नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना के जगुआर विमान ने इजराइली रेस्ट ग्लाइड किट का सफल परीक्षण किया है। यह किट साधारण बमों को 120 किमी तक की रेंज और 10 मीटर सटीकता वाले प्रिसिजन स्टैंड-ऑफ हथियार में बदल देती है। एल्बिट सिस्टम्स द्वारा जारी वीडियो फुटेज से इस बात की पुष्टि हुई है कि यह किट जगुआर विमान के साथ जुड़ चुकी है।
यह डेवलपमेंट भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जगुआर लंबे समय से आईएएफ का मुख्य ग्राउंड अटैक प्लेटफॉर्म रहा है। अब रेस्ट किट के जरिए यह विमान दुश्मन की एयर डिफेंस जोन में ज्यादा अंदर घुसे बिना दूर से ही सटीक हमला कर सकेगा।
रेस्ट किट क्या है, कैसे काम करता है?
रेस्ट का मतलब है रेंज एक्सटेंशन एंड स्मार्ट टेल। यह एक मॉड्यूलर गाइडेंस और रेंज-एक्सटेंशन पैकेज है जो साधारण अनगाइडेड (डम्ब) बमों को स्मार्ट, प्रिसिजन और स्टैंड-ऑफ हथियार में बदल देता है। किट में स्मार्ट टेल सेक्शन होता है जिसमें आईएनएस (इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम) और जीएनएसएस (ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) गाइडेंस लगा होता है।
साथ ही एंटी-जैमिंग क्षमता भी है जो इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर वाले माहौल में भी सटीकता बनाए रखती है। बम पर लगने वाले डिप्लॉयबल अपर विंग्स रिलीज होने के बाद खुल जाते हैं। बम को ग्लाइड करने में मदद करते हैं। रिलीज की ऊंचाई और स्पीड के हिसाब से यह किट 120 किलोमीटर तक की रेंज दे सकती है। सर्कुलर एरर प्रोबेबल (सीईपी) 10 मीटर तक बताया गया है।














