नई दिल्ली। भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने अरावली हिल्स की परिभाषा मामले पर बनी हाई पावर्ड कमेटी की ओर से एक्सटेंशन की मांग सिरे से खारिज करते हुए इसे जमकर लताड़ लगाई है। कमेटी ने रिपोर्ट सौंपने के लिए 28 फरवरी, 2027 तक का एक्सटेंशन मांगा है, जिसे सीजेआई सूर्यकांत ने सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि ऐसे तो ‘सीधे मेरी रिटायरमेंट के बाद का डेट मांग लेनाचाहिए था।’
‘अगर सक्षम नहीं हैं, दूसरी कमेटी बनाएंगे’
सीजेआई ने कहा, ‘अगर वे सक्षम नहीं हैं, तो हम (कमेटी को) पुनर्गठित कर देंगे।’सीजेआई की बेंच ने आदेश दिया है कि कमेटी दिन-रात काम करे और दो महीने (30 नवंबर, 2026) के अंदर अपनी रिपोर्ट दाखिल करे। यह मामला अरावली पहाड़ियों और अरावली पर्वत-श्रेणियों की परिभाषा और उनसे जुड़े अन्य मुद्दों का है।
सुप्रीम कोर्ट में 2 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार पहले अरावली पैनल की रिपोर्ट 31 अगस्त को पेश होनी थी। पैनल का कार्यकाल फिर बढ़ाए जाने की मांग पर सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच में हुई। इस एक्सपर्ट पैनल का गठन कोर्ट के आदेश पर ही इसी साल किया गया था।
बेंच ने अपने आदेश में पैनल से कहा है कि वह राजस्थान और गुजरात के आदिवासी समुदायों समेत सभी स्टेकहोल्डरों से बात करे और चाहे तो चुनिंदा मसलों पर अंतरिम रिपोर्ट दाखिल करे, ताकि कोर्ट अहम सवालों का अलग से समाधान निकाले। सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी।
सीजेआई सूर्यकांत का कार्यकाल
सीजेआई सूर्यकांत 9 फरवरी, 2027 को रिटायर होंगे। उन्होंने 24 नवंबर, 2025 को कार्यभार संभाला था।
सीजेआई सूर्यकांत के बाद सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ के नए सीजेआई बनने की संभावना है।














