नई दिल्ली। देश से नक्सलियों का सफाया करने में अहम भूमिका निभाने वाली सीआरपीएफ की जंगल और गुरिल्ला युद्ध में महारत कोबरा कमांडो यूनिट की कमान पहली बार किसी महिला आईपीएस ने संभाली है। असम-मेघालय कैडर और 2006 बैच की आईपीएस संजुक्ता पराशर कोबरा की आईजी बनी हैं।
आयरन लेडी के नाम से भी जानी जाती हैं
इन्हें असम की आयरन लेडी के नाम से भी जाना जाता है। इनके कोबरा आईजी बनने के साथ ही सीआरपीएफ की अलग-अलग यूनिट में आईजी के तौर पर अब सात महिला आईपीएस अधिकारी कमान संभाल रहीं हैं।
सीआरपीएफ में वह अपने मूल कैडर असम से आई हैं। जहां वह सीआईडी चीफ थी। वह 2017 से 2023 तक राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए में भी बतौर एसपी और फिर प्रमोट होकर डीआईजी भी रह चुकी हैं। 2023 में उन्हें असम भेज दिया गया था।
कोबरा की चीफ बनने वाली पहली महिला आईपीएस
इसके बाद छह अगस्त को केंद्रीय गृह मंत्रालय से उनके सेंट्रल डेपुटेशन पर सीआरपीएफ में जाने के आदेश आए। यहां से 21 अगस्त को उनके आईजी इंटेलिजेंस के आदेश हुए थे लेकिन इन्होंने पदभार नहीं संभाला था। जहां से अब 10 सितंबर को इनके कोबरा आईजी के आदेश हुए। इसके बाद इन्होंने पदभार संभाला। सीआरपीएफ की बेहद खतरनाक 10 बटालियन वाली फोर्स कोबरा की चीफ बनने वाली वह पहली महिला आईपीएस हैं।
संजुक्ता ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से किया ग्रेजुएशन
दिलचस्प बात यह भी है कि सीआरपीएफ के 1991 बैच के मौजूदा डीजी ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह भी असम-मेघालय कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। संजुक्ता ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के आईपी कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया। फिर जेएनयू से इंटरनेशनल रिलेशंस में आगे की पढ़ाई की। उन्होंने एमफिल और पीएचडी भी की है। 16 बोडो उग्रवादी मारने और 64 को गिरफ्तार करने के अभियान में उन्होंने टीम को लीड किया था।














