नई दिल्ली। ईपीएफ 2026 के नए नियमों के अनुसार आपदा या महामारी के समय सरकार कर्मचारियों और कंपनियों के पीएफ योगदान को घटाने या टालने का फैसला ले सकेगी।
कर्मचारी भविष्य निधि योजना यानी ईपीएफ में सरकार ने एक अहम आपातकालीन प्रावधान जोड़ा है। इसके तहत किसी भी महामारी या राष्ट्रीय आपदा की स्थिति में सरकार नियोक्ता और कर्मचारी के पीएफ योगदान में कटौती या उसे स्थगित कर सकती है। इस नए नियम का आपकी सैलरी, पीएफ खाते और रिटायरमेंट फंड पर निश्चित तौर पर असर पड़ेगा।
ईपीएफ स्कीम 2026 में क्या नया प्रावधान जोड़ा गया
यदि देश में कोई महामारी या राष्ट्रीय आपदा आती है तो केंद्र सरकार को यह अधिकार होगा कि वह कर्मचारियों और कंपनियों के पीएफ योगदान को एक बार में अधिकतम तीन महीने के लिए घटा सके या टाल सके। यह राहत पूरे देश में या किसी खास राज्य/क्षेत्र के लिए लागू की जा सकती है।
क्या इस नियम के लागू होते ही हर महीने होने वाली पीएफ कटौती कम हो जाएगी
बिल्कुल नहीं। यह एक इमरजेंसी पावर है, जो सरकार को जरूरत पड़ने पर फैसला लेने की अनुमति देती है। जब तक सरकार किसी आपदा या महामारी के दौरान विशेष नोटिफिकेशन जारी नहीं करती, तब तक पीएफ कटौती का सामान्य नियम (मूल वेतन का 12%) ही लागू रहेगा।
क्या कर्मचारी खुद अपनी मर्जी से पीएफ योगदान कम करने का विकल्प चुन सकते हैं?
कर्मचारी या कंपनी अपनी तरफ से इसमें कोई बदलाव नहीं कर सकते। सामान्य परिस्थितियों में स्टैंडर्ड 12% योगदान (या अधिसूचित संस्थानों में 10%) देना अनिवार्य रहेगा।














