नई दिल्ली। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आलोक में भारत व चीन के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने की कवायद तेज हो गई है। विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है कि चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग सात साल के अंतराल के बाद अपनी पहली भारत यात्रा पर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली आए।
चीन 2025-26 में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। भारत और चीन के बीच व्यापार की स्थिति पर एक नजर इस प्रकार है-
द्विपक्षीय व्यापार के लिहाज से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025-26 में 7.9 फीसद बढ़कर 127.7 अरब डालर हो गया, जो 2024-25 में 118.39 अरब डालर था। व्यापार घाटा पिछले वित्त वर्ष में बढ़कर 99.19 अरब डालर हो गया, जो 2024-25 में 85 अरब डालर, 2023-24 में 83.2 अरब डालर, 2022-23 में 73.3 अरब डालर, 2021-22 में 44 अरब डालर, 2020-21 में 48.64 अरब डालर और 2019-20 में 53.56 अरब डालर था।
चीन को भारत का निर्यात 2025-26 में 36.62 फीसद बढ़कर 19.47 अरब डालर हो गया, जो 2024-25 में 14.25 अरब डालर था। दूसरी ओर, आयात पिछले वित्त वर्ष में 16 फीसद बढ़कर 131.62 अरब डालर हो गया, जो 2024-25 में 113.44 अरब डालर था। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के कुल वस्तु आयात में चीन की हिस्सेदारी करीब 17 फीसद थी, जो 2024-25 में 15.7 फीसद थी।
वहीं, निर्यात में चीन की हिस्सेदारी पिछले वित्त वर्ष में बढ़कर 4.4 फीसद रही थी जो 2024-25 में 3.2 फीसद थी। चीन पर निर्भरता की बात करें तो वर्ष 2025 में चीन से भारत के आयात में 98.5 फीसद हिस्सा औद्योगिक उत्पादों का था, जबकि कृषि, ईंन्धन तथा इत्र एवं आभूषण का संयुक्त हिस्सा 1.5 फीसद से कम था।














