नई दिल्ली। रोजगार बाजार में तेजी से बदलती तकनीक और उद्योगों की जरूरतों के बीच सरकार ने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को आधुनिक और उद्योग केंद्रित बनाने की दिशा में पीएम-सेतु योजना शुरू की थी। 4 अक्टूबर 2025 को शुरू हुई इस योजना का एक वर्ष पूरा हो चुका है। योजना का कुल परिव्यय 60,000 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र का हिस्सा 30,000 करोड़, राज्यों का 20,000 करोड़ और उद्योग का 10,000 करोड़ रुपये है। इसका पहला प्रमुख घटक 1,000 सरकारी आईटीआई को हब-एंड-स्पोक मॉडल में उन्नत करना है। इनमें 200 हब और 800 स्पोक आईटीआई शामिल हैं। सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार पहले वर्ष में 850 आईटीआई की पहचान की जा चुकी है, जिनमें 172 हब और 678 स्पोक आईटीआई हैं। इसके अलावा 14 आईटीआई क्लस्टरों की रणनीतिक निवेश योजनाओं को मंजूरी मिली है, जिनमें करीब 3,446 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। योजना में उद्योग की भागीदारी को संस्थागत बनाने के लिए विशेष प्रयोजन संस्था (एसपीवी) का प्रावधान है। प्रस्तावित ढांचे में एंकर उद्योग भागीदार की हिस्सेदारी 51%, जबकि केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 24.5-24.5% रखी गई है। इसका उद्देश्य स्थानीय उद्योगों की जरूरत के मुताबिक पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण, उपकरण और उद्योग आधारित प्रशिक्षण को विकसित करना है। पीएम सेतु के तहत प्रशिक्षण को नई तकनीकों से जोड़ने पर भी जोर है। प्रशिक्षण महानिदेशालय ने 32 नए दौर के पाठ्यक्रम शुरू किए हैं, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, ड्रोन, इलेक्टि्रक वाहन, अर्धचालक तकनीक, रोबोटिक्स, हरित हाइड्रोजन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, सौर ऊर्जा और 5जी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। योजना के दूसरे घटक के तहत भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, कानपुर और लुधियाना स्थित पांच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता बढ़ाकर उन्हें कौशल के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित करने की योजना है।
इनमें कुछ संस्थानों के लिए सिंगापुर, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी किया जा रहा है। देश में आईटीआई का नेटवर्क भी पिछले वर्षों में बढ़ा है। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के जुलाई 2026 के आंकड़ों के अनुसार आईटीआई की संख्या 2014 के 9,642 से बढ़कर 2026 में 13,856 हो गई, जबकि नामांकन 2014-15 के 9.51 लाख से बढ़कर 2025-26 में 14.70 लाख पहुंच गया।
योजना के पहले वर्ष में संस्थानों की पहचान और क्लस्टर स्तर पर निवेश को मंजूरी मिलने के बाद अगली चुनौती इसे जमीन पर उतारने की है। आधुनिक मशीनों और प्रयोगशालाओं की उपलब्धता, प्रशिक्षकों की क्षमता, उद्योगों में व्यावहारिक प्रशिक्षण और प्रशिक्षण के बाद रोजगार से जुड़ाव यह तय करेंगे कि पीएम-सेतु का असर आईटीआई विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता पर कितना पड़ता है। सरकार के अनुसार योजना का लक्ष्य पांच वर्षों में 20 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करना भी है। 850 आईटीआई की पहचान की जा चुकी है।














