मुनीष गुप्ता
नई दिल्ली। भारत ने तब एक बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल की, जब ब्रिक्स द्वारा अंगीकार किए गए ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ में जम्मू कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई। साथ ही देश-समर्थित सीमा पार आतंकवाद के प्रति ‘कतई बर्दाश्त नहीं’ की नीति अपनाने का आह्वान किया। इस हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी। ब्रिक्स ने आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनाने और इससे निपटने में दोहरे मापदंडों को त्यागने के भारत के आह्वान का भी पूर्ण समर्थन किया। इसके साथ ही समूह ने दोहराया कि इजरायल-फिलस्तीन संघर्ष का न्यायसंगत व स्थायी समाधान केवल शांतिपूर्ण तरीकों से ही हासिल किया जा सकता है और देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने का आह्वान किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ को अपनाने की घोषणा की। ‘लचीलेपन, नवोन्मेष, सहयोग और स्थिरता का निर्माण’ शीर्षक वाले इस व्यापक घोषणापत्र में वैश्विक आतंकवाद, अवैध वित्तीय लेन-देन, साइबर धोखाधड़ी और उभरते हुए सीमा पार धोखाधड़ी नेटवर्क के खिलाफ इस समूह का एकजुट रुख सामने आया। घोषणापत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आतंकवाद की सभी गतिविधियां आपराधिक और अनुचित हैं, चाहे उनका उद्देश्य कुछ भी हो, और उन्हें कभी भी, कहीं भी या किसी के भी द्वारा अंजाम दिया गया हो। ब्रिक्स नेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों और तरीकों से निपटने के अपने संकल्प को दोहराते हुए, आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही रोकने, आतंकी वित्तपोषण तंत्र को ध्वस्त करने और उनके सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।

सदस्य देशों ने दोहराया कि आतंकवाद को किसी भी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए, और साथ ही यह भी कहा कि आतंकी गतिविधियों में संलिप्त लोगों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। वहीं, ब्रिक्स ने आतंकवाद से निपटने में दोहरे मापदंडों को त्यागने के भारत के आह्वान का भी पूर्ण समर्थन किया। प्रभावशाली समूह के शीर्ष नेताओं ने आतंकवाद की चुनौती से निपटने के लिए समन्वित दृष्टिकोण अपनाने पर भी सहमति जताई। घोषणापत्र में कहा गया कि हम आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों से निपटने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं, जिसमें आतंकवादियों की सीमा पार घुसपैठ,
आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह शामिल हैं। ब्रिक्स ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद से निपटना देशों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

साथ ही, संगठन ने कहा कि आतंकवादी खतरों की रोकथाम और उनसे मुकाबला करने के वैश्विक प्रयासों के दायित्वों का संयुक्त राष्ट्र चार्टर सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पूरी तरह पालन करना चाहिए। ब्रिक्स ने दोहराया कि इजराइल-फिलस्तीन संघर्ष का न्यायसंगत और स्थायी समाधान केवल शांतिपूर्ण तरीकों से ही हासिल किया जा सकता है।
भारत की बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि
भाजपा ने ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा को भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत बताया। पार्टी ने कहा कि देश ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी मुहिम को वैश्विक आम सहमति दिलाने में सफलता हासिल की है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत। ब्रिक्स आतंकवाद के खिलाफ एकजुट है।
भंडारी ने कहा, ‘इसमें आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने, इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने, संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने, आतंकवाद के वित्तपोषण और पनाहगाहों को खत्म करने तथा सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आह्वान किया गया है।’
उन्होंने कहा, ‘इसमें कोई अस्पष्टता नहीं है। कोई दोहरा मापदंड नहीं है। पहलगाम के मुद्दे पर ब्रिक्स देशों का रुख एक जैसा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी मुहिम को वैश्विक आम सहमति दिलाने में सफलता हासिल की है।’ भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत जय पांडा ने कहा कि नई दिल्ली घोषणापत्र को सर्वसम्मति से अपनाया जाना शांति, संवाद और कूटनीति के प्रति साझा प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि करता है।














