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माल ढुलाई में नए दौर का सूत्रपात

गुजरात में पहली डबल-स्टैक लॉन्ग-हॉल कंटेनर ट्रेन ने ढोया 3922 टन वजन

by ब्लिट्ज़ इंडिया
September 7, 2026
in भारतीय रेल
0
डबल-स्टैक लॉन्ग-हॉल कंटेनर ट्रेन

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने मुंबई के पास स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट से वडोदरा मंडल के वरणामा स्थित कॉनकोर के जीसीटी टर्मिनल तक पहली डबल-स्टैक लॉन्ग-हॉल कंटेनर ट्रेन का सफल संचालन किया। इस ट्रेन ने लगभग 422 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए 360 टीईयू कंटेनर ढोए। ढोए गए माल का कुल वजन 3922 टन रहा।

यह ट्रेन पिछले सप्ताह जेएनपीटी से रवाना हुई और पश्चिमी समर्पित माल गलियारे (वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर) पर चली। यह एक ही रेल यात्रा में कंटेनर माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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भारतीय रेलवे का स्वरूप दिनों-दिन तेजी से बदल रहा है। एक आेर जहां बुलेट ट्रेन चलाने की परियाेजना तेजी से अपने मुकाम की ओर आगे बढ़ रही है तो वहीं माल ढुलाई के क्षेत्र में भी रेलवे नए कीर्तिमान बना रहा है।

इस लॉन्ग-हॉल ट्रेन में दो डबल-स्टैक रैक को जोड़कर चलाया गया। आगे वाले रैक ने जेएनपीटी-वडोदरा मार्ग पर 45+1 लोड संरचना के साथ सफर किया। इसे लोकोमोटिव संख्या 60311 ने खींचा और इसका कुल वजन 1,817 टन था। पीछे वाले रैक में भी 45+1 लोड संरचना थी। इसे लोकोमोटिव संख्या 24690 ने खींचा और इसका वजन 2,105 टन था। दोनों रैक मिलाकर कुल 360 टीईयू कंटेनर ले जाए गए, जिनमें प्रत्येक रैक में 180 टीईयू कंटेनर थे। इस पहल का उद्देश्य जेएनपीटी और अन्य माल ढुलाई टर्मिनलों से कंटेनरों की निकासी को तेज और अधिक प्रभावी बनाना है। एक ही ट्रेन में अधिक माल भेजने से टर्मिनलों पर भीड़ कम होगी और कंटेनरों को लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अधिक वहन क्षमता होने के कारण समान मात्रा में माल ढोने के लिए कम रेल डिब्बों की जरूरत पड़ेगी। इससे उपलब्ध रेल मार्ग क्षमता का बेहतर उपयोग होगा, कंटेनरों की आवाजाही तेज होगी और कुल परिवहन समय भी कम होगा।

टर्मिनलों पर भीड़ कम होगी, कंटेनरों का लंबा इंतजार होगा खत्म

इसका असर सड़क परिवहन पर भी पड़ेगा। चूंकि यह ट्रेन बिजली से संचालित हुई, इसलिए डीजल चालित सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होगी। एक ट्रेन में बड़ी मात्रा में कंटेनर ले जाने से उतने ही माल के लिए ट्रकों की संख्या घटेगी। इससे डीजल की खपत, सड़कों पर भीड़ और वाहनों से होने वाला प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब देश के समर्पित माल गलियारों पर माल ढुलाई को अधिक क्षमता और दक्षता के साथ संचालित करने पर जोर दिया जा रहा है। जेएनपीटी से वरणामा तक इस सफल संचालन ने दिखाया है कि डबल-स्टैक और लॉन्ग-हॉल ट्रेनें बंदरगाहों और देश के अंदरूनी क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत करने तथा रेल आधारित कंटेनर लॉजिस्टिक्स की क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

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