नोएडा। ‘लोटस 300’ परियोजना के खरीदारों को रजिस्ट्री के साथ फ्लैट पर पूरा मालिकाना हक मिल गया है। बिल्डर ने सोसायटी को अधूरा छोड़ा तो 2013 में 20 लोगों ने पहली बैठक की। माथे पर घर नहीं मिलने की चिंताएं थीं। 20 लोग साथ हुए तो अलग अलग सुझाव मिले। सुझावों से आगे बढ़ने का हौसला मिला। पहला कार्य सभी खरीदारों को ढूंढ़कर एकत्र करना था। यह मुश्किल कार्य दो वर्ष में पूरा हुआ।
कानूनी लड़ाई जारी रखी
खरीदारों को खोजकर 2015 में अंतिम निर्णय की वार्ता हुई। सोसायटी को सामूहिक फंड से पूरा कराने का निर्णय और उसके साथ कानूनी लड़ाई लड़ने की सहमति बनी। निवेशकों ने खुद से 35 करोड़ रुपये लगाकर अधूरे फ्लैटों का निर्माण पूरा किया। कानूनी लड़ाई जारी रखी।
हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक चली लड़ाई में निवेशकों के हित में फैसला आया। बिल्डर के बकाया नहीं चुका पाने के बावजूद खरीदारों के पक्ष में रजिस्ट्री तो हो रही थी, लेकिन फ्लैट बेचने और लोन लेने पर रोक थी। यह रोक दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी। कोर्ट ने इसे अब हटा दिया है। ‘लोटस-300’ मामले में न्यायालय का फैसला सबसे अलग है।
13 वर्ष की लंबी लड़ाई के बाद अब खरीदारों को फ्लैट बेचने और उस पर लोन लेने के पूर्ण अधिकार मिल गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सोसायटी के 330 फ्लैटों में से 261 की रजिस्ट्री हो चुकी है। बाकी खरीदारों के दस्तावेज सत्यापन के प्रक्रिया में हैं। पहले रजिस्टि्रयां सशर्त थीं, जिसमें बेचने और लोन लेने पर पाबंदी थी। रोक हटने से मालिकों को हक मिल गया है।














