती 12 अगस्त 2026 तक 15.91 करोड़ से ऊपर पहुंच चुकी है। अगस्त 2019 में यह संख्या सिर्फ 3.23 करोड़ थी।
नल का पानी, पक्का घर, छत पर सोलर और पहली नौकरी — विकसित भारत अब आंकड़ों से निकलकर घरों में दिख रहा है। पर 2047 तक पहुंचने के लिए हर साल वही रफ्तार चाहिए जो इस साल सिर्फ एक तिमाही में दिखी।
यह जानकारी ग्रामीण विकास पर पीआईबी के 13 अगस्त 2026 के बैकग्राउंडर में है। उसी दस्तावेज के मुताबिक प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में 3.13 करोड़ पक्के घर बन चुके हैं। मंजूरी 3.91 करोड़ घरों की है।
देश के करीब हर पांच में से चार ग्रामीण घरों तक नल पहुंच गया है। बाकी 3.45 करोड़ घरों तक पहुंचने के लिए रफ्तार पांच गुना से ज्यादा करनी होगी।
दीदी लखपति, छत पर सूरज
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 3.46 करोड़ महिलाएं 29 जुलाई 2026 तक “लखपति दीदी” बन चुकी थीं। यानी उनकी सालाना कमाई कम से कम एक लाख रुपये है। तीन करोड़ का पुराना लक्ष्य पार हो गया है। ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 3 सितंबर को मुंबई में कहा था कि अब लक्ष्य छह करोड़ का है।
बिजली के बिल में भी फर्क दिख रहा है। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में 50.06 लाख से ज्यादा घरों की छत पर सोलर सिस्टम लग चुका है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने 4 अगस्त को बताया कि इनमें से करीब 19 लाख घरों का बिजली बिल शून्य आ रहा है।
नौजवानों के लिए प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना अगस्त 2025 में शुरू हुई। पीआईबी के 1 अगस्त 2026 के बैकग्राउंडर के मुताबिक तब से 72 लाख से ज्यादा लोग पहली बार नौकरी में आकर ईपीएफओ से जुड़े हैं।
2047 का हिसाब
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर को नई दिल्ली की विकसित भारत संकल्प सभा में नया नारा दिया — “वी विल डू इट”। डीडी इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि 140 करोड़ नागरिक मिलकर 2047 तक विकसित भारत बनाएंगे।
अर्थव्यवस्था ने भी इस साल अच्छी शुरुआत की
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के 31 अगस्त के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-जून 2026 में जीडीपी 7.8 फीसदी बढ़ी। विश्व बैंक ने फरवरी 2025 की अपनी रिपोर्ट में कहा था कि 2047 तक ऊंची आय वाला देश बनने के लिए भारत को औसतन 7.8 फीसदी सालाना बढ़ना होगा।
यानी एक तिमाही ठीक उसी रफ्तार पर चली। पर पूरे साल का अनुमान इससे कम है। रिजर्व बैंक ने 7 अक्टूबर को 2026-27 के लिए 7.1 फीसदी का अनुमान दिया है।
ब्लिट्ज ने हिसाब लगाया है। विश्व बैंक के पैमाने पर ऊंची आय का मतलब है प्रति व्यक्ति सालाना 14,375 डॉलर से ज्यादा आय। भारत का आंकड़ा 2025 में 2,760 डॉलर था। यह फासला 5.21 गुना है।
कहां अटकती है रफ्तार
जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया गया है। 10 मार्च 2026 के कैबिनेट फैसले के मुताबिक कुल 19.36 करोड़ ग्रामीण घरों तक नल पहुंचाना है। अभी 3.45 करोड़ घर बाकी हैं।
ब्लिट्ज के हिसाब से इसके लिए हर महीने करीब 12.3 लाख कनेक्शन चाहिए। मार्च से अगस्त 2026 के बीच यह रफ्तार करीब 2.2 लाख महीना रही। संसद की जल संसाधन समिति ने 17 मार्च 2026 की अपनी रिपोर्ट में तीसरे पक्ष के आकलन का जिक्र किया है। उसके मुताबिक नल वाले करीब 14 से 16 फीसदी घरों में पानी नहीं आ रहा।
पक्के घरों में भी 78 लाख घर मंजूर तो हैं, पर अभी बने नहीं। रोजगार योजना का पहली नौकरी वाला लक्ष्य 1.92 करोड़ का है। अब तक 72 लाख यानी 37.5 फीसदी हुआ है, जबकि योजना की आधी मियाद बीत चुकी है।
भारत को इससे क्या मिलेगा यह साफ है। हर नल, हर पक्की छत और हर सोलर पैनल गांव की महिला का समय और परिवार की जेब बचाता है — और यही बचत विकसित भारत की असली नींव है।
ब्लिट्ज की सलाह
जल शक्ति मंत्रालय नल कनेक्शन के साथ-साथ यह भी हर महीने जारी कर सकता है कि कितने नलों में रोज तय मात्रा में पानी आ रहा है। इससे गिनती और असली सप्लाई का फर्क सबके सामने रहेगा।
ग्रामीण विकास मंत्रालय और राज्य सरकारें मंजूर पर अधूरे 78 लाख घरों की जिलेवार सूची जारी कर सकती हैं। किस्त समय पर जाए, इसकी निगरानी जिला स्तर पर हो।
रोजगार योजना की किस्त के लिए फेस-ऑथेंटिकेशन जरूरी है। श्रम मंत्रालय इसमें अटके मामलों की संख्या हर महीने बता सकता है, ताकि पहली नौकरी वाले युवा का पैसा कागजी अड़चन में न रुके।
गेहूं पर 25 रुपये, सरसों पर 413 बढ़े
नई दिल्ली। खेत में गेहूं बोने की तैयारी कर रहे किसान के लिए इस बार न्यूनतम समर्थन मूल्य में सिर्फ 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़त आई है। सरसों पर यह बढ़त 413 रुपये है।
रबी की इस बार की एमएसपी में सरकार ने दलहन-तिलहन को खुलकर बढ़ाया है। गेहूं की बढ़ोतरी पिछले साल की बढ़त का छठा हिस्सा भी नहीं।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए यह फैसला किया। आकाशवाणी समाचार ने 1 अक्टूबर 2026 को इसकी जानकारी दी। कुसुम पर 675 रुपये, मसूर पर 390, जौ पर 136 और चने पर 83 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाए गए हैं।
गेहूं की बढ़त उसके पिछले एमएसपी का एक फीसदी भी नहीं। पिछले साल यही बढ़त 160 रुपये थी।
हिसाब क्या कहता है
पिछले साल यानी 2026-27 के सीजन के लिए गेहूं का एमएसपी 160 रुपये बढ़ा था। आकाशवाणी ने 2 अक्टूबर 2025 को यह खबर दी थी। उससे पहले का एमएसपी 2,425 रुपये था। इस तरह पिछला एमएसपी 2,585 रुपये बैठता है।
ब्लिट्ज के हिसाब से 25 रुपये उसका करीब 0.97 फीसदी है। सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट ब्रीफिंग में कहा कि फैसला किसानों को उपज का लाभकारी दाम दिलाने के लिए लिया गया है।
सरकार ने इस बार साफ संकेत दिया है। सरसों, मसूर और कुसुम जैसी फसलों पर बढ़त कई गुना है। देश खाने का तेल और दालें बड़ी मात्रा में आयात करता है। यही वे फसलें हैं जिनकी ओर किसान को खींचने की कोशिश है।
किसान सम्मान निधि
पीएम-किसान की 23वीं किस्त 20 जून 2026 को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर से जारी हुई थी। पीआईबी बैकग्राउंडर के मुताबिक 9.44 करोड़ से ज्यादा किसानों को 18,880 करोड़ रुपये से ज्यादा भेजे गए। इनमें करीब 2.18 करोड़ महिला किसान थीं। 2019 से अब तक कुल रकम 4.46 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गई है।
भारत को क्या मिलेगा?
अगर किसान तिलहन और दलहन की ओर बढ़ता है तो विदेश से तेल-दाल का आयात घटेगा, और वह पैसा देश के गांवों में रहेगा।
ब्लिट्ज की सलाह
कृषि मंत्रालय और राज्य सरकारें सरसों, मसूर और चने की एमएसपी पर खरीद के केंद्र बुवाई से पहले ही जिलेवार घोषित कर सकती हैं। किसान फसल तभी बदलता है जब उसे पक्का भरोसा हो कि मंडी में उपज एमएसपी पर बिकेगी।
72 लाख लोग पहली बार ईपीएफओ में
नई दिल्ली । पहली बार नौकरी पाने वाले युवा को सरकार एक महीने की ईपीएफ सैलरी के बराबर, अधिकतम 15,000 रुपये देती है। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना में अगस्त 2025 से अब तक 72 लाख से ज्यादा लोग इस तरह पहली बार नौकरी में आए हैं।
पहली नौकरी पर 15,000 रुपये तक की मदद वाली योजना अपने लक्ष्य के 37.5 फीसदी पर है। पैसा अब तक हर पांच में से एक को मिला है।
यह जानकारी पीआईबी के 1 अगस्त 2026 के बैकग्राउंडर में है। योजना पर 99,446 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। मियाद 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 तक है। लक्ष्य 3.5 करोड़ से ज्यादा रोजगार का है, जिनमें 1.92 करोड़ पहली नौकरी वाले होंगे।
72 लाख पहली नौकरियां, पर पैसा अब तक सिर्फ 15 लाख तक पहुंचा।
पैसा देर से क्यों
बैकग्राउंडर के मुताबिक 15 लाख से ज्यादा लोगों को प्रोत्साहन राशि मिल चुकी है। इनमें करीब 30 फीसदी महिलाएं हैं। ब्लिट्ज के हिसाब से यह 72 लाख का करीब 20.8 फीसदी है।
इसकी वजह योजना के नियम में है। पहली किस्त छह महीने की नौकरी के बाद मिलती है। दूसरी 12 महीने की लगातार नौकरी और वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम पूरा करने के बाद। पैसा तभी जाता है जब उमंग एप पर फेस-ऑथेंटिकेशन से येएएन की पुष्टि हो जाए।
नियोक्ता को भी हर नए कर्मचारी पर दो साल तक हर महीने 3,000 रुपये तक मिलते हैं, बशर्ते कर्मचारी कम से कम छह महीने टिके। मैन्युफैक्चरिंग में यह मदद तीसरे और चौथे साल तक जाती है।
भारत को इससे क्या मिलेगा? हर नया ईपीएफओ खाता एक युवा को पेंशन, बीमा और पक्की सैलरी वाली दुनिया में लाता है।
ब्लिट्ज की सलाह
श्रम और रोजगार मंत्रालय राज्यवार यह आंकड़ा जारी कर सकता है कि कितने युवाओं की छह महीने की नौकरी पूरी हो चुकी है पर पैसा फेस-ऑथेंटिकेशन में अटका है। कॉमन सर्विस सेंटरों पर यह पुष्टि कराने की सुविधा देरी घटा सकती है।
देश के कारखानों से निकलने लगी चिप
नई दिल्ली : “अब भारत के प्लांट से निकली हमारी चिप देश और दुनिया के ग्राहकों तक पहुंचने लगी है।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर को नई दिल्ली के यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 के उद्घाटन पर यह बात कही। उसी दिन मोहाली और सूरत के दो प्लांट में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हुआ।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन में मंजूर 12 यूनिट में से अब पांच में उत्पादन हो रहा है। 15 जुलाई के कैबिनेट फैसले के मुताबिक इन 12 यूनिट में 1.64 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश मंजूर है। चालू पांचों यूनिट चिप की पैकेजिंग या डिस्क्रीट डिवाइस बनाती हैं। चिप बनाने वाला पहला फैब 2028 में चालू होना है।
कैबिनेट ने 15 जुलाई को सेमीकॉन 2.0 को 1,27,500 करोड़ रुपये के साथ मंजूरी दी। ब्लिट्ज के हिसाब से यह पहले चरण के पूरे मंजूर निवेश का करीब 77.7 फीसदी है। अब तक 70,000 इंजीनियरिंग छात्रों को प्रशिक्षण मिल चुका है, लक्ष्य एक लाख का है।
ब्लिट्ज की सलाह
सेमीकंडक्टर मिशन मंजूर हर यूनिट की तिमाही प्रगति सार्वजनिक कर सकता है। इसमें मंजूरी की तारीख, निवेश और उत्पादन शुरू होने की तारीख हो, ताकि 2028 के फैब की तैयारी पर सबकी नजर रहे।
चूहों पर कारगर रही नई एंटीवेनम
बेंगलुरु। देश में हर साल करीब 50,000 लोग सांप के काटने से जान गंवाते हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के अनुसार उसके वैज्ञानिकों ने डेनमार्क की टेक्निकल यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर नई तरह की एंटीवेनम बनाई है।
आईआईएससी
ने 9 सितंबर 2026 को बताया कि यह शोध साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन पत्रिका में छपा है। पांच नैनोबॉडी के मिश्रण ने चूहों को चश्मे वाले नाग, मोनोकल्ड कोबरा और किंग कोबरा की दोनों भारतीय प्रजातियों के जहर से बचाया। जहर देने के 30 मिनट बाद दवा देने पर भी चूहे बच गए।
शोध टीम में आईआईएससी के सेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंसेज के एसोसिएट प्रोफेसर कार्तिक सुनगर शामिल हैं। उन्होंने कहा, एंटीवेनम का इलाज सौ साल से लगभग नहीं बदला। आज की दवा घोड़ों को जहर देकर बनाई जाती है, जबकि नैनोबॉडी सूक्ष्मजीवों से बन सकती है।
यह शोध अभी चूहों पर हुआ है, इंसानों पर नहीं। विज्ञप्ति में इंसानी परीक्षण का जिक्र नहीं है। पर रास्ता खुला तो गांव-देहात के लिए, भारतीय सांपों के हिसाब से, भारत में बनी दवा मिल सकेगी।
ब्लिट्ज की सलाह
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और जैव प्रौद्योगिकी विभाग अगले चरण के सुरक्षा परीक्षण और पहले मानव परीक्षण के लिए पैसा दे सकते हैं। दवा नियामक सीडीएससीओ ऐसी दवाओं की मंजूरी का रास्ता पहले से तय कर सकता है।
बेंगलुरु मेट्रो को अनुमान का 23 फीसदी किराया
नई दिल्ली। बेंगलुरु मेट्रो को 2016-17 से 2022-23 के बीच किराये से 1,758.13 करोड़ रुपये मिले, जबकि परियोजना रिपोर्ट में 7,736.70 करोड़ रुपये का अनुमान था। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट नंबर 7 (2026) के मुताबिक यह अनुमान का 22.72 फीसदी है। रिपोर्ट 10 अगस्त 2026 को संसद में रखी गई।
ऑडिट के मुताबिक बस और मेट्रो को मिलाकर भी यात्रियों की गिनती पहले की बस सवारी से कम रही। बीएमटीसी बसों में रोज के यात्री 2014-15 में 51.30 लाख थे, जो 2022-23 में 27.49 लाख रह गए। ब्लिट्ज के हिसाब से यह 46.4 फीसदी की गिरावट है।
बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने जवाब में कहा है कि नेटवर्क बढ़ने के साथ यात्री बढ़ेंगे। कर्नाटक सरकार का जवाब मार्च 2026 तक नहीं आया था।
ब्लिट्ज की सलाह
सीएजी की पहली सिफारिश यही है कि यात्रियों का अनुमान व्यापक गतिशीलता योजना पर आधारित और यथार्थवादी हो, और बस के रूट व किराये मेट्रो से जोड़े जाएं। आवास और शहरी कार्य मंत्रालय इसे हर नई मेट्रो परियोजना की केंद्रीय मदद की शर्त बना सकता है।
आयुष्मान कार्ड 48 करोड़ के पार
नई दिल्ली। आयुष्मान भारत पीएम-जय के आठ साल पूरे होने तक 48 करोड़ 54 लाख से ज्यादा आयुष्मान कार्ड बन चुके हैं। आकाशवाणी ने 23 सितंबर 2026 को बताया कि करीब 13 करोड़ लोगों का बिना नकद इलाज हुआ है। योजना 60 करोड़ से ज्यादा लोगों को पांच लाख रुपये सालाना का कवर देती है। 38,000 अस्पताल इससे जुड़े हैं।
रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़
नई दिल्ली। देश में रक्षा उत्पादन 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड पर पहुंचा। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह पिछले साल से 15.6 फीसदी ज्यादा है। रक्षा निर्यात भी रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये रहा। 2029 का लक्ष्य तीन लाख करोड़ रुपये के उत्पादन का है।
फोटो नहीं — यह खाना खाली रखें : मंत्रालय की विज्ञप्ति में किसी कार्यक्रम की तस्वीर नहीं है; कोई तस्वीर नहीं चलेगी।
छह महीने में निर्यात 13.84% बढ़ा
नई दिल्ली। देश का कुल निर्यात अप्रैल-सितंबर 2026 में 476.20 अरब डॉलर रहा, जो एक साल पहले से 13.84 फीसदी ज्यादा है। वाणिज्य विभाग ने 15 अक्टूबर को यह आंकड़ा जारी किया। सितंबर में इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात 70.44 फीसदी उछलकर 5.31 अरब डॉलर पर पहुंचा।














