नई दिल्ली। भारतीय रेलवे का देश का पहला समर्पित हाई-स्पीड टेस्ट ट्रैक निर्माण के अंतिम चरण में पहुंच गया है। इस ट्रैक पर ट्रेनों का परीक्षण 220 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से किया जा सकेगा। करीब 967.07 करोड़ रुपये की लागत से यह परियोजना रेलवे के अनुसंधान, डिजाइन एवं मानक संगठन द्वारा विकसित की जा रही है।
यह हाई-स्पीड टेस्ट ट्रैक राजस्थान में जोधपुर मंडल के गुढ़ा-ठठाना मीठड़ी के बीच बनाया जा रहा है। यह क्षेत्र जयपुर से करीब 70 किलोमीटर दूर है और उत्तर पश्चिम रेलवे के प्रशासनिक क्षेत्र में आता है। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि देश का पहला समर्पित हाई-स्पीड टेस्ट ट्रैक अब अंतिम चरण में है। राजस्थान में तैयार की जा रही इस सुविधा पर देश-विदेश में निर्मित ट्रेनों और रेलवे उपकरणों का परीक्षण किया जा सकेगा। इससे भारतीय रेलवे को नई तकनीक को तेजी से अपनाने तथा ट्रेनों और रेलवे बुनियादी ढांचे के प्रदर्शन में सुधार करने में मदद मिलेगी।
राजस्थान में गुढ़ा-ठठाना मीठड़ी के बीच 59 किलोमीटर लंबा नया ब्रॉड गेज समर्पित टेस्ट ट्रैक विकसित किया गया है। यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रोलिंग स्टॉक के व्यापक परीक्षण की सुविधा प्रदान करेगा। इसके जरिए भारत यूइईसी-518/ईएन-14363 मानकों के अनुरूप व्यापक परीक्षण सुविधाओं वाला देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
रेलवे अधिकारी के अनुसार, 2027-28 से विभिन्न प्रकार के रोलिंग स्टॉक, जिनमें सेमी-हाई-स्पीड वंदे भारत ट्रेनसेट भी शामिल हैं, का परीक्षण और ट्रायल शुरू होने की उम्मीद है।
चार प्रमुख परीक्षण सेक्शन
परियोजना के तहत 23 किलोमीटर लंबी मुख्य लाइन, गुढ़ा में 13 किलोमीटर लंबा हाई-स्पीड लूप, नावा में 3 किलोमीटर लंबा एक्सेलरेटेड टेस्टिंग लूप और मीठड़ी में 20 किलोमीटर लंबा कर्व टेस्टिंग लूप बनाया जा रहा है।
अधिकारी ने बताया कि रोलिंग स्टॉक के स्थैतिक परीक्षण के लिए 4.5 किलोमीटर लंबा ट्विस्टेड ट्रैक पहले ही पूरा कर चालू किया जा चुका है। वहीं, 31.5 किलोमीटर लंबे हाई-स्पीड स्ट्रेच और 3 किलोमीटर लंबे एक्सेलरेटेड टेस्टिंग लूप का काम लगभग पूरा हो चुका है और सितंबर 2026 तक इसके पूरा होने की उम्मीद है। मीठड़ी में 20 किलोमीटर लंबे कर्व टेस्टिंग लूप का काम भी उन्नत चरण में है और इसके 2026 के अंत तक परिचालन में आने की संभावना है।
गुढ़ा स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव
परियोजना को मौजूदा रेलवे नेटवर्क से जोड़ने के लिए उत्तर पश्चिम रेलवे ने गुढ़ा स्टेशन पर आवश्यक बदलावों का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इसमें जोधपुर मंडल की क्योसान इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली में संशोधन, गुढ़ा एंड स्टेशन की ओर स्लॉट कंट्रोल की व्यवस्था तथा सभी 18 प्वाइंट के प्वाइंट इंडिकेशन सर्किट में बदलाव शामिल हैं।













