देहरादून। उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को अब पैदल मार्ग पर हेलमेट पहनना होगा। इसके लिए रुद्रप्रयाग प्रशासन ने अनिवार्य शर्त जोड़ दी है। बारिश और भूस्खलन थमने के बाद गत मंगलवार सुबह यात्रा फिर शुरू कर दी गई, लेकिन श्रद्धालुओं को 100-100 के जत्थों में रवाना किया गया। उन्हें प्रशासन ने हेलमेट पहनवाए क्योंकि लगातार बारिश के चलते यात्रा मार्ग में कई जगह संवेदनशील भूस्खलन जोन सक्रिय हैं। तीन दिन पहले पहाड़ से पत्थर गिरने से एक श्रद्धालु की मौत हो गई थी। इसी तरह, बद्रीनाथ रूट पर भी एक मौत हो चुकी है।
यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चरों के मालिकों के लिए भी हेलमेट अनिवार्य किया गया है। प्रशासन के मुताबिक सोमवार को 6500 यात्री मार्ग में फंस गए थे। सभी को निकाल लिया गया है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि 250 से अधिक हेलमेट खरीदे गए हैं। चीरबासा भूस्खलन जोन पार करते ही हेलमेट ले लिए जाते हैं और दूसरे श्रद्धालुओं को दिए जाते हैं।
केदारनाथ सहित चारधाम यात्रा का दूसरा चरण मंगलवार से फिर शुरू हो गया है लेकिन मानसून के बीच केदारनाथ की पैदल यात्रा अब भी चुनौती बनी हुई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सोनप्रयाग से केदारनाथ तक 21 किमी लंबे पैदल मार्ग पर ऐसे 13 भूस्खलन जोन हैं, जहां हल्की बारिश में भी पहाड़ दरकने से जोखिम बढ़ जाता है। ये स्थान मुनकटिया, गौरीकुंड, जंगलचट्टी, चीरबासा, भीमबली, छोटी लिनचोली, रक्सासा हेलिपैड और बड़ी लिनचोली के आसपास चिह्नित किए गए हैं।
बद्रीनाथ हाईवे पर भी खतरे
वहीं, बद्रीनाथ हाईवे पर वैसे तो कई भूस्खलन जोन हैं, पर हालिया बारिश में कमेडा, चड़वापीपल, पर्थाडीप, नंदप्रयाग, मैठाणा, पातालगंगा, पागलनाला, लामबगड़ व कंचनगंगा समेत 11 जगह सक्रिय भूस्खलन जोन भी चुनौती से कम नहीं हैं। इन सब के बीच यात्रा ऑपरेटर सौरभ शर्मा के अनुसार केदारनाथ में हेलीसेवा भी शुरू हो गई है और मंगलवार को 25 श्रद्धालुओं ने इसका उपयोग किया।
मौसम का पूर्वानुमान
एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भारतीय मौसम विभाग चारधाम यात्रा के लिए अलग से क्षेत्र-वार नाऊकास्ट यानी तात्कालिक पूर्वानुमान जारी करता है जो वर्तमान समय या बहुत निकट भविष्य (अगले कुछ घंटों) की स्थिति का अनुमान होता है। इससे मौसम में अचानक होने वाले बदलावों (जैसे बारिश या आंधी) की तुरंत जानकारी मिलती है।
इस व्यवस्था के अंतर्गत “रुद्रप्रयाग टू केदारनाथ” अलग सेक्टर है। 15 सितंबर के उपलब्ध आधिकारिक बुलेटिन में इस सेक्टर में हल्की से मध्यम बारिश और हल्की गरज की संभावना दर्ज थी। इसलिए मानसून के दौरान यात्रा संबंधी खबर में भारतीय मौसम विभाग का यह डेटा सुरक्षा संदर्भ के लिए उपयोगी है।
केदारनाथ यात्रा: आंकड़ों में
3,586 मीटर केदारनाथ की ऊंचाई
16–17 किमी गौरीकुंड से पैदल मार्ग, अलग-अलग सरकारी पोर्टलों के अनुसार
2,400 घोड़े-खच्चरों की सुझाई गई अधिकतम संख्या
417 पालकियों की सुझाई दैनिक सीमा
406 पोर्टर/कंडी की सुझाई दैनिक सीमा
क्यूआर पंजीकरण अनिवार्य चारधाम यात्रा के लिए
1070 राज्य आपातकालीन टोल-फ्री नंबर
स्रोत: रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन, उत्तराखंड पर्यटन एवं 25 मई 2026 की कैरियिंग कैपिसिटी स्टडी
केदारनाथ यात्रा 2026: महत्वपूर्ण तथ्य
हेली सेवा के प्रमुख स्थानः गुप्तकाशी, सिरसी और फाटा से सेवाएं उपलब्ध बताई गई हैं।
केदारनाथ यात्रा कंट्रोल रूमः 01364-297878 / 01364-297879
केदारनाथ हेली हेल्पलाइनः +91 98709 63731
राज्य आपातकालीन सहायताः 1070 (टोल फ्री) / 0135-2710334 ।
सुरक्षात्मक सुझाव
25 मई 2026 की वैज्ञानिक कैरियिंग कैपिसिटी स्टडी में केदारनाथ ट्रैक पर एक दिन में यात्रियों की संख्या 18,044 तक सीमित रखने की सिफारिश की गई है। साथ ही केवल पंजीकृत यात्रियों को मार्ग पर जाने देने, ऑन-साइट पंजीकरण रोकने और घोड़े-खच्चरों, पालकियों तथा पोर्टर/कंडी की संख्या नियंत्रित करने की सिफारिश की गई है।
सुरक्षा के लिहाज से अध्ययन में केदारनाथ ट्रैक पर रोड क्रैश बैरियर, रिफ्लेक्टर और ड्रेनेज सिस्टम, अधिक सूचना एवं दिशा-सूचक बोर्ड और मौजूदा रेलिंग की जांच कर उन्हें मजबूत करने की भी सिफारिश की गई है। गौरीकुंड से केदारनाथ तक श्रद्धालुओं और खच्चरों के लिए अलग-अलग मार्ग बनाने का प्रस्ताव भी इसमें शामिल है।














