नई दिल्ली। गृह मंत्रालय देश की सभी भूमि सीमाओं की सुरक्षा और मजबूत करने के लिए तकनीक आधारित कमांड एवं कंट्रोल प्रणाली विकसित कर रहा है। इसके तहत सीमावर्ती क्षेत्रों से मिलने वाले निगरानी इनपुट को कमांड सेंटरों के नेटवर्क के माध्यम से फील्ड स्तर से दिल्ली स्थित मुख्यालय तक जोड़ा जाएगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य सीमाओं पर निगरानी और किसी भी खतरे के प्रति त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करना है।
नई सीमा प्रबंधन नीति
अधिकारियों ने बताया कि नई सीमा प्रबंधन नीति के तहत उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां भौतिक बाड़ लगाना संभव नहीं है। इनमें चीन के साथ लगी 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा भी शामिल है, जो लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक कई स्थानों पर अभी पूरी तरह सीमांकित नहीं है। इस व्यवस्था का पायलट प्रोजेक्ट जल्द ही पाकिस्तान सीमा से शुरू किया जाएगा।
त्वरित कार्रवाई हो सकेगी
प्रस्तावित स्मार्ट बॉर्डर व्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेंसर, कैमरे, ड्रोन, निगरानी प्रणालियां और इमेज प्रोसेसिंग जैसी तकनीकों को एकीकृत किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, इससे अलग-अलग स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं को एक साझा परिचालन तस्वीर में बदलने में मदद मिलेगी। इससे सुरक्षा एजेंसियां घुसपैठ, तस्करी तथा अन्य सुरक्षा चुनौतियों पर तेजी से कार्रवाई कर सकेंगी।
गश्त की जरूरत कम होगी
अधिकारियों ने बताया कि भूमि सीमाओं पर कई छोटे कमांड सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इन्हें क्षेत्रीय फील्ड मुख्यालयों और आगे दिल्ली स्थित मुख्यालय से जोड़ा जाएगा। लाइव निगरानी फीड के माध्यम से सीमा सुरक्षा बलों को वास्तविक समय में स्थिति पर नजर रखने में मदद मिलेगी। इससे जरूरत के अनुसार संसाधनों की तैनाती की जा सकेगी और हर स्थान पर लगातार भौगोलिक गश्त की आवश्यकता भी कम हो सकती है।
पाक सीमा प्राथमिकता
पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन के जरिए तस्करी और निगरानी की बढ़ती चुनौती को इस व्यवस्था में विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन गतिविधियों की पहचान, निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए तकनीकी समाधान विकसित किए जाएंगे।
एक जैसी तकनीक लागू नहीं होगी
अधिकारियों ने बताया कि सभी सीमाओं पर एक जैसी तकनीक लागू नहीं की जाएगी। भारत की सीमाएं रेगिस्तान, पहाड़, नदियों, जंगलों और घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरती हैं।














